Islamabad Peace Talk: आखिरी पल में टूटा समझौता, अराघची के बयान ने किया सब कुछ साफ; US पर लगाए गंभीर इल्जाम
इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता नाकामयाब होने के बाद ईरान डेलिगेशन का हिस्सा अब्बास अराघची का बयान आया है. उन्होंने कहा कि डील होने ही वाली थी, लेकिन उसे लगातार बदलती शर्तों का सामना करना पड़ा.
Islamabad Peace Talk: ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोमवार, 13 अप्रैल को कहा कि दोनों पक्षों के बीच एक समझौता लगभग 'इंचों की दूरी' पर था, लेकिन उसे अधिकतमवादी रवैये, लगातार बदलती शर्तों और बाधाओं का सामना करना पड़ा.
अराघची की यह टिप्पणी उस बैठक के एक दिन बाद आई है, जो पाकिस्तान में सप्ताहांत के दौरान दोनों पक्षों के बीच हुई थी. इस बैठक का उद्देश्य पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए एक स्थायी समाधान निकालना था, लेकिन इसमें कोई बड़ी सफलता नहीं मिल सकी. इसके बाद यह सवाल उठने लगे कि उच्च स्तरीय बातचीत में वास्तव में क्या हुआ.
क्या बोले अराघची?
अराघची ने कहा कि ईरान ने अमेरिका के साथ 'अच्छे इरादों' के साथ बातचीत की ताकि युद्ध समाप्त किया जा सके. उन्होंने लिखा कि लगभग 47 सालों में पहली बार दोनों देशों के बीच इतने उच्च स्तर की गंभीर बातचीत हुई. उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि जब इस्लामाबाद एमओयू के बहुत करीब पहुंचे, तभी अधिकतमवादी रवैया, बदलती शर्तें और बाधाएं सामने आ गईं. उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया से कोई सीख नहीं मिली.
इससे कुछ घंटे पहले ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी संकेत दिया कि समझौता अभी भी संभव है, लेकिन इसके लिए अमेरिका को अपना 'एकतरफा रवैया' छोड़ना होगा और ईरान के अधिकारों का सम्मान करना होगा.
अमेरिका को क्या दी नसीहत?
उन्होंने कहा, "यदि अमेरिकी सरकार अपना एकाधिकारवादी रवैया छोड़ दे और ईरानी राष्ट्र के अधिकारों का सम्मान करे, तो समझौते का रास्ता जरूर निकल सकता है." उन्होंने बातचीत टीम की सराहना करते हुए विशेष रूप से डॉ. घालिबाफ का जिक्र किया और उन्हें शुभकामनाएं दीं.
ईरानी नेताओं का कहना है कि वे बातचीत में 'अच्छे इरादों' के साथ शामिल हुए थे और उनका मानना है कि दोनों पक्षों के बीच ऐसा समझौता हो सकता है जिससे पश्चिम एशिया में संघर्ष का स्थायी समाधान निकल सके.
एमके घालिबाफ ने क्या कहा?
ईरान की संसद के अध्यक्ष एमके घालिबाफ, जिन्होंने पाकिस्तान में ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया, ने भी कहा कि ईरान ने समझौते की इच्छा के साथ बातचीत शुरू की थी, लेकिन दूसरे पक्ष पर भरोसा नहीं था. उन्होंने कहा कि उनके सहयोगियों ने आगे की ओर देखने वाले कई सुझाव दिए, लेकिन दूसरे पक्ष ईरानी प्रतिनिधिमंडल का भरोसा जीतने में असफल रहा.
डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?
इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा कि बातचीत में कई मुद्दों पर सहमति बनी, लेकिन ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर पीछे हटने को तैयार नहीं था, जिसे उन्होंने सबसे महत्वपूर्ण बताया.
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि बैठक अच्छी रही और कई मुद्दों पर सहमति बनी, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा यानी परमाणु कार्यक्रम पर कोई समझौता नहीं हो सका. उन्होंने लिखा, "ईरान अपने परमाणु महत्वाकांक्षाओं को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है." उन्होंने एक अन्य पोस्ट में चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान को अपने परमाणु इरादों को छोड़ना होगा.
इस बीच, अमेरिकी सेंटकॉम ने भी घोषणा की कि 13 अप्रैल सुबह 10 बजे (ईस्टर्न टाइम) से उनकी सेनाएं ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले सभी समुद्री यातायात पर 'नाकेबंदी' लागू करेंगी. सेंटकॉम ने कहा कि यह नाकेबंदी सभी देशों के जहाजों पर समान रूप से लागू होगी, जो ईरानी बंदरगाहों या अरब सागर और ओमान की खाड़ी के तटीय क्षेत्रों में प्रवेश या निकास करेंगे. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को बाधित नहीं करेंगे, जो गैर-ईरानी बंदरगाहों की ओर जा रहे होंगे.