पॉक्सो केस में गिरफ्तार हो सकते हैं शंकराचार्य? अविमुक्तेश्वरानंद बोले- झूठे हैं सभी आरोप, विपक्ष ने की निष्पक्ष जांच की मांग-Top Updates

प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर दर्ज पॉक्सो केस ने राजनीतिक और धार्मिक विवाद का रूप ले लिया है. शंकराचार्य ने आरोपों को साजिश बताया, जबकि सपा और कांग्रेस सहित कई नेताओं ने निष्पक्ष जांच की मांग की है. पुलिस जांच जारी है.

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

(Image Source:  ANI )
By :  अच्‍युत कुमार द्विवेदी
Updated On : 23 Feb 2026 10:11 PM IST

Shankaracharya Avimukteshwaranand POCSO case Prayagraj: प्रयागराज में वेदपाठी बटुकों के कथित यौन शोषण मामले में आरोपी बनाए गए ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सोमवार को मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा. उन्होंने यूपी पुलिस की जांच पर अविश्वास जताते हुए मांग की कि किसी गैर-भाजपा शासित राज्य की पुलिस इस मामले की जांच करे. उनका यह भी कहना है कि वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे, लेकिन यह कार्रवाई उन्हें अपमानित करने का 'कुत्सित प्रयास' है.

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद  ने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि शिकायत करने वाले बच्चे न तो उनके विद्यार्थी हैं और न ही कभी उनके शिविर में रहे.  शंकराचार्य ने जांच पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक साजिश बताया और निष्पक्ष एजेंसी से जांच की मांग की. उनका कहना है कि आरोप लगाने वाले बच्चों का उनके आश्रम या शिविर से कोई संबंध नहीं रहा, इसलिए केस संदिग्ध है.

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने क्या कहा?

  • स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सनातन परंपरा का हवाला देते हुए कहा कि कालनेमि, राहु और रावण जैसे छद्म वेशी हमेशा से रहे हैं और उनका पर्दाफाश होकर रहेगा. उन्होंने कहा कि यदि गिरफ्तारी की नौबत आती है, तो यह शंकराचार्य संस्था को नीचा दिखाने की कोशिश होगी.  उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गौ-संरक्षण की उनकी मांग से केंद्र और राज्य सरकारें विचलित हैं और इसी वजह से इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं. 
  • आरोपों को खारिज करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि मौनी अमावस्या के बाद से वे लगातार सीसीटीवी और मीडिया की निगरानी में थे. उन्होंने सवाल किया कि जो बच्चे कभी आश्रम का हिस्सा नहीं रहे, वे अचानक कहां से आए. उन्होंने इसे शंकराचार्य पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला षड्यंत्र बताते हुए कहा कि सच जल्द सामने आएगा.
  • शंकराचार्य ने कहा कि मठ के दरवाजे पुलिस के लिए खुले हैं. वे जांच में सहयोग करेंगे, जबकि उनकी लीगल टीम अग्रिम जमानत पर विचार कर रही है.:
  • स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा, "अगर पुलिस हमें अरेस्ट करने के लिए एक्शन भी लेती है, तो भी हम उनका विरोध नहीं करेंगे. हम कोऑपरेट करेंगे. जनता सब देख रही है... झूठ आखिरकार सामने आ ही जाता है. कहानी झूठी साबित होगी, आज नहीं तो कल, कल नहीं तो परसों. हम आपके कैमरों की पहुंच में थे. प्रयागराज में हर जगह CCTV कैमरे लगे हैं... उन्होंने उन्हें हर जगह इसलिए लगाया था, ताकि अगर कुछ भी हो, तो वे वॉर रूम से मॉनिटर कर सकें और उनके पास सब कुछ रिकॉर्ड हो जाए.
  • अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि हमारी बस हमारे कैंप के अंदर पार्क नहीं थी, क्योंकि हमारे साथ पुलिस की बेरहमी के बाद, हम कैंप में नहीं घुसे थे... तो इस स्थिति में, सब कुछ CCTV में कैप्चर हो गया है... वे लड़के कभी हमारे गुरुकुल में नहीं घुसे, कभी पढ़े नहीं, और हमारा उनसे कोई लेना-देना नहीं है. वे हरदोई के एक स्कूल के स्टूडेंट हैं, जैसा कि केस में जमा की गई उनकी मार्कशीट से पता चलता है. तो, जब वे कभी यहां आए ही नहीं और उनका इस जगह से कोई लेना-देना नहीं है, तो कोई उनका कुछ कैसे कर सकता है?
  • शंकराचार्य ने कहा कि वे यह कहकर कन्फ्यूजन फैला रहे हैं कि एक CD है ... तो क्यों इसे पब्लिक नहीं किया जा रहा है?  ये सभी सवाल आने वाले दिनों में पूछे जाएंगे, और उन्हें इनका जवाब देना होगा... जनता को समझना चाहिए कि कुछ लोग चोगा पहनकर सनातन धर्म को खत्म करने आए हैं. वे खुद को हिंदू कह रहे हैं. वे हिंदुओं के खिलाफ काम कर रहे हैं लेकिन वे खुद को हिंदू साबित करके ऐसा कर रहे हैं."

