कौन है Jihadi Bride शमीमा बेगम जिसकी ब्रिटेन में है एंट्री बैन, इराक भेजने की हो रही तैयारी; क्या है पूरी कहानी?
शमीमा बेगम बिट्रेन की पहली महिला थी जो आईएसआईएस का हिस्सा बनी. इस समय वह आईएसआईएस कैंप में हैं. अब ISIS की जिहादी दुल्हन शमीमा बेगम को इराक भेजे जाने की तैयारी हो रही है. ब्रिटेन सरकार उनकी एंट्री पर क्यों अड़ी है, किस कोर्ट में केस चल रहा है शमीमा का मामला और पूरी टाइमलाइन क्या है?;
जिहादी दुल्हन शमीमा बेगम.
(Image Source: Benonwine @benonwine )एक वक्त स्कूल यूनिफॉर्म पहनने वाली ब्रिटिश लड़की शमीमा बेगम, आज दुनिया की सबसे विवादित जिहादी दुल्हन बन चुकी है. शमीमा बेग, जिसने 15 साल की उम्र में ISIS का रास्ता चुना, अब एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है. सीरिया में जेल ब्रेक की वजह से ISIS कैंप के हालात खराब हैं. इस बीच खबर है कि शमीमा बेगम को इराक भेजा जा सकता है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि ब्रिटेन उसे वापस क्यों नहीं लेना चाहता? क्या यह सिर्फ सुरक्षा का मुद्दा है या उससे कहीं ज्यादा राजनीतिक संदेश?
कौन है जिहादी दुल्हन शमीमा बेगम?
जिहादी दुल्हन शमीमा बेगम का जन्म 1999 में लंदन में हुआ था. शमीमा का परिवार बांग्लादेशी मूल का है. शमीमा ISIS में शामिल होने वाली पहली ब्रिटिश लड़की थी. उसकी उम्र ISIS में ज्वाइनिंग के समय 15 साल की थी. साल 2015 में शमीमा बेगम दो सहेलियों के साथ चुपचाप तुर्की होते हुए सीरिया पहुंची और ISIS में शामिल हो गई.
2019 में वह उत्तर-पूर्वी सीरिया में एक शरणार्थी/हिरासत कैंप में मिलीं. इस बीच UK सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर उनकी ब्रिटिश नागरिकता रद्द कर दी. नागरिकता वापस पाने और UK लौटने की उनकी अपीलें खारिज हो चुकी हैं. UK की अदालतों ने नागरिकता रद्द करने के फैसले को सही ठहराया है. इसके अलावा, शमीमा ने यह भी माना था कि उन्हें आतंकवादी संगठन में शामिल होने पर 'शर्म' आती है और उन्हें इसका पछतावा है, यह जानते हुए भी कि इसे एक 'आतंकवादी' समूह घोषित किया गया था.
ISIS से जुड़ने के बाद क्या हुआ?
ISIS से उसने जिहादी ड्यूश आईएसआईएस लड़ाके से शादी कर ली. उससे शमीमा के तीन बच्चे हुए. तीनों में से एक भी जिंदा नहीं बचा. श्मीमा लंबे समय तक ISIS नियंत्रित इलाके में रही. साल 2019 से वह ISIS के पतन के बाद कुर्दिश कैंप (Al-Hol) में हिरासत में हैं.
कैंप से इराक भेजने की तैयारी क्यों?
ISIS से जुड़े हजारों कैदी जिन कैंपों में हैं, वे अब सुरक्षित नहीं माने जा रहे. जेल ब्रेक, विद्रोह और क्षेत्रीय संघर्ष का खतरा बढ़ा है. इराक में सख्त आतंक कानून इराक के पास हाई सिक्योरिटी जेल आतंकवाद के मामलों में तेज ट्रायल कड़े कानून इसलिए अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियां कैदियों को इराक शिफ्ट करने पर विचार कर रही हैं.
पश्चिमी देशों की जिम्मेदारी से दूरी
ब्रिटेन, फ्रांस जैसे देश अपने ISIS नागरिकों को वापस लेने से बच रहे हैं. इसलिए, मिडिल ईस्ट में ही ‘मैनेज’ करने की नीति अपनाई जा रही है.
ब्रिटेन शमीमा बेगम को क्यों नहीं देना चाहता एंट्री?
ब्रिटिश सरकार ने 2019 में शमीमा की नागरिकता छीन ली थी. इसके पीछे तर्क यह दिया गया था कि वह अब राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं. ब्रिटेन को डर है कि अगर शमीमा लौटी तो दूसरे ISIS समर्थक भी वापसी मांगेंगे. ब्रिटेन साफ संदेश देना चाहता है कि अगर आप आतंकवाद को चुनते हैं, तो ब्रिटेन आपका घर नहीं रहेगा. ब्रिटेन में पब्लिक ओपिनियन इसको लेकर जिहादी दुल्हन के खिलाफ है. दक्षिणपंथी सरकार पर नरमी न दिखाने का दबाव है.
अब मामला किस कोर्ट में चल रहा है?
यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय (ECHR) शमीमा की याचिका पर सुनवाई लंबित है. अपनी याचिका में शमीमा ने कहा है कि जिस समय आईएसआईएस में शामिल हुई, उस समय वह नाबालिग थी. उनका ब्रेनवॉश किया था. वह तस्करी का शिकार हुई थी. ब्रिटिश सरकार का कहना है कि उनके लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सबसे पहले है. यह मामला मामला फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रिया में फंसा है. अंतिम फैसला आने का इंतजार है.
शमीमा बेगम टाइमलाइन
साल 1999 में लंदन में जन्म, 2015 में ISIS में शामिल हुईं और सीरिया पहुंचीं. 2019 ISIS हार के बाद से वह कुर्दिश कैंप में हिरासत में हैं. साल 2019 ब्रिटिश सरकार ने उनसे नागरिकता छीन ली. 2020–2024 में वह ब्रिटिश कोर्ट में मुकदमा हार चुकी हैं. अब सीरिया में अराजकता का माहौल् होने और जेल ब्रेक की घटनाओं की वजह से उन्हें इराक ट्रांसफर करने की योजना है. अब जिहादी बेगम का केस यूरोपीय मानवाधिकार आयोग के सामने विचाराधीन है.
शमीमा बेगम सिर्फ एक महिला नहीं, वह आतंकवाद, नागरिकता, मानवाधिकार और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच फंसी मजबूर महिला है. ब्रिटेन उसे अपनाने को तैयार नहीं, सीरिया उसे संभाल नहीं पा रहा. इराक उसे जेल में रखना चाहता है. यही वजह है कि शमीमा बेगम का केस दुनिया की सबसे जटिल आतंकी कानूनी लड़ाइयों में से एक बन चुका है.