ईरान के सबसे सस्ते ड्रोन ने ट्रंप और नेतन्याहू की नाक में किया दम- खासियत घातक शाहेद की
ईरान के सस्ते और तेज़ी से तैयार होने वाले शाहेद 136 ड्रोन अमेरिका और उसके मध्य पूर्व सहयोगियों की सुरक्षा प्रणालियों के लिए गंभीर खतरा बन गए हैं. महंगे इंटरसेप्टर मिसाइलों के बावजूद ये ड्रोन लगातार हमला कर रहे हैं.
ईरान के सस्ते और तेज़ी से तैयार होने वाले शाहेद 136 ड्रोन अमेरिका और उसके मध्य पूर्व सहयोगी के नाक में दम कर दिया है. पिछले सप्ताह की रिपोर्टों के अनुसार, इन ड्रोन की लहरें अमेरिकी हवाई सुरक्षा प्रणालियों को भेद रही हैं, जिससे अमेरिका के सैनिक और क्षेत्रीय बेस जोखिम में हैं.
छह अमेरिकी सैनिक पहले ही ड्रोन हमलों में मारे जा चुके हैं, और अमेरिका महंगी इंटरसेप्टर मिसाइलों का भारी खर्च उठाकर इन सस्ते ड्रोन को रोकने की कोशिश कर रहा है. इस संघर्ष ने साफ कर दिया कि शाहिद ड्रोन की रणनीति बेहद कुशल और खतरनाक है. आइए जानते हैं अमेरिका और नेतन्याहू के 'नाक में दम' करने वाले शाहेद ड्रोन की खासियत.
सस्ती कीमत पर तैयार:
शाहिद 136 ड्रोन केवल $20,000 में तैयार होते हैं, जबकि अमेरिका को इन्हें रोकने के लिए महंगे पेट्रियट और THAAD इंटरसेप्टर मिसाइलों पर करोड़ों डॉलर खर्च करने पड़ते हैं.
हजारों छोटे कटों की रणनीति-
कॉलिन क्लार्क के अनुसार, ईरान सस्ती ड्रोन भेजकर अमेरिकी सुरक्षा प्रणालियों को थका रहा है. यह ‘हजारों छोटे कटों’ की रणनीति के समान है.
अमेरिका की तैयारी में कमी-
पूर्व अमेरिकी सैनिक ब्रेट वेलिकोविच के मुताबिक, अमेरिका को सालों से ड्रोन युद्ध के लिए तैयार रहना चाहिए था, लेकिन फेडरल कॉन्ट्रैक्टिंग सिस्टम तेज़ इनोवेशन के लिए सक्षम नहीं है.
महंगी मिसाइलों की आवश्यकता-
इन सस्ते ड्रोन का मुकाबला महंगी मिसाइलों से करना पड़ता है, जिनके उत्पादन में सालों लग सकते हैं, जिससे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा जोखिम बढ़ता है.
सैनिकों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर-
1 मार्च को कुवैत में छह अमेरिकी सैनिक मारे गए. सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास पर भी ड्रोन हमला हुआ.
कहीं भी उत्पादन संभव-
सिंस्टम सेंटर की केली ग्रिएको के अनुसार, शाहिद ड्रोन को किसी गैराज या सीक्रेट प्रोडक्शन साइट्स में भी तैयार किया जा सकता है, इसे ढूंढना और नष्ट करना मुश्किल है.
लंबे समय से रणनीति
ईरान ने पिछले सप्ताह 1,500 से अधिक ड्रोन लॉन्च किए. ग्रिएको के अनुसार, यह रणनीति महीनों तक जारी रह सकती है, जिससे अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए लगातार खतरा बना रहेगा.