Iran Protests: इलाज के अभाव में ईरानी 'किंग' पिता और भाई-बहन की अकाल-मौत, कौन हैं धधकते ईरान की गद्दी संभालने को बेताब रज़ा पहलवी
ईरान में जारी भीषण प्रदर्शनों के बीच क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी एक बार फिर सुर्खियों में हैं. इलाज के अभाव में पिता शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी की कैंसर से मौत, भाई-बहन की कथित अकाल मृत्यु और दशकों का निर्वासित जीवन उनकी कहानी को और दर्दनाक बनाता है. अमेरिका में रहकर रज़ा पहलवी ईरान की कट्टर इस्लामिक हुकूमत को हटाने की खुली वकालत कर रहे हैं. जानिए कौन हैं रज़ा पहलवी और क्यों ईरान की सत्ता से उनका नाम फिर जुड़ रहा है.;
पांच छह दिन से इस्लामिक देश ईरान कुछ अपने ही नाराज लोगों के द्वारा आग में धूं-धूं कर जलाया जा रहा है. 50 से ज्यादा इस्लामिक देशों के संगठन सहित दुनिया खामोशी के साथ तमाशा देख रही है. इस कदर ईरान के बुरे वक्त में भी अमेरिका और इजराइल आग में लगातार घी डाल रहे हैं. 500 से ज्यादा लोगों की “अकाल-मौत” हो चुकी है.
ईरान के इन बदतर हालातों-दिनों में एक नाम दुनिया में बहुत तेजी से खबरों की सुर्खी बना हुआ है. ईरान के कट्टर दुश्मन नंबर-1 अमेरिका में छिपकर बीते लंबे समय से निर्वासित जीवन जीने वाले ईरान के क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी (Reza Pahlavi, Crown Prince of Iran). जिनके कुनवे-खानदान को कट्टर इस्लाम समर्थक ईरानी नेताओं (अली ख़ामेनेई Iran Supreme Leader Ali Khamenei) ने किसी जमाने में ईरान की सर-ज़मी से उखाड़ फेंक कर देश से भागने को मजबूर कर दिया था.
500 से ज्यादा लोगों की गई जान
कट्टरवादी चरमपंथी हुकूमत को उखाड़ फेंकने की जिद पर अड़े Iran Protests के दौरान चार-पांच दिनों में कितने लोग मर-खप चुके हैं. इसका सही सही आंकलन तो अभी लगा पाना मुश्किल है. हां, खबरों के मुताबिक मरने वालों की संख्या 500 से अधिक मानी जा सकती है. महंगाई, अशिक्षा, चरमपंथी कट्टरपंथी मानसिकता, भुखमरी, बेरोजगारी के मुद्दों पर आज तकरीबन पूरा ईरान इन तमाम कुरीतियों की आग में बुरी तरह से जल-झुलस रहा है.
रज़ा पहलवी के पिता थे ईरान के राजा
इस आग को काबू करने या बुझाने का काम तो कोई नहीं कर रह है. हां, ईरान को तबाह करने की ताड़ में पहले से आंखें गड़ाए बैठे इजराइल अमेरिका जरूर आग में घी डालने का काम कर रहे हैं. जलते हुए ईरान को लेकर बेतुकी बयानबाजी करके. ऐसे में भला ईरान से दूर रहने वाले वह क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी कैसे न मौके का फायदा उठाएं, जिनके पुरखों ने कभी इसी ईरान में अपनी राजशाही चलाई थी.
आज अपनों के ही द्वारा आग में झोंक डाले गए इन्हीं क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी के पिता ईरान के राजा हुआ करते थे. एक बार ईरानी कट्टरपंथियों-चरमपंथियों और इस्लामिक होने का दंभ भरने वालों ने पहलवी के पिता की ईरान से राजशाही के खूंटे जो उखाड़े तो फिर, इस परिवार को अपनी जान बचाने के लाले पड़ गए. आज चरमपंथियों को ईरान से भगाने की मांग को लेकर अगर इनका देश जलाया जा रहा है तो यह कदम भला ईरान क क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी को बुरा क्यों लगेगा? ईरान से इनके पिता की राजशाही भी तो इन्हीं कट्टरपंथी-चरमपंथियों (खामेनेई जैसे इस्लाम समर्थक नेता) ने छीन ली थी.
