Iran जंग में अमेरिका के लिए गेमचेंजर बनी ये मिसाइल, समुद्र में भी कर सकती है मार, 21 बच्चों को भी निगल गई
अमेरिका की Precision Strike Missile (PrSM) क्या है, इसकी रेंज, ताकत और ईरान युद्ध में पहले इस्तेमाल का पूरा विश्लेषण पढ़ें. जानें क्यों इसे गेम चेंजर कहा जा रहा है.
अमेरिका की नई पीढ़ी की मिसाइल Precision Strike Missile (PrSM) इन दिनों दुनिया भर में चर्चा के केंद्र में है. ईरान के साथ युद्ध के पहले ही दिन इसके कथित इस्तेमाल ने न सिर्फ सैन्य रणनीति पर सवाल खड़े किए, बल्कि इसके असर और क्षमता को लेकर भी बहस तेज कर दी है. The New York Times के विजुअल एनालिसिस के मुताबिक, यह मिसाइल लंबी दूरी से बेहद सटीक हमला करने में सक्षम है और हवा में फटकर बड़े इलाके को नुकसान पहुंचाती है. ऐसे में PrSM को आधुनिक युद्ध का “गेम चेंजर” माना जा रहा है, जो भविष्य की लड़ाइयों का स्वरूप बदल सकती है.
Precision Strike Missile (PrSM) क्या है ?
अमेरिका की Precision Strike Missile (PrSM) नई पीढ़ी की लंबी दूरी की सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल है, जिसे अमेरिकी सेना ने अपनी पुरानी ATACMS प्रणाली की जगह विकसित किया है. इसका मकसद युद्ध के मैदान में अधिक दूरी से सटीक हमले करने की क्षमता बढ़ाना है. ताकि दुश्मन के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को बिना नजदीक गए ही निशाना बनाया जा सके. आधुनिक युद्ध में फास्ट रिएक्श और सटीकता बेहद जरूरी है. PrSM इस कमी को पूरा करती है और अमेरिका की “लॉन्ग रेंज प्रिसिजन फायर” रणनीति को मजबूत बनाती है.
PrSM की रेंज और मारक क्षमता कितनी?
PrSM की सबसे बड़ी ताकत इसकी लंबी दूरी तक सटीक वार करने की क्षमता है. इसके शुरुआती वर्जन की रेंज 500 किलोमीटर से अधिक है. जबकि भविष्य में इसे 700 से 1000 किलोमीटर तक बढ़ाने की योजना है. यह मिसाइल उन्नत गाइडेंस सिस्टम और GPS तकनीक की मदद से अपने लक्ष्य को बेहद सटीकता से भेद सकती है. इसके अलावा, एक ही लॉन्चर से अधिक मिसाइलें दागी जा सकती हैं, जिससे इसकी फायरपावर और बढ़ जाती है.
मिसाइल किन लॉन्च सिस्टम से दागी जा सकती है?
PrSM को अमेरिका के पहले से मौजूद लॉन्च प्लेटफॉर्म से ही दागा जा सकता है, जिनमें M270 MLRS और M142 HIMARS शामिल हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि नई मिसाइल के लिए अलग से लॉन्चिंग सिस्टम विकसित करने की जरूरत नहीं पड़ती. इससे लागत कम होती है और सेना इसे तेजी से तैनात कर सकती है. यही कारण है कि PrSM को अमेरिका के मौजूदा सैन्य ढांचे में आसानी से शामिल किया जा रहा है.
PrSM किन टारगेट्स को निशाना बनाने में सक्षम?
यह मिसाइल खास तौर पर दुश्मन के हाई-वैल्यू टारगेट्स को नष्ट करने के लिए डिजाइन की गई है. इसमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल लॉन्च साइट्स, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और बड़े सैन्य ठिकाने शामिल हैं. भविष्य में इसे समुद्री लक्ष्यों, खासकर युद्धपोतों को निशाना बनाने के लिए भी अपग्रेड किया जा रहा है. इस तरह PrSM न केवल जमीन पर बल्कि समुद्र में भी अहम भूमिका निभा सकती है.
