क्‍या होते हैं 'Zombie' Flower जिनका एपस्‍टीन फाइल्‍स में है जिक्र, भारत में महादेव से क्या है कनेक्‍शन?

Epstein Files में ‘Zombie Flower’ के रूप में चर्चित Trumpet Plant दरअसल धतूरा प्रजाति का पौधा है, जिसमें स्कोपोलामाइन जैसे साइकोएक्टिव तत्व पाए जाते हैं. दिलचस्प बात यह है कि यही धतूरा भारत में भगवान शिव की पूजा में पवित्र अर्पण माना जाता है.;

Curated By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 17 Feb 2026 11:42 AM IST

पूरी दुनिया को अचंभित करने वाली एपस्टीन फाइल्स से हर दिन एक नया खुलासा होने का क्रम आज भी जारी है. अब एक्स इस मसले को लेकर समने आये एक पोस्ट में सबसे नया दावा यह है कि अमेरिकी फाइनेंसर और बच्चों के यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन ने अपनी नर्सरी में 'ट्रम्पेट प्लांट्स' उगाए थे. ट्रम्पेट प्लांट वहीं जिससे भारत में धतूरे का फूल माना जाता है. पुराणों में समुद्र मंथन और मिथिलांचल और नेपाल के तराई क्षेत्र में महादेव की पूजा में खास तौर से इसे भोलेनाथ का चढ़ाया जाता है. हालांकि, एपस्टीन फाइल्स में इसका जिक्र 'साइकोएक्टिव प्रॉपर्टीज' के रूप में है.

साइकोएक्टिव प्रॉपर्टीज' क्या होता है?

यह मामला सामने आरे के बाद ईमेल्स के स्क्रीनशॉट्स तक सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे हैं. इससे पता चलता है कि कि फाइनेंसर ने उन पौधों में दिलचस्पी ली थी, जो अपनी शक्तिशाली 'साइकोएक्टिव प्रॉपर्टीज' के लिए बदनाम थे.

‘साइकोएक्टिव प्रॉपर्टीज’ का मतलब है, किसी पदार्थ (जैसे दवा, पौधा या केमिकल) की वह क्षमता जो दिमाग (brain) और मानसिक स्थिति (mind) पर असर डाले. सरल शब्दों में कहें तो, जो चीज आपके मूड, सोच, व्यवहार, संवेदना या चेतना को बदल दे, उसमें साइकोएक्टिव प्रॉपर्टीज होती हैं.

इसका असर कैसे होता है?

ऐसे पदार्थ मस्तिष्क के न्यूरोट्रांसमीटर (जैसे डोपामिन, सेरोटोनिन) पर प्रभाव डालते हैं, जिससे व्यक्ति को अलग-अलग तरह के अनुभव हो सकते हैं. जैसे खुशी या उत्साह, नींद या सुस्ती, घबराहट या बेचैनी, भ्रम, नशा या बेहोशी आदि.

Epstein Files में ‘Zombie Flower’ क्या है?

इसी तरह एपस्टीन फाइल्स में जिस 'जॉम्बी फ्लावर' का जिक्र है वह हिंदू पौराणिक कथाओं में भी है. एपस्टीन फाइल्स से पता चलता है कि जेफरी एपस्टीन ने अपनी नर्सरी में "ट्रम्पेट प्लांट्स" उगाए थे. भारत में, ट्रम्पेट के आकार के धतूरे के फूल की एक बहुत अलग पहचान है.

एपस्टीन के ईमेल में क्या लिखा है?

एपस्टीन फाइल्स में धतूरे के फूल से जुड़ा मेल 27 जनवरी, 2015 का है. ऐसा लगता है कि इसे फोटोग्राफर एंटोनी वर्गलस ने फॉरवर्ड किया है. मैसेज, जिसका सब्जेक्ट लाइन 'स्कोपोलामाइन: कोलंबिया के जंगलों में उगने वाली शक्तिशाली दवा जो फ्री विल को खत्म कर देती है" थी, जेफरी एपस्टीन को भेजा गया था.

स्कोपोलामाइन क्या है और क्यों कहा जाता है ‘Devil’s Breath’?