अमेरिका का मिला सपोर्ट
फिलहाल जब ईरान धूंधूं कर जल रहा है तो अमेरिका में बीते कई दशक से निर्वासित जीवन जी रहे प्रिंस रज़ा पहलवी प्रदर्शनकारियों के मुखर समर्थक-नेता के रूप में उभर कर खुलकर सामने आ चुके हैं. ईरान में इस्लामिक हुकूमत की जड़ें खोदकर उसे जमींदोज करने पर आमादा गैर-चरमपंथियों को क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी का खुला समर्थन है. साथ में इन्हें खुली शह अमेरिका की मिल रही है. जो पहले से ही ईरान की चरमंथी इस्लाम समर्थक हुकूमत को उखाड़ फेंकने की जुगत में जुटा है. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर कौन हैं ईरानी क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी जो खुद अमेरिका से मदद मांग रहे हैं अपने देश (ईरान) से कट्टरपंथियों की सरकार उखाड़ फेंकने के लिए.
कौन हैं क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी?
अक्टूबर 1960 में जन्में क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी के पिता ईरान के शाह मोहम्मद रज़ा शाह पहलवी थे. मतलब, क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी जन्म से ही अपने पिता यानी ईरान के शाह-राजा की सल्तनत संभालने के कानून हकदार थे. ऐसा हो पाता उससे पहले ही वह 16-17 साल की उम्र में हवाई जहाज उड़ाने की ट्रेनिंग के लिए अमेरिका चले गए. 1970 के दशक के उस जमाने में तब ईरान और अमेरिका के संबंध मधुर थे. अचानक ईरान में जब साल 1979 में राजशाही का तख्ता पलट का बिगुल बज गया. मतलब, ईरान में जैसे ही राजशाही को तबाह करने के लिए वहां इस्लामिक क्रांति की चिंगारी भड़की तो, फिर उसे संभाल पाने में इन्हीं क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी के पिता और तब ईरान के राजा शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी नाकाम हो गए. ईरान में राजशाही ध्वस्त होने से बेहाल शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी ने तमाम पश्चिमी देशों से मुसीबत के उस दौर में राजनीतिक शरण मांगी. जोकि किसी भी देश ने नहीं दी. अंतत: उन दुर्दिनों में बेहाली के आलम में ही बेहद कष्ट भोगते हुए और कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझते हुए शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी की दर्दनाक मौत (संभवतय: मिश्र में) हो गई.
निर्वासन के बाद कभी नहीं लौटे ईरान
राजशाही से जबरन पदच्युत किए जा चुके पिता की मौत के बाद इन्हीं आज के अमेरिका में तभी से निर्वासित जीवन जी रहे ईरान के क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी के पास ताकत नाम की कोई चीज बाकी नहीं बची थी. पिता की मौत हो चुकी थी और उनकी राजशाही का रुतबा-रसूख भी ईरानी इस्लामिक समर्थक कट्टरपंथियों-चरमपंथियों ने छिन्न-भिन्न कर डाला था. ऐसे में रज़ा पहलवी ने अमेरिका में ही निर्वासित जीवन बिताकर अपनी जान महफूज रखने का इरादा किया. और तब से अब तक वे कभी भी ईरान वापिस नहीं लौटे हैं. अब जब जब ईरान अपनों के ही द्वारा आग में जलाया जाता है. तब तब ईरान की सत्ता पर काबिज कट्टरपंथी-चरमपंथी इस तबाही के लिए सीधे सीधे इन्हीं रज़ा पहलवी को इस सबके लिए जिम्मेदार मानते हैं. ईरान की मौजूदा हुकूमत का सुप्रीम कमांडर अली खामेनेई और उसके कट्टर मुंहलगे समर्थक आज भी कहते हैं कि जब जब आज ईरान जलता है तो उसमें अमेरिका में निर्वासित जीवन जी रहे क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी और अमेरिका का साझा हाथ होता है.
भाई-बहन ने की थी आत्महत्या
ईरान में पिता की राजशाही गई उसके बाद पिता की मौत भी हो गई. ऐसे में परिवार पर दुर्दिनों की काली छाया इस कदर की गहरी पड़ी कि जो आज तक बर्बादी और तबाही का कारण बनी हुई है. मिडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बदतर हालातों में एक वह भी दिन आ गया जब रज़ा पहलवी के भाई-बहन ने आत्महत्या करके अपनी जीवन-लीला तक समाप्त कर डाली. किसी राजशाही या राजा के खानदान को इससे बुरा और भला क्या देखने को जिंदगी में बाकी बचा था. भाई बहन और पिता की मौत से बुरी तरह टूट चुके क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी की जिंदगी बेशक बहुत सीमित दायरे में सिमट चुकी थी. उन्होंने मगर हारकर दुनिया से गुमनामी में चले जाने के बजाए खुद और बदतर हालातों से लड़ते-जूझते हुए खुद को दुबारा खड़ा करने की जद्दोजहद शुरू कर दी.
