खामनेई पर आखिरी War किसका? मोसाद या IDF - ईरान-इजरायल जंग में कौन बना असली खिलाड़ी

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद मोसाद और IDF में से किसकी भूमिक बड़ी को लेकर चर्चा है. क्या यह खुफिया ऑपरेशन था या सीधा सैन्य हमला. जानिए पूरी रणनीति.

ईरान-इजरायल तनाव के बीच सबसे बड़ा दावा यह सामने आया कि सुप्रीम लीडर खामेनेई एक बड़े मिसाइल हमले में मारे गए. इस हमले को इजरायल और अमेरिका से साथ मिलकर अंजाम दिया था. रिपोर्ट्स के मुताबिक उनके ऑफिस कॉम्प्लेक्स को निशाना बनाकर कई मिसाइलें दागी गईं, जिससे भारी तबाही हुई. खामनेई की मौत की पुष्टि वहां की सरकारी एजेंसी ने भी आधिकारिक तौर पर कर दी है. इस हमले को इजरायल की हाई-प्रिसिजन स्ट्राइक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. इजरायल लंबे समय से ईरान के सैन्य और परमाणु नेटवर्क को कमजोर करने की नीति पर काम कर रहा है. ऐसे में यह हमला उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.

अब, अहम सवाल यह है कि ईरान के धार्मिक नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या किसने की. इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद ने या फिर उसकी सेना के सर्वोच्च कमांड इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IED) ने. ऐसे में सोशल मीडिया पर लोग यह जानना चाहते हैं कि मोसाद या आईडीडी क्या है, खामेनेई की हत्या में किसी भूमिका रही अहम. आइए, इस सवाल का जवाब समझें.

मोसाद क्या है और ऐसे ऑपरेशन में इसकी भूमिका कैसी होती है?

Mossad इजरायल की खुफिया एजेंसी है, जो दुनिया भर में सीक्रेट ऑपरेशन, निगरानी और टारगेटेड मिशन के लिए जानी जाती है. इतिहास में मोसाद पर कई हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन्स के आरोप/दावे रहे हैं. जैसे ईरान के परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या या गुप्त नेटवर्क को तोड़ना. ऐसे मिशन आमतौर पर गुप्त होते हैं, जिनमें सीधे सैन्य हमला नहीं बल्कि सटीक, सीमित और छिपे तरीके अपनाए जाते हैं.

IDF क्या है और यह कैसे काम करता है?

Israel Defense Forces यानी IDF इजरायल की आधिकारिक सेना है, जिसमें एयरफोर्स, नेवी और ग्राउंड फोर्स शामिल हैं. IDF का काम ओपन मिलिट्री ऑपरेशन जैसे एयरस्ट्राइक, मिसाइल अटैक या बॉर्डर एक्शन, को अंजाम देना होता है. यह सीधे युद्ध के मैदान में दिखता है, जबकि खुफिया एजेंसियां पर्दे के पीछे काम करती हैं.

खामनेई जैसे टॉप लीडर पर हमला करना इतना मुश्किल क्यों?

किसी भी देश के सर्वोच्च नेता पर हमला करना दुनिया के सबसे कठिन सैन्य/खुफिया मिशनों में गिना जाता है. खामनेई की सुरक्षा इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के जिम्मे थी, जो ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य इकाई है. इसमें क्लोज-प्रोटेक्शन यूनिट, बंकर सिस्टम, मोबाइल लोकेशन और इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा शामिल होती है. इसलिए सीधा सैन्य हमला (IDF मॉडल) लगभग असंभव और अत्यधिक जोखिम भरा होता है.

क्या मोसाद इस तरह का ऑपरेशन कर सकता है?

रक्षा जानकारों के मुताबिक मुताबिक, अगर कभी ऐसा टारगेटेड ऑपरेशन होता है, तो उसकी संभावना मोसाद जैसे नेटवर्क के जरिए ज्यादा मानी जाती है. वजह, मोसाद की ताकत covert infiltration (घुसपैठ), लोकल नेटवर्क और सटीक इंटेलिजेंस में है. ईरान के अंदर पहले भी संदिग्ध ऑपरेशन्स हुए हैं, जिनमें अंदरूनी मदद या गुप्त एजेंटों की भूमिका बताई जाती रही है.

