तेल-गैस से लेकर इंटरनेट तक, दुनिया को रोकने के लिए ईरान के हाथ में क्या-क्या?
ईरान द्वारा Strait of Hormuz को बंद किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हलचल मच गई है. यह जलडमरूमध्य न केवल तेल और गैस आपूर्ति के लिए अहम है, बल्कि समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मार्ग है.
Iran-Israel War
(Image Source: AI: Sora )Iran Israel War: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब एक नए और अधिक खतरनाक चरण में प्रवेश करता दिख रहा है. ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध का तीसरा सप्ताह शुरू हो चुका है, लेकिन इसके खत्म होने के कोई संकेत नहीं मिल रहे. इस बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के बाद अब इंटरनेट कनेक्टिविटी पर भी खतरे के बादल मंडराने लगे हैं.
ईरान द्वारा Strait of Hormuz को बंद किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हलचल मच गई है. यह जलडमरूमध्य न केवल तेल और गैस आपूर्ति के लिए अहम है, बल्कि समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मार्ग है. ऐसे में यदि हालात और बिगड़ते हैं, तो वैश्विक इंटरनेट सेवाएं भी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती हैं.
होर्मुज के बाद अब क्या है निशाना?
रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान समर्थित Houthi movement अब Bab el-Mandeb Strait को निशाना बना सकते हैं. यह जलमार्ग लाल सागर में स्थित है और वैश्विक व्यापार व डेटा ट्रांसमिशन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. यदि यह मार्ग भी बाधित होता है, तो डिजिटल और आर्थिक दोनों स्तरों पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है.
कितनी अहम समुद्र के नीचे बिछी केबलें?
समुद्र तल पर फैली फाइबर-ऑप्टिक केबलें ही वैश्विक इंटरनेट की रीढ़ हैं. ये केबल वीडियो कॉल, ईमेल, बैंकिंग ट्रांजैक्शन और एआई सेवाओं तक, लगभग हर डिजिटल गतिविधि को संचालित करती हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, लाल सागर के नीचे करीब 17 प्रमुख केबल गुजरती हैं, जो यूरोप, एशिया और अफ्रीका को जोड़ती हैं.
भारत समेत कई देशों पर सीधा असर
TeleGeography के अनुसार, फारस की खाड़ी में AAE-1, FALCON, Gulf Bridge International और Tata-TGN Gulf जैसी केबलें सक्रिय हैं. ये केबल सीधे भारत के अंतरराष्ट्रीय डेटा ट्रैफिक को सपोर्ट करती हैं. यदि इन लाइनों को नुकसान पहुंचता है, तो भारत में इंटरनेट स्पीड और कनेक्टिविटी पर गंभीर असर पड़ सकता है.
Amazon, Microsoft और Google जैसी दिग्गज कंपनियों ने खाड़ी देशों में डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए भारी निवेश किया है. उनका उद्देश्य इस क्षेत्र को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का वैश्विक हब बनाना था, लेकिन मौजूदा संकट से इन योजनाओं पर खतरा मंडरा रहा है.
क्या केबल पर बढ़ा खतरा?
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के सबसे संकरे हिस्से में पानी की गहराई केवल लगभग 200 फीट है. इसका मतलब है कि केबल उथले पानी में स्थित हैं और आसानी से क्षतिग्रस्त हो सकती हैं. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान इन केबलों को निशाना बनाएगा या नहीं, लेकिन उसकी नौसैनिक गतिविधियों और पनडुब्बी टीमों की मौजूदगी इस आशंका को मजबूत करती है. एक छोटा सा हादसा या जानबूझकर किया गया हमला इंटरनेट सेवाओं को हफ्तों या महीनों तक ठप कर सकता है.
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर?
यदि इंटरनेट केबल बाधित होती हैं, तो इसका असर केवल संचार तक सीमित नहीं रहेगा. बैंकिंग सिस्टम, शेयर बाजार, अस्पताल और एआई सेवाएं सभी प्रभावित होंगी. खाड़ी देशों के साथ-साथ भारत और यूरोप-एशिया के बीच डेटा ट्रैफिक पर भी भारी दबाव पड़ेगा, जिससे वैश्विक स्तर पर देरी और आर्थिक नुकसान बढ़ेगा.
क्या है संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी?
UN ने चेतावनी दी है कि बढ़ती तेल कीमतों, महंगे शिपिंग और खाद्य संकट के चलते 45 मिलियन अतिरिक्त लोग गंभीर भूखमरी का शिकार हो सकते हैं. इससे प्रभावित लोगों की कुल संख्या 319 मिलियन के रिकॉर्ड स्तर को पार कर सकती है.