खामेनेई की नींद किया हराम
नतीजा सामने है कि युवा अवस्था में ही पिता की राजशाही का सुख भोगने के बाद राजशाही के जमींदोज होने पर हर बड़े से बड़ा दुख भोगने के बाद भी, हार न मानने वाले आज 65-66 साल की उम्र में यही क्राउन प्रिंस अब कट्टर इस्लामिक विचारधारा वाली ईरानी हुकूमत के लिए अमेरिका में बैठकर ही बवाल-ए-जान बने हुए हैं. वे अमेरिका में बैठे बैठे ही कट्टर इस्लामिक मुल्ला अली खामेनेई जैसों की नींद हराम किए हुए हैं. निजी और सामाजिक जिंदगी में हर त्रासदी और सुख को देख भोग चुकने के बाद बेहद परिपक्व हो चुके रज़ा पहलवी अब फिर से ईरान को कट्टर-चरमपंथियों के चंगुल से मुक्त कराने की जद्दोजहद से जूझ रहे हैं. ताकि भविष्य के ईरान को कट्टरता के बंधन से मुक्त करवा कर आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मुक्त विचारों वाला देश बना सकें.
जहां तक सवाल रज़ा पहलवी के बेहद निजी जीवन का है तो वे बीते करीब 48-50 साल से अमेरिका में अपनी जिंदगी बचाए पड़े हैं. उन्होंने वहीं से पॉलिटिकल साइंस में उच्च शिक्षा हासिल की. वकील बनने के बाद उन्होंने अमेरिका में ही अमेरिकी लड़की यास्मीन से विवाह कर लिया. आज रज़ा पहलवी-यास्मीन तीन बेटियों फराह, इमान और नूर के माता-पिता हैं. अमेरिकन मीडिया से बाचतीच में हाल के दिनों में वह कई बार खुलकर बोल चुके हैं कि जिस तरह से अब ईरान में कट्टरता-चरमपंथ के खिलाफ युवा मुखर हो रहे हैं, इससे साफ होता जा रहा है कि आने वाले दिनों में बहुत ही जल्दी ईरान को अली खामेनेई जैसे मुल्लाओं की रूढ़िवादी कट्टर इस्लामिक सोच से छुटकारा मिल जाएगा. बस इसमें हमें बहुत जल्दी सिर्फ और सिर्फ अमेरिका का पूरा सपोर्ट मिल सके. तभी यह संभव है.
टकटकी से देख रहे सत्ता की कुर्सी
यह कहानी है अर्श से फर्श पर आने के बाद अब फिर आसमान छूने की बेताब तमन्नाओं की ओर बढ़ने के लिए टकटकी लगाए देख रहे रज़ा पहलवी की. वही रज़ा पहलवी जिन्होंने साल 1980 में खुद को काहिरा में आयोजित एक समारोह में “शाह” तक घोषित कर डाला था. हालांकि उनके इस कदम को लेकर उनके समर्थक-विरोधियों में बहस छिड़ गई थी. साल 2013 में इन्होंने “नेशनल काउंसिल ऑफ ईरान फॉर फ्री इलेक्शन” की भी शुरूआत की थी. ताकि ईरान के अंदर मौजूद चरमपंथियों को कमजोर करने के लिए वहां मजबूत विपक्षी गठबंधन तैयार हो सके. जोकि सफल नहीं रहा.
साल 2022 में जब ईरान में युवा महसा अमिनी की पुलिस हिरासत में संदिग्ध मौत हुई थी, तब ईरान में बवाल मच गया था. देशव्यापी उन प्रदर्शनों के दौरान रज़ा पहलवी सुर्खियों में आ गए. इनके ऊपर देश में फसाद कराने के आरोप भी लगे. इनके विरोधी कहते हैं कि रज़ा पहलवी का अपना कोई वजूद नहीं है. वे हमेशा बाहरी और ईरान विरोधी ताकतों के बलबूते पर निर्भर रहते हैं. फिर वह चाहे अमेरिका हो या फिर इजराइल. इनके विरोधियों के ही मुताबिक, अगर रज़ा पहलवी का अपना कोई महत्व या ताकत है तो फिर वे 4 दशक से अमेरिका में निर्वासित जीवन जीने के दौरान अब तक साबित क्यों नहीं कर सके हैं. साल 2023 में इजराइल यात्रा के दौरान जब रज़ा पहलवी ने वहां के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की तब भी मुल्ला-नीति समर्थकों में खूब शोर मचा था.