IDF की भूमिका - सीधा हमला या सपोर्ट सिस्टम?

आईडीएफ की भूमिका आमतौर पर सपोर्ट या बैकअप की होती है. उदाहरण के तौर पर, अगर कोई बड़ा ऑपरेशन होता है, तो IDF एयरस्पेस कंट्रोल, ड्रोन सर्विलांस, या मिसाइल शील्ड एक्टिवेशन जैसे काम कर सकता है. लेकिन खामनेई जैसे हाई-वैल्यू टारगेट पर सीधे एयरस्ट्राइक करना, ईरान के साथ फुल-स्केल युद्ध को न्योता देना होगा.

क्या यह Psychological Warfare है?

मिडिल ईस्ट में सूचना युद्ध (information war) भी उतना ही अहम है जितना असली युद्ध. खामेनेई पर हमले जैसी खबरें विरोधी को मानसिक रूप से कमजोर करने, जनता में डर पैदा करने या अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने के लिए भी फैलाई जा सकती हैं. इस तरह के नैरेटिव से रणनीतिक बढ़त हासिल करने की कोशिश होती है.

मोसाद या IDF  कौन असली खिलाड़ी?

फिलहाल, खामेनेई की हत्या की जिम्मेदारी का क्रेडिट किसी एक एजेंसी को नहीं मिला है. अगर सैद्धांतिक रूप से देखा जाए, तो ऐसे मिशन में मोसाद की भूमिका ज्यादा संभावित मानी जाती है. जबकि IDF सपोर्टिंग या डिटरेंस रोल में रहता है. असल तस्वीर अक्सर परदे के पीछे छिपी होती है और यही मिडिल ईस्ट की रणनीतिक जंग की सबसे बड़ी सच्चाई है.

तो खामेनेई की ऐसे ही हुई हत्या?

इस सवाल के जवाब में रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल अमरदीप त्यागी का कहना है कि इस तरह के काम किसी एक एजेंसी द्वारा संभव नहीं है, लेकिन इसमें सबसे बड़ी भूमिका मोसाद की है. मोसाद ने इजरायली सरकार और आईडीएफ को इसकी सूचना दी. उसके आधार इजरायल और अमेरिकी सेना मिलकर मॉडर्न वारफेयर की रिएल टाइम स्ट्रेटजी के तह​त इस घटना को अंजाम दे दिया. आप कह सकते हैं कि IDF जो इजरायल की सैन्य ताकत का मुख्य आधार है, की भूमिका सीधे नहीं बल्कि सपोर्टिव है.

ईरान के किस एजेंसी ने की मौत की पुष्टि?

इजरायल अमेरिका के टारगेटेड हमले में 28 मार्च को मारे गए, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि हो गई है. अभी तक की मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को उनके ऑफिस कॉम्प्लेक्स को निशाना बनाते हुए करीब 30 मिसाइलों से बड़ा हमला किया गया था. उस वक्त खामनेई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक में मौजूद थे. इस हमले में उनके परिवार के कई सदस्य जैसे बेटी, दामाद, बहू और पोती के साथ-साथ लगभग 40 कमांडर्स के मारे जाने की भी खबर है.

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सबसे पहले देर रात इस कार्रवाई का संकेत दिया, जिसके कुछ समय बाद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी खामेनेई के मारे जाने का दावा किया. इसके बाद रविवार सुबह ईरान की सरकारी मीडिया एजेंसियों ‘तसनीम’ और ‘फार्स’ ने आधिकारिक तौर पर इस घटना की पुष्टि कर दी.

इस घटना के बाद पूरे ईरान में शोक की लहर है. सरकार ने 40 दिन के राष्ट्रीय शोक और 7 दिन की सार्वजनिक छुट्टी का ऐलान किया है. वहीं, इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प (IRGC) ने बयान जारी कर कहा कि देश ने अपना एक बड़ा और प्रभावशाली नेता खो दिया है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर गहरा दुख और आक्रोश दोनों है.

खामनेई की मौत मिडिल ईस्ट में बड़े युद्ध की शुरुआत बनेगी?

दुनिया के रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि यह घटना सिर्फ ईरान ही नहीं, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट की भू-राजनीति को झकझोर सकती है. अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच पहले से चल रहा तनाव अब खुले संघर्ष में बदल सकता है, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ने की आशंका है.

Similar News