कौन हैं Christina Koch? 328 दिन अंतरिक्ष में रहकर बनाया रिकॉर्ड, अब Artemis II मिशन के साथ रचा इतिहास
क्रिस्टीना कोच एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर और फिजिसिस्ट हैं, जिन्हें साल 2013 में नासा ने चुना था. अंतरिक्ष में जाने से पहले उन्होंने पृथ्वी के सबसे चुनौतीपूर्ण इलाकों जैसे साउथ पोल और दूरस्थ द्वीपों पर काम किया.
Christina Koch
(Image Source: X/ @askghmedia )NASA का आर्टेमिस-2 मिशन मानव इतिहास में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होने जा रहा है. 6 अप्रैल को आर्टेमिस-2 मिशन ने इतिहास बना दिया, जब उसने चंद्रमा की परिक्रमा करते हुए 248,655 मील की दूरी पार की. अब ये अंतरिक्ष यात्रा इंसानों द्वारा पृथ्वी से की गई सबसे दूरी वाली यात्रा बन गई. इस मिशन पर पहली बार कोई महिला भी पहुंची हैं.
जी हां हम बात कर रहे हैं मिशन स्पेशलिस्ट क्रिस्टिना कोच की. जब इस तरह के मुकाम पर कोई महिला पहुंचती है तो दुनियाभर में उसकी गूंज सुनाई देने लगती है. अब हर कोई क्रिस्टिना कोच के बारे में जानना का इच्छुक दिख रहा है कि आखिर वे हैं कौन और क्या वे इससे पहले भी इस तरह के मिशन का हिस्सा रही हैं?
कौन हैं क्रिस्टीना कोच?
क्रिस्टीना कोच एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर और फिजिसिस्ट हैं, जिन्हें साल 2013 में नासा ने चुना था. अंतरिक्ष में जाने से पहले उन्होंने पृथ्वी के सबसे चुनौतीपूर्ण इलाकों जैसे साउथ पोल और दूरस्थ द्वीपों पर काम किया. इन अनुभवों ने उन्हें कठिन परिस्थितियों में काम करने के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाया.
पहले भी रच चुकी हैं इतिहास
क्रिस्टीना कोच इससे पहले भी कई ऐतिहासिक उपलब्धियां अपने नाम कर चुकी हैं. साल 2019 में उन्होंने International Space Station पर लगातार 328 दिन बिताए, जो किसी भी महिला द्वारा अंतरिक्ष में बिताया गया सबसे लंबा समय है.
इसी दौरान उन्होंने Jessica Meir के साथ मिलकर पहली ऑल-फीमेल स्पेसवॉक को अंजाम दिया. यह उपलब्धियां केवल रिकॉर्ड नहीं थीं, बल्कि इन्होंने यह समझने में भी मदद की कि लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने पर महिला शरीर कैसे प्रतिक्रिया करता है.
क्या है आर्टेमिस-2 में अहम भूमिका?
आर्टेमिस-2 मिशन में क्रिस्टीना कोच मिशन स्पेशलिस्ट की भूमिका निभा रही हैं. इस दौरान वह ओरियन स्पेसक्राफ्ट के महत्वपूर्ण सिस्टम्स की निगरानी कर रही हैं. यह मिशन भविष्य के उन अभियानों की नींव रखेगा, जिनका लक्ष्य इंसानों को चांद पर उतारना और आगे मंगल ग्रह तक पहुंचाना है.