बांग्लादेश चुनाव में जीत दर्ज करने वाले 3 हिंदू उम्मीदवार कौन, किस पार्टी ने दिया था टिकट? 2 दशक में सबसे खराब नतीजा
बांग्लादेश के हालिया आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने 299 में से 211 सीटें जीतकर सरकार बनाने की तैयारी शुरू कर दी है. सहयोगी दल जमात ए इस्लामी को 68 सीटें मिलीं. ऐतिहासिक नतीजों के बीच एक बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि देश की लगभग 8% हिंदू आबादी के बावजूद संसद में सिर्फ 3 हिंदू सांसद क्यों?;
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) हाल ही में संपन्न आम चुनाव में बड़ी जीत के बाद सरकार बनाने की तैयारी में जुटी है. चुनावी नतीजों के मुताबिक BNP ने पार्लियामेंट की 299 में से 211 सीटें जीतकर दो तिहाई से ज्यादा बहुमत हासिल की है. जमात-ए-इस्लामी ने 68 सीटों पर जीत हासिल करने में कामयाब हुई. खास बात यह है कि BNP के तीन हिंदू उम्मीदवार पार्लियामेंट के लिए चुने गए, जो अल्पसंख्यक समुदायों में पार्टी की पकड़ का प्रतीक है. साथ ही इस बात का प्रमाण कि बीएनपी सभी को साथ लेकर चलने वाली पार्टी है. ऐसा, इसलिए कि देश में माइनॉरिटी की हिस्सेदारी और सांप्रदायिक तनाव हमेशा से बांग्लादेश में चिंता का विषय रही है. जानें कौन हैं बीएनपी से जीते हिंदू प्रत्याशी.
1. गायेश्वर चंद्र रॉय : विविधता में एकता के प्रबल समर्थक कैसे?
गायेश्वर चंद्र रॉय बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वरिष्ठ नेता हैं और अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के प्रमुख चेहरों में से एक माने जाते हैं. वे ढाका-3 निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़कर 99,163 वोटों के साथ जीत हासिल की और अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी, Md Shahinur Islam को पराजित किया. रॉय पहले भी BNP के स्थायी समिति सदस्य और पूर्व राज्य मंत्री रह चुके हैं, इसलिए उनकी जीत का राजनीतिक और सांकेतिक महत्व दोनों ही है. खासकर जब बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ सुरक्षा और भागीदारी पर सार्वजनिक बहस चल रही है. उनकी यह सफलता न सिर्फ BNP की मजबूत वापसी को दर्शाती है, बल्कि अल्पसंख्यक समुदाय की पीड़ा और उसकी राजनीतिक आवाज को संसद में मजबूती से पेश करने का संकेत भी देती है. उनकी राजनीतिक पहचान लंबे समय से बांग्लादेश में सामाजिक विविधता और राष्ट्रीय एकता के पक्ष में रही है और इस जीत से वह राष्ट्रीय राजनीति में एक प्रभावशाली आवाज के रूप में उभरकर सामने आए हैं.
2. निताई रॉय चौधरी : अल्पसंख्यक समुदाय की भागीदारी को कैसे किया मजबूत?
निताई रॉय चौधरी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के उपाध्यक्ष के रूप में राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका निभा रहे हैं और उन्होंने मगुरा-2 निर्वाचन क्षेत्र से शानदार जीत हासिल की. उन्होंने कुल 147,896 वोटों के साथ जमात के उम्मीदवार Mustarshid Billah को पीछे छोड़ा और एक निर्णायक जनादेश जीता. चौधरी की यह जीत BNP की चुनावी रणनीति को और अधिक विविधतापूर्ण बनाती है, क्योंकि उन्होंने न केवल अपने क्षेत्र के मतदाताओं का विश्वास जीता, बल्कि अल्पसंख्यक समुदाय की व्यापक हिस्सेदारी को भी मजबूत किया. BNP के भीतर उनका राजनीतिक असर बड़ा माना जाता है और पार्टी में उनकी उपाध्यक्ष की भूमिका उन्हें नीतिगत फैसलों और प्रतिनिधित्व के मुद्दों पर एक केंद्रीय स्थान देती है. जीत के साथ ही चौधरी यह संदेश देते हैं कि अल्पसंख्यक नेतृत्व भी राजनीति का हिस्सा हो सकता है, जो बांग्लादेश के सियासी परिदृश्य में बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
3. एडवोकेट दीपेन दीवान : हिंदू समुदाय का मजबूत चेहरा कैसे?
