अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को होने वाले मिडटर्म इलेक्शन के बाद ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ ले सकता है. दावा किया जा रहा है कि चुनाव खत्म होने के बाद अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान को अंजाम देने की तैयारी में हैं. इस संभावित कार्रवाई में ईरान के परमाणु ठिकानों, मिसाइल केंद्रों और ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है.

इस बीच, पूर्व भारतीय सैन्य अधिकारी और एनएसजी कमांडो रह चुके लकी बिष्ट ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए ईरान के खिलाफ संभावित युद्ध को लेकर बड़ा दावा किया है. उनका कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चुनाव खत्म होने तक ही हमले से दूरी बनाए हुए हैं. लकी बिष्ट के मुताबिक, चुनाव के बाद पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और भी भयावह रूप ले सकता है.

अब तक क्यों नहीं किया गया हमला?

रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राजनीतिक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने की आशंका को देखते हुए चुनाव से पहले ईरान पर बड़े हमले से परहेज किया है. माना जा रहा है कि चुनाव के बाद अमेरिकी प्रशासन अपनी सैन्य रणनीति को आगे बढ़ा सकता है. दावों के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल ने एक साझा हमले की योजना भी तैयार की है. ट्रंप की मंजूरी मिलने के 96 घंटों के भीतर इस अभियान को शुरू किए जाने की संभावना जताई जा रही है.

क्या बोले लकी बिष्ट?

ईरान पर संभावित हमले की चर्चाओं के बीच पूर्व एनएसजी कमांडो लकी बिष्ट ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर की. उन्होंने लिखा "अमेरिका में कल (3 नवंबर) मिड-टर्म चुनाव हैं. पिछले 9 महीने से मैं लगातार एक ही बात कह रहा हूं इन चुनावों के ठीक बाद वैश्विक संघर्ष और ज़्यादा भयानक रूप लेगा. डोनाल्ड ट्रंप सिर्फ इन चुनावों के खत्म होने तक रुके हुए थे, क्योंकि उन्हें अमेरिका की जनता और दुनिया को यह दिखाना था कि वे शांति के पक्ष में हैं और युद्ध नहीं चाहते लेकिन चुनाव निपटते ही यह दिखावा खत्म हो जाएगा."

नेतन्याहू को लेकर क्या बोलो लकी बिष्ट?

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर उन्होंने कहा, "मैंने कुछ दिन पहले ही साफ़ कहा था कि इज़रायल में हालात चाहे जैसे भी दिख रहे हों, और भले ही बेंजामिन नेतन्याहू को सिर्फ 53 सीटें ही क्यों न नज़र आ रही हों, लेकिन प्रधानमंत्री वही बनेंगे क्योंकि राजनीति में सब कुछ जायज़ है और नेतन्याहू इस खेल को भली-भांति समझते हैं। इसकी असली वजह यह है कि अमेरिका, इज़रायल और पश्चिम के कुछ देशों ने इस बड़े युद्ध की प्लानिंग आज नहीं, बल्कि कई साल पहले ही कर ली थी."

कितना तैयार है ईरान?

लकी बिष्ट के मुताबिक, ईरान को भी इस संभावित युद्ध के खतरे का अंदाजा है और वह इसके लिए अपनी सैन्य तैयारी कर रहा है. उन्होंने लिखा, "यह आने वाला भीषण युद्ध कितना खतरनाक होगा, इस बात की पूरी जानकारी ईरान को भी पहले से है। ईरान भी इस जंग के लिए अपनी पूरी तैयारी के साथ बैठा हुआ है. ईरान तो यह चाहता है कि अमेरिका और इज़रायल सिर्फ हवाई हमलों या एयर स्ट्राइक तक सीमित न रहें, बल्कि ज़मीन पर भी अपने सैनिकों को उतारे. ईरान इसके लिए पूरी तरह तैयार बैठा है और उसे अच्छी तरह पता है कि अमेरिका और इज़रायल के सैनिकों को उसकी ज़मीन पर किस तरह से नेस्तनाबूद करना है। अब चुनाव की औपचारिकता पूरी होते ही यह युद्ध अपने सबसे खतरनाक और भीषण चरण में प्रवेश करेगा."

क्या चुनाव के बाद मिडिल ईस्ट में छिड़ेगी जंग?

अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन के बाद ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर किए जा रहे दावों ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं. अगर अमेरिका और इजरायल की ओर से बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई होती है, तो इसका असर केवल ईरान तक सीमित नहीं रह सकता. इससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ने और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर पड़ने की आशंका भी पैदा हो सकती है.