US vs NATO! Iran War के बीच Rubio की चेतावनी, क्या जंग के बाद टूट जाएगा 77 साल पुराना गठबंधन?
ईरान इजरायल युद्ध के बीच अमेरिका और NATO में तनाव बढ़ा. Marco Rubio ने सैन्य Base Access को लेकर गठबंधन पर उठाए सवाल। जानें क्यों बिगड़ रहे हैं रिश्ते.
मार्को रूबियो के बयान से नाटो के सदस्य देशों के बीच तनाव
ईरान युद्ध के बीच अमेरिका और NATO के रिश्तों में दरार खुलकर सामने आने लगी है. अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने साफ चेतावनी दी है कि अगर सहयोगी देश ज़रूरत के समय अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों और हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं करने देते, तो इस गठबंधन का मतलब ही क्या रह जाता है. डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन पहले ही NATO के रवैये से नाराज है, और अब रूबियो के बयान ने इस तनाव को और गहरा कर दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान युद्ध में यूरोपीय देशों के सीमित सहयोग और “यह हमारी लड़ाई नहीं” वाले रुख ने वॉशिंगटन को नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है. ऐसे में सवाल उठ रहा है. क्या अमेरिका अब NATO को नए नजरिए से देखने जा रहा है? एक अहम सवाल यह भी है, क्या जंग के बाद 77 साल पुराना गठबंधन टूट जाएगा.
क्या NATO अब अमेरिका के लिए बोझ है?
विदेश मंत्री रूबियो ने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया कि अब समय आ गया है जब अमेरिका को यह देखना होगा कि NATO से उसे वास्तव में क्या फायदा मिल रहा है. उन्होंने माना कि वे पहले इस गठबंधन के बड़े समर्थक रहे हैं, लेकिन मौजूदा हालात ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. खासतौर पर तब, जब ईरान के खिलाफ चल रहे अभियान में कई सहयोगी देश खुलकर समर्थन देने से हिचकिचा रहे हैं.
सैन्य ठिकानों तक पहुंच पर क्यों उठे सवाल?
रूबियो की सबसे बड़ी चिंता सहयोगी देशों के सैन्य ठिकानों तक पहुंच को लेकर है. उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका अपने हितों की रक्षा के लिए इन ठिकानों का इस्तेमाल नहीं कर सकता, तो फिर गठबंधन का मतलब क्या रह जाता है. उनके मुताबिक, अमेरिका ने सहयोगियों से सीधे युद्ध में शामिल होने की मांग नहीं की, लेकिन कम से कम लॉजिस्टिक और बुनियादी ढांचे का समर्थन तो अपेक्षित था.
यूरोपीय देशों के फैसलों ने क्यों बढ़ाई टेंशन?
तनाव उस समय और बढ़ गया जब यूरोप के कई देशों ने अमेरिकी सैन्य गतिविधियों पर सीमाएं लगा दीं. Spain ने अमेरिकी विमानों को अपने हवाई क्षेत्र में प्रवेश से रोक दिया, जबकि Italy ने अपने ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी. ब्रिटेन ने भी शुरुआत में इंकार किया, हालांकि बाद में उसने अपना रुख बदल लिया. इन घटनाओं ने NATO की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट कितना अहम है?
यह पूरा विवाद Strait of Hormuz के संकट के बीच सामने आया है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत मार्ग है. Iran द्वारा इस जलमार्ग को प्रभावी रूप से बाधित किए जाने के बाद अमेरिका पर दबाव बढ़ गया है कि वह क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत करे. ऐसे में सहयोगी देशों के ठिकानों तक पहुंच और भी महत्वपूर्ण हो जाती है.
क्या ट्रंप लेंगे अंतिम फैसला?
रूबियो ने संकेत दिया कि अंतिम फैसला Donald Trump ही लेंगे, लेकिन यह स्पष्ट है कि मौजूदा हालात अमेरिका की NATO नीति को प्रभावित कर सकते हैं. ट्रंप पहले भी NATO देशों पर कम योगदान और कम समर्थन को लेकर सवाल उठाते रहे हैं. ऐसे में यह विवाद भविष्य में अमेरिका और उसके सहयोगियों के रिश्तों को नई दिशा दे सकता है. यहां पर इस बात का जिक्र कर दें कि डोनाल्ड ट्रम्प ने नाटो सहयोगियों को रक्षा बजट बढ़ाने के लिए दबाव डाला था. अब रुबियो ने कहा कि अंतिम फैसला राष्ट्रपति का ही होगा.