संवेदनशील संभल में CJM के तूफानी ट्रांसफर मामले में दाल में ‘काला’ तो चलेगा, बस पूरी दाल ही कहीं ‘काली’ न हो!

संवेदनशील संभल में महज कुछ ही दिनों के भीतर तीन-तीन मुख्य न्यायिक दंडाधिकारियों (CJM) के ताबड़तोड़ तबादलों ने न्यायिक व्यवस्था की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. यह पूरा विवाद उस वक्त शुरू हुआ, जब तत्कालीन CJM विभांशु सुधीर ने चर्चित पुलिस उपाधीक्षक अनुज चौधरी समेत कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया और इसके तुरंत बाद उनका रातों-रात ट्रांसफर कर दिया गया. इसके बाद नए CJM की भी चंद घंटों-दिनों में अदला-बदली ने शक को और गहरा कर दिया. सवाल यही है, दाल में थोड़ा काला है या पूरी दाल ही काली है?;

संभल सीजेएम के ताबड़तोड़ ट्रांसफर पर उठे कई सवाल

By :  संजीव चौहान
Updated On : 23 Jan 2026 8:18 PM IST

Sambhal CJM transfer controversy:  उत्तर प्रदेश के संवेदनशील जिलों में आने वाले संभल में चंद दिन के भीतर एक के बाद एक ताबड़तोड़ कहिए या फिर तूफानी गति से तीन-तीन मुख्य न्यायायिक दण्डाधिकारियों (CJM) के ट्रांसफर पर जितने मुंह उतनी बातें हो रही हैं. इस तमाशे के पीछे कोई तो उत्तर प्रदेश के चर्चित पुलिस उपाधीक्षक अनुज चौधरी एंड कंपनी (इंस्पेक्टर अनुज तोमर व 10-15 अन्य मातहत पुलिकर्मी) के खिलाफ पूर्व सीजेएम द्वारा मुकदमा दर्ज किए जाने के आदेश देना, असल रार की जड़ मान रहे हैं. वहीं, एक धड़ा इसे न्यायायिक सेवा में नियमित स्थानान्तरण प्रक्रिया का हिस्सा मान रहा है.

संभल के वकील इस 'ट्रांसफर-ट्रांसफर' के खेल को लेकर रोजाना हंगामा बरपाए हुए हैं. तो वहीं दूसरी उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी की हुकूमत को फूटी आंख न सुहाने वाले विरोधी राजनीतिक दल समाजवादी पार्टी प्रमुख और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री इस मुद्दे को मौका लगे हाथों-हाथ बहती गंगा में हाथ धोकर 'कैश' करा डालने की जिद पर आमादा नजर आ रहे है. इस तर्क या कहिए उलाहने के साथ कि सत्य ट्रांसफर नहीं हो सकता. 

क्लेश की शुरूआत ऐसे हुई

दरअसल, इस रार की शुरूआत तब हुई, जब 20 जनवरी 2026 को रात के वक्त अचानक ही यहां पहले से तैनात मुख्य न्यायायिक दंडाधिकारी विभांशु सुधीर को स्थानांतरित कर दिया गया. ठीक उस फैसले या कहिए आदेश के बाद जिसमें उन्होंने सूबे की पुलिस के हाईप्रोफाइल पुलिस उपाधीक्षक अनुज चौधरी सहित इंस्पेक्टर अनुज तोमर व अन्य 10-15 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाने का आदेश दे दिया था. मतलब जैसे ही सीजेएम विभांशु सुधीर ने पुलिस पार्टी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया, वैसे ही एक धड़े ने मान लिया कि यह ट्रांसफर आदेश दबाव की राजनीतिक के तहत जबरिया करवाया गया है, क्योंकि मुकदमा सूबे की हुकूमत के करीबी किसी पुलिस उपाधीक्षक के खिलाफ दर्ज कराने के आदेश सीजेएम ने किये थे.