एडवोकेट दीपेन दीवान बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की ओर से रंगामाटी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीते हैं, जहां उन्होंने 31,222 वोट पाकर अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी Independent उम्मीदवार Pahel Chakma को पराजित किया. दीवान एक कानूनी पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते हैं और अपने निर्वाचन क्षेत्र में सामाजिक न्याय, सामुदायिक अधिकार और अल्पसंख्यकों के संवैधानिक संरक्षण जैसे मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं. उनकी जीत BNP के भीतर अल्पसंख्यक समुदाय के लिए एक मजबूत प्रतिनिधित्व स्थापित करती है और यह दर्शाती है कि सामाजिक मुद्दों और स्थानीय नेतृत्व की भूमिका भी राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण रूप से मान्यता पा रही है. दीवान बांग्लादेश के विविध सांस्कृतिक ढांचे में शामिल आदिवासी तथा अल्पसंख्यक समुदाय की आवाज को संसद तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
बीएनपी की टिकट पर चुनाव जीतने वाले तीनों उम्मीदवार बीएनपी की विशाल जीत का हिस्सा हैं और उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों से जीत कर यह साबित किया है कि बांग्लादेश की जनता अब विविध समुदायों को भी प्रमुख राजनीतिक भूमिका देने को तैयार है. इन जीतों को बांग्लादेश की राजनीति में अल्पसंख्यकों की भागीदारी को बढ़ावा देने वाला एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है.
जमात का इकलौता हिंदू कैंडिडेट क्यों हारा चुनाव?
जमात ए इस्लामी पार्टी ने भी एक हिंदु कृष्णा नंदी को पार्टी का टिकट देकर चुनाव लड़ने के लिए नामित किया था, लेकिन कृष्णा नंदी खुलना-1 सीट पर चुनाव हार गए. इस सीट पर BNP कैंडिडेट अमीर एजाज खान ने जीत दर्ज की. उन्हें 121,352 वोट मिले.
2 दशक में अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व सबसे कम क्यों?
बांग्लादेश की लगभग 8 प्रशित आबादी हिंदू है. बावजूद इसके 2026 के आम चुनाव में सिर्फ 3 हिंदू सांसद चुने गए. पहले शेख हसीना के दौर में यह संख्या 14 से 20 तक रहती थी. इस बार सभी विजेता बीएनपी से हैं. जमात का हिंदू उम्मीदवार हार गया. कुल 79 अल्पसंख्यक उम्मीदवार मैदान में थे, फिर भी प्रतिनिधित्व बहुत कम रहा. इसके पीछे मुख्य वजह वोट का ध्रुवीकरण माना जा रहा है.
कितने माइनॉरिटी कैंडिडेट लड़े चुनाव?
बांग्लादेश आम चुनाव में धार्मिक और एथनिक माइनॉरिटी कम्युनिटी के कुल 79 प्रत्याशी चुनाव लड़े थे, जिनमें 10 महिलाएं भी शामिल थीं. उन्होंने अलग-अलग पॉलिटिकल पार्टियों के साथ-साथ इंडिपेंडेंट ग्रुप्स को भी रिप्रेजेंट किया. 60 रजिस्टर्ड पॉलिटिकल पार्टियों में से 22 ने माइनॉरिटी कैंडिडेट को टिकट दिया था. BNP ने छह माइनॉरिटी कैंडिडेट खड़े किए, और उनमें से चार जीत गए. इसके बावजूद, पॉलिटिकल जानकारों का कहना है कि पार्लियामेंट में माइनॉरिटी रिप्रेजेंटेशन अभी भी कुल सीटों की तुलना में कम है.