फॉरवर्ड किया गया मैसेज डेली मेल और वाइस का एक आर्टिकल था, जिसमें स्कोपोलामाइन को एक ऐसा सब्सटेंस बताया गया था, "जो लोगों को बहुत ज्यादा सजेस्टिबली' बना सकता है. आर्टिकल से कई खास बातें हाईलाइट की गईं, जैसे, "आप उन्हें जहां चाहें गाइड कर सकते हैं. यह ऐसा है, जैसे वे बच्चे हों."

Trumpet Plant, ब्रुगमेन्सिया और धतूरा में क्या फर्क है?

‘Trumpet Plant’ शब्द आमतौर पर Brugmansia और Datura प्रजातियों के लिए इस्तेमाल होता है. बड़े लटकते फूल, ट्रम्पेट आकार, ट्रोपेन एल्कलॉइड्स की मौजूदगी इनकी पहचान है.

तीसरा डॉक्यूमेंट खुद एपस्टीन के साथ कोई बातचीत नहीं है, बल्कि 7 फरवरी 2022 को गुइलेर्मो फरिनास का जुआन एंटोनियो गोंजालेज को भेजा गया एक ईमेल है, जिसमें जोसेफ मंजारो को कॉपी किया गया ह .जिसे 'विक्टिम इम्पैक्ट स्टेटमेंट' बताया गया है, उसमें मंजारो दिसंबर 2014 की एक परेशान करने वाली घटना के बारे में बताते हैं, जिसमें उनका आरोप है कि उन्हें स्कोपोलामाइन दिया गया था. यह एक ट्रोपेन एल्कलॉइड है जो कई पौधों से बनता है, जिसमें ट्रम्पेट प्लांट भी शामिल हैं.

स्टेटमेंट में साफ तौर पर स्कोपोलामाइन का जिक्र है, जिसमें दावा किया गया है कि जो दो लोग उन्हें गाड़ी चला रहे थे, उन्होंने कहा, "मैंने उन्हें बहुत सारा स्कोपोलामाइन दिया!" फिर लेखक याददाश्त जाने और बहुत ज्यादा नींद आने का आरोप लगाते है.

"ट्रम्पेट प्लांट्स" ईमेल में तीन बार आते हैं, और इन पौधों के कनेक्शन में स्कोपोलामाइन पर बात की गई है. कम से कम इतना तो रिकॉर्ड में है और हमें इन फाइलों में दिया गया है.

‘साइकोएक्टिव प्रॉपर्टीज’ क्या होती हैं?

ट्रम्पेट प्लांट आमतौर पर ब्रुगमेन्सिया या धतूरा की स्पीशीज का प्रतीक है. ये फूल वाले पौधे अपने बड़े, लटकते हुए, ट्रम्पेट जैसे फूलों के लिए जाने जाते हैं. इन पौधों को कभी-कभी 'डेविल्स ब्रीथ' या 'डेविल्स ट्रम्पेट' निकनेम दिया जाता है, क्योंकि इनमें स्कोपोलामाइन, एट्रोपिन और हायोसायमाइन जैसे कंपाउंड 'ट्रोपेन एल्कलॉइड्स' होते हैं.

मेडिकल जर्नल्स के अनुसार, ये कंपाउंड सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर काम करते हैं. स्कोपोलामाइन के खास तौर पर सही मेडिकल इस्तेमाल हैं. इसे मोशन सिकनेस और ऑपरेशन के बाद होने वाली मतली के इलाज के लिए प्रिस्क्राइब किया गया है. हालांकि, ज्यादा डोज में यह कन्फ्यूजन, हैलुसिनेशन, बेचैनी, धुंधली नजर और गंभीर याददाश्त की कमी पैदा कर सकता है. बहुत गंभीर मामलों में, इसे खाने से कोमा हो सकता है या जान भी जा सकती है.

ब्रुगमेन्सिया मूल रूप से साउथ अमेरिका का पौधा है, और इसकी किस्में भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में उगती हैं. ये पौधे सजावटी होते हैं और बहुत सुंदर हो सकते हैं, लेकिन इनका हर हिस्सा जहरीला होता है. मेडिकल लिटरेचर में बताया गया है कि गलती से इसे खाने से, खासकर बच्चों द्वारा, गंभीर जहर हो सकता है.

हिंदू परंपरा में इस फूल का महादेव से कनेक्शन?

