जो Azerbaijan ऑपरेशन सिंदूर में खुलकर पाकिस्तान के लिए खेला, उससे अब कैसे सुधर रहे भारत के रिश्ते?

ईरान जंग के शुरू होने के बाद भारत और अज़रबैजान के रिश्तों में मिठास आनी शुरू हो गई है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के खिलाफ रुख की वजह से दोनों के रिश्तों में कड़वाहट आ गई थी.

( Image Source:  X-@ANI, @DuhaSena and @indembassybaku )
Edited By :  समी सिद्दीकी
Updated On : 4 April 2026 1:23 PM IST

India Relation With Azerbaijan: भारत और अजरबैजान के बीच एक साल से चले आ रहे तनाव के बाद अब दोनों देशों ने रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश शुरू कर दी है. इसी सिलसिले में अजरबैजान की राजधानी बाकू में विदेशी कार्यालय स्तर की बातचीत का छठा दौर आयोजित किया गया.

यह बातचीत शुक्रवार को हुई, जिसमें भारत के विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज और अजरबैजान के उप विदेश मंत्री एलनूर ममददोव शामिल हुए. साल 2022 के बाद यह पहली औपचारिक बातचीत थी, जो अजरबैजान-पाकिस्तान और भारत-आर्मेनिया संबंधों को लेकर गहरे मतभेदों के बाद हो रही है.

विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों की पूरी तरह समीक्षा की. बातचीत में व्यापार, तकनीक, पर्यटन, फार्मास्यूटिकल्स, ऊर्जा, संस्कृति, लोगों के बीच संपर्क और सीमा पार आतंकवाद से निपटने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई.

अजरबैजान ने हाल ही में भारत को कच्चे तेल का निर्यात फिर से शुरू किया है, जो भारत को उसके कुल निर्यात का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा है. वहीं ओएनजीसी विदेश लिमिटेड भी वहां के तेल और गैस क्षेत्रों तथा एक ऊर्जा पाइपलाइन में हिस्सेदारी रखती है.

कैसे हुई थी भारत और अज़रबैजान के बीच तनातनी?

पिछले साल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत द्वारा पाकिस्तान के ठिकानों पर की गई कार्रवाई को लेकर अजरबैजान ने विरोध जताया था, जिससे भारत नाराज हो गया था. मई 2025 में जब भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की थी तो अजरबैजान के विदेश मंत्रालय ने इसकी निंदा की थी और दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की थी.

पाकिस्तान और अजरबैजान के बीच कैसे रिश्ते हैं?

अजरबैजान और पाकिस्तान के बीच करीबी रणनीतिक संबंध हैं. नागोर्नो-काराबाख विवाद में पाकिस्तान ने अजरबैजान का समर्थन किया था. वहीं अजरबैजान ने भारत पर आर्मेनिया को हथियार देने का आरोप लगाया था.

अज़रबैजान ने भारत पर क्या लगाया था इल्जाम?

सितंबर में अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात के दौरान भारत पर शंघाई सहयोग संगठन की सदस्यता में अजरबैजान का रास्ता रोकने का आरोप भी लगाया था. अलीयेव के कार्यालय ने एक बयान में कहा था कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अजरबैजान के खिलाफ कदम उठाने की कोशिश की, लेकिन अजरबैजान के लिए भाईचारे के रिश्ते ज्यादा अहम हैं.

कैसे भारत और अज़रबैजान के रिश्तों में आ रही मिठास?

हालांकि हाल के समय में दोनों देशों के संबंधों में सुधार देखा गया है. भारत के नए राजदूत अभय कुमार और अजरबैजान के अधिकारियों के बीच बैठकों के बाद रिश्तों में नरमी आई है. इसके अलावा अजरबैजान ने अमेरिका-इजराइल के हमलों के दौरान ईरान से निकलने वाले 200 से ज्यादा भारतीयों की मदद भी की थी.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस दौरान अज़रबैजान सरकार का शुक्रिया भी अदा किया था. उन्होंने कहा था कि भारत अजरबैजान सरकार का आभारी है, जिसने ईरान से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने में मदद की. सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार की बातचीत में दोनों देशों ने आपसी मतभेदों को बातचीत और संवाद के जरिए सुलझाने पर सहमति जताई है. अगली बैठक दिल्ली में होने पर सहमति बनी है.

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