ईरान के सबसे ताकतवर लारीजानी का कैसे हुआ खात्मा, क्या कर रहे थे हमले के वक्त? Chapter बंद करने वाली स्टोरी

इजरायल ने मंगलवार को अली लारीजानी को मारकर ईरान को बड़ा झटका दिया. 68 वर्षीय लारीजानी ईरान के सुरक्षा ढांचे में बेहद अहम भूमिका निभा रहे थे. खासतौर पर अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद उनकी जिम्मेदारियां और बढ़ गई थीं.

Ali Larijani

(Image Source:  X/ @VoiceForIndian )
Edited By :  विशाल पुंडीर
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Iran Israel Conflict: इजरायल ने मंगलवार को अली लारीजानी को मारकर ईरान को बड़ा झटका दिया. 68 वर्षीय लारीजानी ईरान के सुरक्षा ढांचे में बेहद अहम भूमिका निभा रहे थे. खासतौर पर अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद उनकी जिम्मेदारियां और बढ़ गई थीं. इस घटना ने न केवल ईरान की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को झटका दिया है, बल्कि क्षेत्र में पहले से जारी तनाव को और भड़का दिया है.

फार्स न्यूज़ एजेंसी ने लारीजानी को देश के प्रमुख और विवेकशील अधिकारियों में से एक बताया और उनकी मौत को राष्ट्रीय क्षति करार दिया. इस हमले के बाद क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेजी से बढ़ गई हैं. ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और खाड़ी अरब देशों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए.

हमले के वक्त कहां थे लारीजानी?

ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, देश की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी की मंगलवार को एक हमले में हत्या कर दी गई. यह हमला तेहरान के पास परदिस इलाके में उनकी बेटी के घर पर हुआ, जिसमें उनके परिवार और सुरक्षा कर्मियों को भी भारी नुकसान हुआ. रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हमले में लारीजानी के बेटे, एक डिप्टी और कई अंगरक्षकों की भी मौत हुई. ईरान सरकार ने उन्हें शहीद घोषित करते हुए देश की रक्षा और क्षेत्रीय नीतियों में उनके योगदान को सम्मान दिया है.

28 फरवरी को शुरू हुए अमेरिका-इजरायल हमलों के बाद लारीजानी उन प्रमुख नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने सबसे पहले प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने हमलावरों पर देश को तोड़ने और लूटने का आरोप लगाया था और संभावित विरोध प्रदर्शनों को लेकर सख्त चेतावनी भी जारी की थी.

क्या है इजरायल का दावा?

इजरायली सेना के प्रवक्ता एफी डेफ्रिन ने कहा कि हमलों का उद्देश्य ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को निशाना बनाना था. इजरायल के रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ के अनुसार, तेहरान में बासिज की कई चौकियों को भी निशाना बनाया गया. इन हमलों में बासिज अर्धसैनिक बल के प्रमुख गुलाम रजा सुलेमानी के मारे जाने की भी पुष्टि हुई है.

इजरायल ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि उसने ही इस हमले को अंजाम दिया. इजरायली अधिकारियों के मुताबिक, इस अभियान का उद्देश्य ईरानी शासन को कमजोर करना और जनता को अपने नेताओं के खिलाफ खड़े होने का अवसर देना था.

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