क्या PrSM समुद्री युद्ध में भी उपयोगी है?
अमेरिकी सेना इस मिसाइल को एंटी-शिप क्षमता के लिहाज से भी विकसित करने में जुटी है. इसका मतलब है कि यह मिसाइल समुद्र में चल रहे दुश्मन के जहाजों को भी निशाना बना सकेगी. यह खास तौर पर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण हो जाता है, जहां समुद्री शक्ति का संतुलन बनाए रखना अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से जरूरी है.
PrSM को गेम चेंजर क्यों माना जा रहा है?
PrSM को गेम चेंजर इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि यह लंबी दूरी, सटीकता और तेज तैनाती का अनोखा संयोजन पेश करती है. यह दुश्मन के इलाके में गहराई तक हमला कर सकती है, कम समय में ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है और मोबाइल लॉन्च सिस्टम के कारण तेजी से स्थान बदल सकती है. इससे युद्ध के मैदान में अमेरिका को रणनीतिक बढ़त मिलती है.
भविष्य के युद्ध में PrSM कितनी अहम होगी?
PrSM आने वाले समय में अमेरिका की सैन्य ताकत का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनने जा रही है. इसकी लंबी दूरी, सटीकता और मल्टी-रोल क्षमता इसे आधुनिक युद्ध का प्रभावी हथियार बनाती है. यह न केवल युद्ध की रणनीति को बदल सकती है, बल्कि वैश्विक सैन्य संतुलन पर भी गहरा असर डाल सकती है.
वॉर के पहले दिन हुआ था 'PrSM' का इस्तेमाल
The New York Times के विज़ुअल एनालिसिस और हथियार विशेषज्ञों के मुताबिक, ईरान युद्ध के पहले ही दिन दक्षिणी शहर Lamerd में हुए हमले में अपनी नई बैलिस्टिक मिसाइल Precision Strike Missile (PrSM) के इस्तेमाल कर सबको चौंका दिया था. इस हमले में एक स्पोर्ट्स हॉल और पास के प्राइमरी स्कूल को निशाना बनाया गया, जिसमें कम से कम 21 लोगों की मौत हुई. टॉमहॉक क्रूज मिसाइल ने सैकड़ों मील दूर स्थित मिनाब शहर के एक स्कूल पर हमला किया था, जिसमें 175 लोगों की जान चली गई थी. जिसको लेकर ट्रंप प्रशासन की दुनिया भर में किरकिरी हुई थी. हालांकि, लामर्ड के मामले में, जिस PrSM हथियार का इस्तेमाल किया गया था, उसकी युद्ध के मैदान में पहले कभी टेस्टिंग नहीं हुई थी. अब यही मिसाइल दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है.
अमेरिकी सेना की ओर से जारी बयान के अनुसार, PrSM के प्रोटोटाइप की टेस्टिंग पिछले साल ही पूरी हुई थी. 1 मार्च को, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने युद्ध के शुरुआती 24 घंटों के दौरान PrSM को लॉन्च किए जाने का एक वीडियो जारी किया. इसके कुछ दिनों बाद, सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने बताया कि PrSM का इस्तेमाल युद्ध के मैदान में पहली बार किया गया था. सेना अपने इस नए हथियार के पहली बार इस्तेमाल का ज़ोर-शोर से प्रचार कर रही है.
चूंकि यह हथियार बिल्कुल नया है, इसलिए यह पता लगाना ज्यादा मुश्किल है कि लामर्ड में PrSM के हमले जान-बूझकर किए गए थे, या फिर वे डिजाइन में किसी कमी या बनाने में हुई किसी गड़बड़ी का नतीजा थे, अथवा गलत लक्ष्य चुनने के कारण हुए थे.