समंदर में हाई-वोल्टेज ड्रामा! US Forces ने अटलांटिक में रूसी ऑयल टैंकर सीज़ किया- Russia के साथ बढ़ सकता है तनाव
अमेरिका ने नॉर्थ सी में बड़ी कार्रवाई करते हुए रूसी झंडे वाले ऑयल टैंकर Marinera को जब्त कर लिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस जहाज का पीछा अमेरिकी एजेंसियां दो हफ्ते से अधिक समय तक कर रही थीं. दावा है कि रूस ने टैंकर को बचाने के लिए नौसैनिक एस्कॉर्ट तैनात करने की कोशिश भी की, लेकिन अमेरिकी दबाव के आगे यह रणनीति काम नहीं आई.;
अटलांटिक महासागर में बीते दो हफ्तों से जारी एक हाई-वोल्टेज पीछा अब वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का नया केंद्र बनता जा रहा है. संयुक्त राज्य अमेरिका एक ऐसे ऑयल टैंकर को जब्त करने की कोशिश कर रहा है, जो कथित तौर पर वेनेज़ुएला के प्रतिबंधित तेल निर्यात से जुड़ा है. यह कदम न केवल वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो मोरोस पर वॉशिंगटन के दबाव को और बढ़ा सकता है, बल्कि रूस के साथ तनाव को भी खतरनाक स्तर तक ले जाने की आशंका जता रहा है.
यह कार्रवाई अमेरिका की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह वेनेज़ुएला के तेल निर्यात को रोककर मादुरो सरकार की आय के प्रमुख स्रोत पर चोट करना चाहता है. लेकिन इस बार मामला इसलिए और संवेदनशील हो गया है, क्योंकि संबंधित टैंकर ने खुद को रूसी झंडे (Russian flag) के तहत रजिस्टर कर लिया है.
विवाद के केंद्र में कौन सा टैंकर है?
जिस टैंकर को लेकर यह टकराव चल रहा है, उसका पुराना नाम Bella-1 था. यह जहाज़ उन वेनेज़ुएला तेल शिपमेंट्स से जुड़ा माना जा रहा है, जिन पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए हैं. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह टैंकर अमेरिकी समुद्री “ब्लॉकेड” को चकमा देने में कामयाब रहा और US Coast Guard की कई बार की गई बोर्डिंग कोशिशों को नाकाम कर दिया. इन प्रयासों के विफल होने के बाद टैंकर ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में लंबी यात्रा शुरू कर दी. इसी दौरान इसका नाम बदलकर Marinera कर दिया गया और इसे रूसी रजिस्ट्री के तहत री-फ्लैग कर दिया गया. जिससे पूरा मामला और उलझ गया.
अमेरिका कैसे कर रहा है टैंकर को जब्त करने की कोशिश?
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस ऑपरेशन को US Coast Guard और US Military मिलकर अंजाम दे रहे हैं. खास बात यह है कि यह कार्रवाई अमेरिकी क्षेत्रीय जलक्षेत्र से काफी दूर की जा रही है, जो प्रतिबंधों के सख्त और आक्रामक प्रवर्तन का संकेत देती है. स्थिति इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस ऑपरेशन के दौरान आसपास के इलाके में रूसी नौसैनिक संसाधन, जिनमें एक रूसी पनडुब्बी भी शामिल हो सकती है, मौजूद थे. इससे समुद्र में एक संवेदनशील भू-राजनीतिक टकराव की आशंका बढ़ गई है.
इस पूरे मामले में रूस क्यों अहम है?
Marinera का रूसी झंडे के तहत रजिस्ट्रेशन इस विवाद में निर्णायक मोड़ बन गया है. किसी रूसी-ध्वज वाले जहाज़ को जब्त करने की कोशिश सीधे तौर पर मॉस्को को इस विवाद में खींच सकती है. रूस और वेनेज़ुएला के बीच राजनीतिक और आर्थिक रिश्ते पहले से मजबूत हैं. रूस बार-बार अमेरिकी प्रतिबंधों को “अवैध” बता चुका है और यह चेतावनी देता रहा है कि उसके झंडे के तहत चलने वाले जहाज़ों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
वेनेज़ुएला को लेकर अमेरिकी नीति में यह कदम कैसे फिट बैठता है?
यह कार्रवाई डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की उस नीति का हिस्सा मानी जा रही है, जिसके तहत वेनेज़ुएला से जुड़े तेल शिपमेंट्स को बाधित कर मादुरो सरकार की आर्थिक रीढ़ तोड़ने की कोशिश की जा रही है. वॉशिंगटन का आरोप है कि वेनेज़ुएला सरकार प्रतिबंधों से बचकर होने वाले तेल निर्यात से भ्रष्टाचार और दमन को फंड करती है. हाल के हफ्तों में अमेरिका ने लैटिन अमेरिकी जलक्षेत्र में कई वेनेज़ुएला-लिंक्ड टैंकरों को रोका है, जिसे अधिकारी एक तरह का समुद्री घेराबंदी अभियान बता रहे हैं.
क्या है ‘शैडो फ्लीट’ और क्यों निशाने पर है?
Marinera का मामला तथाकथित “Shadow Fleet” को लेकर बढ़ती अमेरिकी चिंता के बीच सामने आया है. शैडो फ्लीट ऐसे टैंकरों को कहा जाता है, जो प्रतिबंधित देशों के लिए तेल ढोने के दौरान बार-बार नाम, झंडा और मालिकाना ढांचा बदलते हैं, ताकि कानून से बचा जा सके. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ये टैंकर न केवल अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध व्यवस्था को कमजोर करते हैं, बल्कि समुद्री सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए भी बड़ा खतरा हैं. वहीं रूस का दावा है कि अमेरिका इस तरह की कार्रवाइयों के जरिए अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर दबाव बना रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है.