भारत में, तुरही के आकार के धतूरे के फूल की एक बहुत अलग पहचान है. हिंदू पौराणिक कथाओं और रीति-रिवाजों में इसका भगवान शिव से गहरा संबंध है. कहानियों के अनुसार, धतूरा ब्रह्मांडीय समुद्र मंथन के दौरान निकला था, जब अमरता के अमृत से पहले जहर सतह पर आया था. एक बहुत मशहूर कहानी में, शिव ने ब्रह्मांड को बचाने के लिए जानलेवा जहर पी लिया था, और उसे अपने गले में रख लिया था, जिससे उसका गला नीला हो गया था. क्योंकि धतूरा एक मजबूत, जंगली पौधा है जो मुश्किल हालात में भी पनपता है, इसलिए यह सहनशक्ति और तपस्या का प्रतीक बन गया, जो शिव से बहुत जुड़े हुए गुण हैं.

भारत भर के कई मंदिरों में, पूजा के तौर पर शिव को धतूरे के फूल और फल चढ़ाए जाते हैं, खासकर महा शिवरात्रि के दौरान. इस पौधे के जहरीले स्वभाव को माना जाता है, लेकिन पूजा-पाठ के मामले में यह सरेंडर, भक्ति और ज़हर के सुरक्षा में बदलने की उलझन को दिखाता है.

धतूरे (धत्तूर) का उल्लेख मुख्य रूप से शिव संबंधित पुराणों और आगम ग्रंथों में मिलता है अलग-अलग स्थानों पर इसका संदर्भ अलग-अलग तरह से हुआ है.

1. शिव पुराण

शिव उपासना से जुड़े प्रसंगों में धतूरा, बेलपत्र, आक आदि को शिवप्रिय बताया गया है. कई अध्यायों में यह उल्लेख है कि जो भक्त धतूरा और बेलपत्र से शिवलिंग का पूजन करता है, उसे विशेष पुण्य प्राप्त होता है.

2. लिंग पुराण

यहां शिवलिंग की पूजा-विधि का विस्तार से वर्णन है. पूजा में जिन पुष्प-पत्रों को अर्पित करने का विधान बताया गया है, उनमें धत्तूर (धतूरा) का भी उल्लेख मिलता है.

3. स्कंद पुराण

स्कंद पुराण के कुछ खंडों में शिवपूजन के नियमों और व्रतों का वर्णन है, जहां धतूरा और बेलपत्र को शिव को प्रिय अर्पण के रूप में बताया गया है.

मिथिलांचल में धतूरे की विशेष परंपरा क्यों?

मिथिलांचल (उत्तरी बिहार–नेपाल का तराई क्षेत्र) में सावन और महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर धतूरा चढ़ाने की परंपरा विशेष रूप से प्रचलित है. यहां ग्रामीण इलाकों में लोग खुद खेत-खलिहान से धतूरा तोड़कर लाते हैं. कई स्थानों पर यह माना जाता है कि धतूरा चढ़ाने से नकारात्मक ऊर्जा और बाधाएं दूर होती हैं. सावन के सोमवार पर धतूरा, बेलपत्र और आक का फूल साथ में अर्पित करना शुभ माना जाता है.

जहरीला होते हुए भी पूजा में क्यों चढ़ाया जाता है धतूरा?

मिथिला क्षेत्र में तांत्रिक साधना की भी परंपरा रही है. धतूरा को शक्ति और तंत्र से भी जोड़ा जाता है. शिव को 'तंत्र के अधिपति' के रूप में देखा जाता है, इसलिए धतूरा अर्पण को साधना का प्रतीक भी माना जाता है.

धतूरे का प्रतीकात्मक अर्थ क्या?

धतूरा का कांटेदार फल और सफेद/बैंगनी फूल वैराग्य और तप का प्रतीक माने जाते हैं. यह सिखाता है कि जीवन की ‘विषैली’ परिस्थितियों को भी शिव की तरह आत्मसात कर शुद्ध किया जा सकता है. मिथिलांचल में धतूरा सिर्फ एक फूल नहीं, बल्कि शिवभक्ति, लोकआस्था और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। महादेव की पूजा में इसे चढ़ाना यहां की परंपरा, पौराणिक कथा और आध्यात्मिक विश्वास का संगम है.

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