एक ही दिन में कैसे लुट गया इंडोनेशिया का सबसे अमीर आदमी? उड़ गए ₹75,000 करोड़

इंडोनेशिया के सबसे अमीर व्यक्ति प्राजोगो पंगेस्टु अचानक को अचानक बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है. उनके शेयर में करीब 15 अरब डॉलर की गिरावट आ गई. उनके परिवार ने अब स्टेटमेंट जारी किया है.;

( Image Source:  Sora Ai )
Edited By :  नवनीत कुमार
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जिस शख्स का नाम सुबह तक इंडोनेशिया की सबसे अमीर हस्तियों में गिना जा रहा था, वही शाम होते-होते अरबों डॉलर गंवा चुका था. शेयर बाजार खुला तो सब कुछ सामान्य था, लेकिन कुछ ही घंटों में स्क्रीन पर लाल निशान बढ़ने लगे. एक के बाद एक कंपनियों के शेयर धड़ाम होने लगे और देखते ही देखते इंडोनेशिया के सबसे अमीर कारोबारी की दौलत से करीब 9 अरब डॉलर (लगभग ₹75,000 करोड़) उड़ गए. ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक, उनकी कुल संपत्ति अब घटकर करीब 31 अरब डॉलर रह गई है.

यह कोई युद्ध नहीं था, न कोई घोटाला सामने आया था. फिर भी बाजार में ऐसा भूचाल आया कि पूरे देश के अरबपतियों की लिस्ट हिल गई. इस अचानक आई गिरावट की वजह कोई कंपनी घोटाला नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय चेतावनी रिपोर्ट बनी, जिसने निवेशकों के भरोसे को हिला दिया.

सबसे ज्यादा चोट प्राजोगो पंगेस्टु को

इंडोनेशिया के सबसे अमीर व्यक्ति प्राजोगो पंगेस्टु को सबसे बड़ा नुकसान उठाना पड़ा. उनकी संपत्ति में इस साल अब तक करीब 15 अरब डॉलर की गिरावट आ चुकी है. प्राजोगो पंगेस्टु की Barito Pacific (एनर्जी कंपनी) में 71% और Petrindo Jaya Kreasi (कोयला और सोना खनन कंपनी) में 84% की हिस्सेदारी है. इन दोनों कंपनियों के शेयर एक ही दिन में 12% से ज्यादा टूट गए, जिससे उनकी निजी दौलत पर सीधा असर पड़ा. उनके फैमिली ऑफिस ने बयान जारी कर कहा कि वे MSCI की रिपोर्ट की समीक्षा कर रहे हैं और संबंधित पक्षों से बातचीत जारी रखेंगे.

आखिर क्या था गिरावट का ट्रिगर?

इस बिकवाली की असली वजह बनी MSCI (Morgan Stanley Capital International) की रिपोर्ट. MSCI दुनिया की सबसे बड़ी इंडेक्स प्रोवाइडर संस्था है, जिसकी रेटिंग पर अरबों डॉलर का निवेश टिका होता है. MSCI ने चेतावनी दी कि इंडोनेशिया में शेयरहोल्डिंग रिपोर्टिंग नियम साफ नहीं हैं. कई कंपनियों में मालिकाना ढांचा अस्पष्ट (unclear ownership structure) है जिसकी वजह से इनसाइडर ट्रेडिंग और हेरफेर का खतरा बढ़ सकता है. MSCI ने यह भी कहा कि इंडोनेशिया में कई कंपनियां ऐसी हैं जिन पर एक व्यक्ति या छोटा समूह ही पूरा कंट्रोल रखता है और आम निवेशकों के लिए बहुत कम शेयर खुले बाजार में उपलब्ध होते हैं. यही वजह है कि कुछ चुनिंदा अरबपतियों की संपत्ति अचानक बहुत तेजी से बढ़ती और फिर गिरती है.

बाजार में मचा कोहराम

MSCI की चेतावनी के बाद निवेशकों में घबराहट फैल गई. परिणाम यह हुआ कि Jakarta Composite Index बुधवार को 7% गिरकर बंद हुआ. गुरुवार को कारोबार के दौरान 10% तक लुढ़क गया. MSCI ने यह भी कहा कि वह इंडोनेशिया से जुड़े कुछ इंडेक्स बदलावों को फिलहाल रोक रहा है. अगर मई तक नियमों में सुधार नहीं हुआ तो और कड़े कदम उठाए जा सकते हैं. इस चेतावनी को बाजार ने बेहद गंभीर संकेत के रूप में लिया.

दूसरे अरबपति भी नहीं बचे

यह संकट सिर्फ प्राजोगो पंगेस्टु तक सीमित नहीं रहा. हरयांतो चिप्टोडिहार्जो (Haryanto Tjiptodihardjo) की प्लास्टिक कंपनी Impack Pratama Industri के शेयर 15% गिरे और दो दिन में करीब 3 अरब डॉलर का नुकसान हो गया. वहीं बैंकिंग कारोबारी माइकल हार्टोनो, कोयला कारोबारी लो टक क्वांग (Low Tuck Kwong) की संपत्ति में भी अरबों डॉलर की गिरावट दर्ज की गई.

पुरानी समस्या: पारदर्शिता की कमी

इंडोनेशिया की कई लिस्टेड कंपनियों में स्थिति यह है कि मालिकों की हिस्सेदारी 92.5% तक है जबकि नियमों के तहत सिर्फ 7.5% शेयर फ्री फ्लोट (public trading) में रखना जरूरी है. मतलब, बहुत कम शेयर खुले बाजार में घूमते हैं. इससे होता यह है कि थोड़ी सी खरीद-बिक्री में भी कीमतें अचानक ऊपर-नीचे हो जाती हैं और बाजार में हेरफेर की आशंका बनी रहती है, जिससे विदेशी निवेशक डरते हैं. निवेशक लंबे समय से इंडोनेशिया सरकार से मांग कर रहे हैं कि रिपोर्टिंग नियम सख्त किए जाएं, शेयरहोल्डिंग स्ट्रक्चर ज्यादा पारदर्शी बनाया जाए और फ्री फ्लोट बढ़ाया जाए.

एशिया की बड़ी अर्थव्यवस्था पर असर

इंडोनेशिया दक्षिण-पूर्व एशिया का सबसे बड़ा शेयर बाजार है. लेकिन अगर निवेशकों का भरोसा टूटा, तो विदेशी पूंजी बाहर जा सकती है और रुपिया पर दबाव बढ़ सकता है. इसके अलावा कंपनियों की फंडिंग महंगी हो सकती है. बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि “अगर सरकार और रेगुलेटर जल्दी कदम उठाते हैं तो भरोसा लौट सकता है, लेकिन देरी हुई तो इंडोनेशियाई बाजार ‘हाई रिस्क जोन’ माना जाएगा.” इंडोनेशिया के सबसे अमीर आदमी का एक दिन में 9 अरब डॉलर गंवाना कोई सामान्य शेयर गिरावट नहीं, बल्कि यह पूरे सिस्टम पर उठे सवालों का नतीजा है.

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