सीजेएम की ताबड़तोड़ अदला-बदली

सीजेएम विभांशु सुधीर का तबादला संभल से सुलतानपुर किए जाने के बाद उनकी जगह आदित्य सिंह को लाया गया था. खबरों के मुताबिक, विभांशु सुधीर के 12 साल के करियर में अब तक उनके 8 ट्रांसफर हो चुके हैं. इनकी जगह पर सीनियर डिवीजन जज से मुख्य न्यायायिक दंडाधिकारी संभल आदित्य सिंह बना दिए गए. जब तक आदित्य सिंह सीजेएम की हैसियत से अपने न्यायालय को देख-समझ पाते, उससे पहले ही गुरुवार (22 जनवरी 2026) की रात इलाहाबाद उच्च न्यायालय से एक और ट्रांसफर आदेश आ गया, जिसमें आदित्य सिंह को भी हटाकर उनकी जगह पर दीपक कुमार जायसवाल को सीजेएम बना दिया गया. मतलब, तीन चार दिन के अंदर संभल जैसी छोटे मगर बेहद संवेदनशील स्थान पर तीन-तीन सीजेएम इधर से उधर घुमा डाले गए. न्यायायिक, विभागीय प्रशासन में नियमित फेर-बदल का हवाला देकर.

समस्या यहां भी मुंह बाए खड़ी

चंद घंटों के लिए सीनियर डिवीजन जज से संभल के मुख्य न्यायायिक दंडाधिकारी बनाए गए आदित्य सिंह को हटाकर उनके पुराने स्थान-पद पर वापिस भेज दिया गया. उनकी जगह तीसरे नंबर पर जो सीजेएम संभल बनाए गए, उनका नाम दीपक कुमार जायसवाल है. इन तमाम गरम चर्चाओं के बीच नव-नियुक्त सीजेएम दीपक कुमार जायसवाल को लेकर बताया जाता है कि वह यूपी के महाराजगंज जिले के मूल निवासी है और बीते 11 साल के न्यायायिक सेवा काल में उनके करीब 16 विभागीय तबादले हो चुके हैं.

दाल में काला चलेगा... पूरी दाल तो काली नहीं?

जब देश की हजारों अदालतों में जजों की कमी और मुकदमों की बहुतायत के चलते लाखों-करोड़ों मुकदमे अदालतों की अलमारियों में बंद पड़े धूल फांक रहे हैं, तब फिर दो तीन दिन में किसी संभल जैसी छोटी सी मगर बेहद संवेदनशील जगह में एक के बाद एक तीन तीन सीजेएम की इधर से उधर उठा-पटक क्या न्यायायिक सेवकों के मनोबल को नहीं तोड़ेगी? क्या इससे न्यायायिक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा? आदि आदि सवालों के बारे में पूछे जाने पर सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के नई दिल्ली में मौजूद वरिष्ठ फौजदारी वकील डॉ. ए पी सिंह से स्टेट मिरर हिंदी के एडिटर क्राइम इनवेस्टीगेशन ने एक्सक्लूसिव बात की. उन्होंने कहा कि दाल में काला तो चल सकता है, मगर पूरी दाल ही काली हो तो भला कौन कैसे नजरंदाज कर सकेगा.”

हर मामले को अलग पैनी नजर से देखो

डॉ. ए पी सिंह ने कहा, “देखिए संभल में सीजेएम ट्रांसफर को लेकर जो बवाल मचा है, उसे एक नहीं, कई पहलुओं कई नजर से देखा जाए. इस तरह से जल्दी-जल्दी ट्रांसफर होने से जजों के दिमाग में यह भय बना रहता है कि वे ही भगवान नहीं है. अगर कुछ गलत करेंगे तो उन्हें कभी भी उनकी मौजूदा तैनाती से बदला जा सकता है. दूसरे, इसका दुष्परिणाम यह है कि 2-3 दिन में जजों का ट्रांसफर न्यायायिक सेवा व्यवस्था का मखौल भी उड़ा सकता है. अगर इसके पीछे किसी का कोई निजी स्वार्थ निहित हो. मसलन, संभल में एक के बाद एक सीजेएम के ट्रांसफर की बात करूं तो, अगर किसी पुलिस अफसर या पुलिस टीम के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश करने वाले विभांशु सुधीर को पद से इसलिए रातों-रात हटाया गया कि उन्होंने सत्ता के करीबी किसी पुलिस अफसर या अफसरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया, तो यह न्यायायिक सेवा व्यवस्था की हत्या है. जो कदापि कोई बर्दाश्त नहीं करेगा. शायद इस सबके बीच संभल कोर्ट के वकील जिस तरह से धरना-विरोध प्रदर्शन वहां कर रहे हैं, तो उन्हें अंदरखाने की सब हकीकत मालूम पड़ चुकी होगी. इसीलिए वे लोग कामकाज ठप्प करने पर उतारू हैं.”

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