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5 साल में 6 लाख के करीब मामले, इतने हजार करोड़ का नुकसान, हैरान करने वाले हैं Cyber Fraud के आंकड़े

भारत में 5.83 लाख डिजिटल पेमेंट फ्रॉड मामलों में ₹3,588 करोड़ की रकम शामिल रही. जानिए साइबर ठगी के बड़े आंकड़े और बैंकों की रिकवरी कितनी रही.

5 साल में 6 लाख के करीब मामले, इतने हजार करोड़ का नुकसान, हैरान करने वाले हैं Cyber Fraud के आंकड़े
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भारत में डिजिटल पेमेंट ने पैसे भेजने और भुगतान करने का तरीका बदल दिया है. UPI से लेकर इंटरनेट बैंकिंग और कार्ड पेमेंट तक, कुछ सेकंड में ट्रांजैक्शन पूरा हो जाता है. लेकिन डिजिटल पेमेंट की इसी रफ्तार के साथ साइबर अपराध (Cyber फ्रॉड) का खतरा भी बढ़ा है. सरकारी आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2021-22 से सितंबर 2025 तक बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने 5,83,291 डिजिटल पेमेंट फ्रॉड रिपोर्ट किए. इन मामलों में ₹3,588.22 करोड़ की रकम शामिल थी. इनमें अगर कारोबारी व सभी वित्तीय संस्थाओं को जोड़ दिए जाएं तो आरबीआई और सरकार द्वारा लोकसभा और राज्यसभा को दी गई जानकारी के मुताबिक यह आंकड़ा 36 हजार 745 करोड़ रुपये से ज्यादा का हो जाता है.

सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस रकम में से कितनी वापस आई? उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक बैंक और वित्तीय संस्थान सिर्फ ₹238.83 करोड़ ही रिकवर कर पाए, यानी कुल रकम का करीब 6.65%.

वित्त मंत्रालय ने लोकसभा में RBI के आंकड़ों के हवाले से बताया कि FY 2021-22 से सितंबर 2025 तक डिजिटल पेमेंट से जुड़े कुल 5,83,291 फ्रॉड सामने आए. इन मामलों में ₹3,588.22 करोड़ की रकम शामिल थी. इसमें सबसे ज्यादा मामले क्रेडिट कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग से जुड़े थे.

यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है. ₹3,588.22 करोड़ को सीधे 'लोगों का वास्तविक नुकसान' नहीं कहा जाना चाहिए. सरकारी टेबल में यह 'Amount involved' है. यानी फ्रॉड में शामिल रकम. इसी तरह रिकवरी का आंकड़ा उन रकमों को दर्शाता है जिन्हें बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने रिकवर किया. इसलिए स्टोरी में 'रकम शामिल थी' या 'फ्रॉड में इतनी रकम जुड़ी थी' जैसे शब्द ज्यादा सटीक रहेंगे.

इसलिए आंकड़ों को दोहराने के बजाय स्टोरी में साइबर फ्रॉड के असर, बदलते तरीके और आम यूजर की मुश्किलों कम करने के लिए कुछ बातों को समझना सभी के लिए ज्यादा जरूरी हो जाता है.

एक क्लिक की सुविधा बड़ा खामियाजा

डिजिटल पेमेंट ने लेनदेन को बेहद आसान बना दिया है, लेकिन यही सुविधा साइबर अपराधियों के लिए भी हथियार बन रही है. फर्जी कस्टमर केयर, KYC अपडेट, बैंक अलर्ट और निवेश के लालच जैसे तरीकों से लोगों को निशाना बनाया जाता है. कई बार कुछ सेकंड में किया गया गलत ट्रांजैक्शन लंबे समय की परेशानी बन जाता है.

OTP से आगे बढ़ा फ्रॉड, अब भरोसा सबसे बड़ा हथियार

साइबर अपराध का तरीका लगातार बदल रहा है. अब अपराधी सिर्फ OTP या कार्ड डिटेल हासिल करने पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि सोशल इंजीनियरिंग के जरिए पीड़ित को खुद भुगतान करने के लिए तैयार करते हैं. डर, लालच और जल्दबाजी पैदा करके अपराधी यूजर से वही काम करवाते हैं, जिससे रकम उनके खाते तक पहुंच जाती है.

फ्रॉड के बाद सबसे अहम होती है शुरुआती कार्रवाई

डिजिटल फ्रॉड में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है. जैसे-जैसे शिकायत दर्ज कराने और संदिग्ध खाते तक पहुंचने में देरी होती है, रकम को कई खातों में ट्रांसफर करने या निकाल लेने का जोखिम बढ़ जाता है. इसलिए बैंकिंग सिस्टम के साथ ग्राहक की तत्काल प्रतिक्रिया भी रिकवरी की संभावना तय करने में अहम भूमिका निभाती है.

Digital India की अगली चुनौती सिर्फ स्पीड नहीं, सुरक्षा है

भारत ने डिजिटल भुगतान को बड़े पैमाने पर अपनाकर दुनिया के सामने एक मजबूत मॉडल पेश किया है. अब अगली चुनौती इस व्यवस्था को और सुरक्षित बनाने की है. तकनीक के साथ मजबूत फ्रॉड डिटेक्शन, तेज शिकायत निवारण, बेहतर ग्राहक जागरूकता और संदिग्ध लेनदेन पर तत्काल कार्रवाई डिजिटल इकोसिस्टम में भरोसा बनाए रखने के लिए जरूरी है.

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