बीवी को पीटना जायज़, चुनाव लड़ने पर पाबंदी- तालिबान के वह 5 कानून जो अफगानी महिलाओं के कतर देते हैं पंख
अफगानिस्तान की तालिबान सरकार को महिला मुखालिफ सरकार कहा जाता है. इसके पीछे वजह साफ है, क्योंकि तालिबान ने पिछले कुछ सालों में ऐसे नियम लाए जो महिलाओं को पंख कुतरने का काम करते हैं.;
Taliban 5 Laws Against Women: अफगानिस्तान में तालिबान के जरिए लागू किए गए नए कानून की इंटरनेशनल लेवल पर आलोचना हो रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस नए कानून पर तालिबान के सर्वोच्च नेता Hibatullah Akhundzada ने दस्तखत किए हैं. इससे पहले भी तालिबान कई ऐसे नियम ला चुका है, जिसे महिलाओं पर अत्याचार के तौर पर देखा गया है.
कानून में पति को पत्नी और बच्चों को शारीरिक रूप से दंडित करने की इजाजत दी गई है, बशर्ते कि इससे हड्डियां न टूटें या खुले घाव न हों. आलोचकों का कहना है कि यह प्रावधान घरेलू हिंसा को कानूनी संरक्षण देता है. इसके साथ ही इस कानून में सजा के स्तर को व्यक्ति की स्थिति के आधार पर अलग-अलग रखने की बात भी कही गई है. तालिबान के शासन में महिलाओं के खिलाफ पहले से ही कई सख्त नियम लागू हैं, जिनकी लगातार आलोचना होती रही है. आइए जानते हैं ऐसे 5 नियमों के बारे में-
पहनावे पर पाबंदियां?
अफगानिस्तान में अगर कोई भी महिला बाहर निकलती है तो उन्हें पूरा पर्दा (फुल वील) पहनना जरूरी है. यदि कोई महिला ड्रेस कोड का उल्लंघन करती है, तो उसके पुरुष रिश्तेदार को जेल हो सकती है. यहां तक कि टीवी समाचार कार्यक्रमों की महिला प्रस्तोताओं को भी प्रसारण के दौरान पूरा पर्दा पहनना पड़ता है.
आवाजाही पर रोक
तालिबान ने महिलाओं और लड़कियों की आवाजाही की आज़दी पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं. महिलाओं को पब्लिक प्लेसेस पर अकेले जाने की इजाजत नहीं है. उन्हें घर से बाहर निकलने के लिए किसी पुरुष रिश्तेदार (महरम) का साथ जरूरी होता है. आम तौर पर महिलाओं को केवल अत्यावश्यक काम के लिए ही घर से बाहर निकलने की इजाजत है. अगर कोई ऐसा नहीं करता है तो उसके खिलाफ सख्त सज़ा का प्रावधान है.
शिक्षा का अधिकार
तालिबान का एक शुरुआती फैसला था कि लड़कियों को माध्यमिक विद्यालयों में जाने से रोक दिया जाए. दिसंबर 2022 से महिलाओं के हायर एजुकेशन संस्थानों में पढ़ने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया. कुछ कोर्स ऑनलाइन माध्यम से जारी हैं, लेकिन छात्राओं को परीक्षाएं देने की अनुमति नहीं है. शिक्षा से वंचित होने के कारण लड़कियों के शोषण, दुर्व्यवहार या कम उम्र में शादी होने का खतरा और बढ़ गया है.
महिलाओं के लिए रोजगार पर रोक
तालिबान के सत्ता संभालने के बाद महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर काफी सीमित कर दिए गए हैं. कई महिलाओं की नौकरियां चली गईं. कुछ को घर से काम करने की अनुमति दी गई है. जो महिलाएं अब भी काम पर जाती हैं, उन्हें भी यात्रा के दौरान महरम का साथ जरूरी होता है. रोजगार छिनने से कई परिवार और अधिक गरीबी में धकेल दिए गए हैं। जीवित रहने के लिए बड़ी संख्या में अफगान नागरिकों को सड़कों पर भीख मांगनी पड़ रही है.
सियासत में आने की नहीं है इजाजत
अफगानिस्तान में महिलाओं को औपचारिक राजनीतिक जीवन से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है. साल 2020 में अफगान महिलाओं के पास संसद में 25 प्रतिशत से अधिक सीटें थीं और वे राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव भी लड़ सकती थीं. लेकिन आज की स्थिति बिल्कुल अलग है. मौजूदा वक्त में सरकार में महिलाओं को कोई भी पद नहीं दिया गया है.