मामले में अब तक क्या-क्या हुआ?

  • पुलिस ने मामले की जांच के लिए डीसीपी मनीष कुमार शांडिल्य के नेतृत्व में 5 सदस्यीय स्पेशल टीम गठित की है. टीम पीड़ित बच्चों की तलाश कर मेडिकल और बयान दर्ज करने की प्रक्रिया में जुटी है.
  • जांच अब हरदोई तक पहुंच गई, जहां पुलिस टीम पीड़ित परिवार के बयान लेने गई है. पिता ने बताया कि उनका बेटा एक व्यक्ति के साथ प्रयागराज गया था और आधार कार्ड लिया गया था. उन्होंने कहा कि बेटे ने किसी घटना का जिक्र नहीं किया और परिवार डरा हुआ है.
  • जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती ने कहा कि धर्म की ही सदा जीत होती है. राजनीति के चक्कर में योगी जी ये बात भूल रहे हैं.
  • समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने मोहाली में बयान देते हुए कहा कि शंकराचार्य के खिलाफ झूठा केस दर्ज किया गया है. उन्होंने बीजेपी पर हमला करते हुए कहा कि धर्म के सबसे पूज्य पद के साथ अपमानजनक व्यवहार हुआ.
  • अखिलेश ने यह भी कहा कि भगवाधारी मुख्यमंत्री के रहते शंकराचार्य को स्नान से रोकना गंभीर मामला है. इससे सरकार की मंशा पर सवाल उठते हैं. 
  • यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग की. उन्होंने कहा कि पॉक्सो केस से राजनीतिक प्रतिशोध की बू आती है. अजय का कहना है कि यह कार्रवाई तब हुई जब शंकराचार्य ने कुंभ मेले की अव्यवस्थाओं पर सवाल उठाए थे.
  • पुलिस शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज के साथ माघ मेला क्षेत्र पहुंची और शिविर स्थल का निरीक्षण किया. आने-जाने के रास्तों और आसपास के इलाके का नक्शा तैयार किया गया. 
  • बताया गया कि 24 जनवरी को शिकायत दी गई थी, जिसके बाद 8 फरवरी को विशेष पॉक्सो कोर्ट में केस दायर हुआ और 21 फरवरी को बच्चों के बयान दर्ज होने के बाद FIR दर्ज की गई.
  • सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने शंकराचार्य से मुलाकात कर समर्थन जताया और कहा कि सनातन के नाम पर राजनीति करने वाली ताकतें ही उसे कमजोर कर रही हैं. उन्होंने कहा कि मठ और काशी से जुड़े लोग श्रद्धापूर्वक शंकराचार्य के साथ खड़े हैं.
  • कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी मामले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि शंकराचार्य जैसे पद पर आरोप गंभीर चिंता का विषय हैं. उन्होंने सवाल किया कि सनातन की बात करने वाले लोग इस मामले पर चुप क्यों हैं.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े हालिया विवाद कौन-कौन से हैं?

  • यौन शोषण के आरोप और FIR का आदेश (फरवरी 2026): प्रयागराज की एक विशेष पॉक्सो (POCSO) कोर्ट ने 21 फरवरी 2026 को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरि के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया.  उन पर आरोप है कि उन्होंने माघ मेले और महाकुंभ 2025 के दौरान अपने आश्रम में नाबालिग बच्चों का यौन शोषण किया.  कोर्ट के आदेश के बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में मामला दर्ज किया गया है. ताजा रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस पूछताछ के लिए वाराणसी पहुंच सकती है. शंकराचार्य  ने इन आरोपों को 'निराधार' और 'साजिश' करार दिया है. उनका कहना है कि शिकायतकर्ता एक 'हिस्ट्रीशीटर' है और यह मामला उन्हें और उनकी संस्था को बदनाम करने के लिए रचा गया है. उन्होंने यह भी कहा कि यदि पुलिस उन्हें गिरफ्तार करना चाहती है, तो वे इसका विरोध नहीं करेंगे.
  • राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का बहिष्कार (जनवरी 2024): अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शामिल नहीं हुए थे. उनका तर्क था कि मंदिर अभी अधूरा है और अधूरे मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा करना शास्त्रों के विरुद्ध है. 
  • नियुक्ति पर कानूनी रोक (अक्टूबर 2022): स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शंकराचार्य बनने की प्रक्रिया भी विवादों में रही है. सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य के रूप में उनके पट्टाभिषेक (coronation) पर रोक लगा दी थी. 
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