ID बंद, नौकरी गई… टूट गई हिम्मत! आधार सेंटर से जुड़ी युवती ने उठाया खौफनाक कदम

उत्तराखंड में एक निजी कंपनी द्वारा अचानक आधार सेंटर की ऑपरेटर ID बंद किए जाने से एक युवती की नौकरी चली गई. बेरोजगारी, आर्थिक तंगी और मानसिक दबाव से टूट चुकी युवती ने आत्महत्या की कोशिश की. यह घटना डिजिटल इंडिया में कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की असुरक्षा और कंपनियों की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े करती है. सोशल मीडिया पर इसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है.;

( Image Source:  gajendra298singh )

बस एक क्लिक… और जिंदगी ठहर गई. उत्तराखंड के प्रतापनगर में जिस आधार सेंटर ने युवती को पहचान दी, उसी सिस्टम ने उसकी रोजी-रोटी छीन ली. निजी कंपनी ने बिना पूर्व सूचना ऑपरेटर ID बंद कर दी. न नौकरी बची, न भविष्य की कोई राह. आर्थिक तंगी, परिवार की जिम्मेदारियां और अनसुनी शिकायतों ने युवती को इस कदर तोड़ दिया कि उसने मौत को गले लगाने की कोशिश कर डाली. यह सिर्फ एक लड़की की कहानी नहीं, बल्कि उस सिस्टम का आईना है जहाँ डिजिटल फाइलें तो चलती हैं, लेकिन इंसानी जिंदगियां अक्सर नजरअंदाज हो जाती हैं.

क्या है पूरा मामला?

आधार सेवाओं से जुड़ी एक निजी कंपनी द्वारा अचानक आधार सेंटर की ऑपरेटर ID बंद कर दिए जाने से एक युवती की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हो गई. रोजगार छिनने और भविष्य अंधकार में जाने के डर से युवती इस कदर टूट गई कि उसने आत्महत्या करने की कोशिश कर डाली. घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई. लोग दहशत में हैं.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उत्तराखंड के प्रतापनगर की एक युवती सरिता थलवाल ने कथित उत्पीड़न और मानसिक तनाव से परेशान होकर किया जान देना का किया प्रयास. बताया जा रहा है कि कस्टमर डेटा लीक करने से इनकार करने पर कार्यदाता कंपनी ने प्रतापनगर में संचालित उनके आधार सेंटर की आईडी बंद कर दी, जिसके बाद वह लगातार तनाव में थीं. इस खबर की स्टेट मिरर पुष्टि नहीं करता.

घटना के बाद से सोशल मीडिया पर यह मसला छाया हुआ है. लोग सरिता के कथित उत्पीड़न का मुद्दा लगातार उठा रहे हैं, लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई अभी तक नहीं हो पाई है. फिलहाल, सरिता थलवाल एम्स ऋषिकेश में भर्ती हैं. डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है.

कार्रवाई की मांग

यह सिर्फ उतराखंड के एक बेटी की कहानी नहीं है. यह उस दबाव की तस्वीर है जो ईमानदारी से काम करने वालों पर बनाया जाता है. प्रशासन से मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए.

कैसे छीनी गई रोजी-रोटी?

पीड़िता पिछले कई वर्षों से आधार सेंटर पर ऑपरेटर के रूप में काम कर रही थी. इसी नौकरी से उसका घर-परिवार चलता था. आरोप है कि बिना किसी स्पष्ट कारण और पूर्व सूचना के कंपनी ने उसकी ऑपरेटर ID डी-एक्टिवेट कर दी, जिससे वह तुरंत बेरोजगार हो गई.

मानसिक दबाव और आर्थिक संकट

ID बंद होते ही युवती पर आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव हावी हो गया. परिवार का खर्च, कर्ज और भविष्य की चिंता उसे अंदर से तोड़ती चली गई. परिजनों का कहना है कि उसने कई बार कंपनी से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कहीं से कोई सुनवाई नहीं हुई.

आत्महत्या की कोशिश, बची जान

गंभीर तनाव में आकर युवती ने जानलेवा कदम उठाने की कोशिश की. गनीमत रही कि समय रहते परिजनों और पड़ोसियों को इसकी जानकारी मिल गई और उसे अस्पताल पहुंचाया गया। फिलहाल उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है.

कंपनी और सिस्टम पर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर निजी कंपनियों की मनमानी, कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की असुरक्षा और ‘डिजिटल इंडिया’ के जमीनी हालात पर सवाल खड़े कर दिए हैं. सवाल यह है कि क्या किसी की रोज़ी-रोटी छीनने से पहले जवाबदेही तय नहीं होनी चाहिए?

पुलिस जांच में जुटी

मामले की सूचना मिलते ही पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है. पुलिस का कहना है कि कंपनी की भूमिका, ID बंद करने के कारण और युवती के मानसिक हालात की हर एंगल से जांच की जा रही है.

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