कौन है निखिल गुप्ता, जिसने पन्नू की हत्या की साजिश रचने का कबूल किया जुर्म? सजा को लेकर इतना सस्पेंस क्यों

अमेरिका में खालिस्तानी अलगाववादी नेता की हत्या की कथित साजिश के मामले में भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने अदालत में दोष स्वीकार किया है. कहा जा रहा है कि निखिल गुप्ता को इस मामले में 40 साल की सजा हो सकती है, हालांकि फैसला 29 मई 2026 को सुनाया जाएगा.;

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Edited By :  सागर द्विवेदी
Updated On : 14 Feb 2026 8:04 AM IST

अमेरिका में खालिस्तानी अलगाववादी नेता की कथित हत्या की साजिश के मामले ने वैश्विक स्तर पर सनसनी फैला दी है. 55 वर्षीय भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने न्यूयॉर्क की संघीय अदालत में एक अमेरिकी नागरिक की हत्या की साजिश रचने के आरोप में जुर्म कबूल कर लिया है. यह मामला भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से भी बेहद संवेदनशील माना जा रहा है.

TOI की रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोष स्वीकार करने के बाद गुप्ता मुकदमे की लंबी प्रक्रिया से बच गए हैं. पहले उन्हें अधिकतम 40 साल तक की सजा का सामना करना पड़ सकता था, लेकिन अब अमेरिकी सरकार ने अदालत से 21 से 24 साल की जेल की सिफारिश की है. अंतिम फैसला अदालत द्वारा सुनाया जाएगा. मैनहट्टन की अदालत में गुप्ता ने ‘मर्डर फॉर हायर’, ‘साजिश’ और ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ जैसे तीन गंभीर आरोपों में खुद को दोषी माना है. उनकी सजा पर सुनवाई 29 मई 2026 को निर्धारित है.

कौन है निखिल गुप्ता

निखिल गुप्ता एक भारतीय नागरिक है, जो साल 2023 में उस समय सुर्खियों में आया जब अमेरिका में खालिस्तानी अलगाववादी नेता की कथित हत्या की साजिश के मामले में उसका नाम सामने आया. निखिल को ‘निक’ के नाम से भी जाना जाता है और उसकी उम्र करीब 55 वर्ष बताई जाती है. अमेरिकी जांच एजेंसियों के अनुसार, उस पर आरोप है कि उसने भारत-घोषित आतंकवादी Gurpatwant Singh Pannun की हत्या के लिए एक हिटमैन को नियुक्त करने की कोशिश की. हालांकि, जिस व्यक्ति से संपर्क किया गया, वह अंडरकवर एजेंट निकला और साजिश का भंडाफोड़ हो गया.

निखिल गुप्ता पर क्या हैं आरोप और साजिश कैसे रची गई?

अमेरिकी अभियोजकों के अनुसार, 2023 में निखिल गुप्ता ने कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर पन्नू की हत्या की साजिश रची. कोर्ट दस्तावेजों में एक व्यक्ति का नाम विकाश यादव बताया गया है, जिसे अमेरिकी अधिकारियों ने भारत सरकार के एक कर्मचारी और कैबिनेट सचिवालय से जुड़ा बताया है. आरोप है कि यादव ने ही गुप्ता को इस कथित हत्या की योजना तैयार करने के लिए कहा.

न्याय विभाग के मुताबिक, गुप्ता ने एक सुपारी किलर से संपर्क किया, लेकिन जिसे वह हिटमैन समझ रहे थे, वह दरअसल अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ काम कर रहा अंडरकवर एजेंट था. कथित तौर पर हत्या के लिए 100,000 डॉलर की डील तय की गई थी, जिसमें 15,000 डॉलर अग्रिम देने की व्यवस्था भी की गई.

अधिकारियों का कहना है कि गुप्ता को पन्नू की निजी जानकारी घर का पता, फोन नंबर और दिनचर्या- भी मुहैया कराई गई थी. हालांकि, अमेरिकी ड्रग एन्फोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (DEA) और फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) ने समय रहते इस साजिश को विफल कर दिया.

क्या प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा से जुड़ा था यह मामला?

अदालत में पेश दस्तावेजों के अनुसार, गुप्ता ने एक अंडरकवर अधिकारी से कथित तौर पर कहा था कि हत्या को जून 2023 में भारतीय प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा के दौरान अंजाम न दिया जाए. उसी महीने कनाडा में सिख अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद, दस्तावेजों में यह भी उल्लेख है कि गुप्ता ने संकेत दिया कि “अब इंतजार करने की जरूरत नहीं है.' जून 2023 में निखिल गुप्ता को चेक गणराज्य में गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद 2024 में उन्हें प्रत्यर्पित कर अमेरिका लाया गया, जहां अब उन्होंने दोष स्वीकार कर लिया है.

अमेरिकी अटॉर्नी का क्या बयान आया

अमेरिकी अटॉर्नी जे क्लेटन ने कहा कि निखिल गुप्ता ने यह सोचकर गलती की कि वह अमेरिका से बाहर रहकर अमेरिकी धरती पर किसी की हत्या करवा सकते हैं और उन्हें कोई परिणाम नहीं भुगतना पड़ेगा. उन्होंने कहा, 'उसे लगा कि वह इस देश के बाहर बैठकर यहां किसी की हत्या करवा सकता है और उसे कोई परिणाम नहीं भुगतना पड़ेगा, सिर्फ इसलिए कि वह व्यक्ति अपने अमेरिकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का प्रयोग कर रहा था. लेकिन वह गलत था, और उसे न्याय का सामना करना पड़ेगा. सभी दुष्ट विदेशी तत्वों के लिए हमारा संदेश साफ है: संयुक्त राज्य अमेरिका और हमारे लोगों से दूर रहें.'

भारत-अमेरिका संबंधों पर क्या पड़ सकता है असर

यह मामला कूटनीतिक रूप से भी बेहद अहम माना जा रहा है. नवंबर 2023 में भारत ने अमेरिकी आरोपों की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय आंतरिक समिति गठित की थी. उस समय भारत सरकार ने कहा था कि वह आरोपों को गंभीरता से ले रही है, लेकिन राज्य प्रायोजित साजिश के दावों को खारिज किया था. अब गुप्ता के जुर्म स्वीकार करने के बाद दोनों देशों के संबंधों और इस मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं. भारत सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है.

कौन हैं गुरपतवंत सिंह पन्नू और क्यों बने निशाने पर

इस मामले में जिस व्यक्ति को निशाना बनाया गया, वह खालिस्तानी अलगाववादी नेता Gurpatwant Singh Pannun हैं, जो अमेरिकी नागरिक भी हैं. अमेरिकी न्याय विभाग के दस्तावेजों में उन्हें 'विक्टिम' कहा गया है. पन्नू लंबे समय से भारत सरकार के मुखर आलोचक रहे हैं और पंजाब के कुछ हिस्सों को भारत से अलग कर ‘खालिस्तान’ नामक संप्रभु सिख राष्ट्र बनाने की मांग करते रहे हैं. भारत सरकार ने उन्हें गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत आतंकवादी घोषित किया है. उनके संगठन पर भारत में प्रतिबंध लगाया गया है. नई दिल्ली का आरोप है कि वे अलगाववाद और हिंसा को बढ़ावा देते रहे हैं.

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