आसमान से गिरती बारूद और धधकता तेल! क्रूड ऑयल की आसमान छूती क़ीमतों से क्यों लग रहा सऊदी अरब को डर? Detailed
एक तरफ जहां कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने कई तेल उत्पादक देशों के लिए मुनाफे के अवसर पैदा किए हैं, वहीं दूसरी ओर सऊदी अरब जैसे बड़े उत्पादक देश के लिए यह स्थिति चिंता का कारण बन गई है.
iran israel war
(Image Source: AI: Sora )Crude Oil Prices: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल अपने चरम पर पहुंचती दिख रही है. एक तरफ जहां कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने कई तेल उत्पादक देशों के लिए मुनाफे के अवसर पैदा किए हैं, वहीं दूसरी ओर सऊदी अरब जैसे बड़े उत्पादक देश के लिए यह स्थिति चिंता का कारण बन गई है.
दरअसल, हालात ऐसे बनते जा रहे हैं जहां तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकती हैं, लेकिन इसके बावजूद सऊदी अरब राहत महसूस नहीं कर रहा. रिपोर्ट्स के मुताबिक अगर ईरान के साथ जारी संघर्ष और आपूर्ति में बाधाएं लंबे समय तक बनी रहीं, तो इसका असर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर रूप से पड़ सकता है.
किस मॉडल पर काम कर रहा सऊदी अरब?
The Wall Street Journal की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अधिकारी सबसे खराब स्थिति के मॉडल पर काम कर रहे हैं. इस अनुमान के मुताबिक, अगर मौजूदा संकट अप्रैल के अंत तक जारी रहता है, तो ब्रेंट क्रूड की कीमत 180 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती है. यह अनुमान बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और आपूर्ति संकट की गंभीरता को दर्शाता है.
सऊदी अरब के लिए चिंता क्यों?
हालांकि ऊंचे दाम आमतौर पर तेल उत्पादकों के लिए फायदेमंद होते हैं, लेकिन सऊदी अरब इसे लेकर सतर्क है. अत्यधिक कीमतें वैश्विक मांग को कम कर सकती हैं और आर्थिक मंदी को जन्म दे सकती हैं. किंग फैसल सेंटर के विश्लेषक उमर करीम ने कहा "सऊदी अरब आम तौर पर तेल की कीमतों में बहुत तेजी से वृद्धि पसंद नहीं करता है, क्योंकि इससे दीर्घकालिक बाजार अस्थिरता पैदा होती है."
क्यों बढ़ी कीमत?
28 फरवरी को ईरान-इजरायल के बीच शुरू हुई जंग के बाद से तेल बाजार में भारी उछाल देखा गया है. ईरान द्वारा ऊर्जा ठिकानों पर हमले और Strait of Hormuz में जहाजों पर खतरे ने आपूर्ति को प्रभावित किया है. इस सप्ताह ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि खाड़ी क्षेत्र के कुछ बेंचमार्क 166 डॉलर से भी ऊपर चले गए हैं.
सऊदी तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी
सऊदी अरब अपने लाल सागर मार्ग से एशियाई देशों को करीब 125 डॉलर प्रति बैरल की दर से तेल बेच रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक कीमतें जल्द ही 138-140 डॉलर तक पहुंच सकती हैं, अप्रैल के मध्य तक 150 डॉलर और आगे बढ़कर 165 से 180 डॉलर के स्तर तक जा सकती हैं.