13 साल से कोमा में, अब दी जा रही आखिरी विदाई; Harish Rana के वीडियो ने सबको रुला दिया

गाजियाबाद के हरीश राणा, जो 13 साल से कोमा जैसी स्थिति में थे, अब सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद पैसिव यूथेनेशिया प्रक्रिया से गुजर रहे हैं. एम्स में उनके जीवनरक्षक उपकरण हटाए जा रहे हैं. उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसने लोगों को भावुक कर दिया है.

हरीश राणा का आखिरी वीडियो वायरल

(Image Source:  X/@SachinGuptaUP/@awais__usmani )
Edited By :  अच्‍युत कुमार द्विवेदी
Updated On : 15 March 2026 10:54 PM IST

कभी-कभी जिंदगी ऐसी परीक्षा लेती है, जिसकी कल्पना भी कोई नहीं कर सकता. Harish Rana की कहानी भी कुछ ऐसी ही है-दर्द, इंतजार और उम्मीद के लंबे सफर की कहानी. लगभग 13 साल तक बिस्तर पर अचेत पड़े रहने के बाद अब उनके जीवन का अंतिम अध्याय लिखा जा रहा है. गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा को हाल ही में उनके घर से All India Institute of Medical Sciences, New Delhi ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की एक विशेष टीम Supreme Court of India के आदेश के अनुसार पैसिव यूथेनेशिया की प्रक्रिया पूरी कर रही है.

डॉक्टरों के मुताबिक, हरीश राणा के ठीक होने की कोई उम्मीद नहीं बची थी. इसलिए अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर जीवनरक्षक उपकरण हटाने की अनुमति दे दी.

13 साल पहले कैसे बदली जिंदगी?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 13 साल पहले जब हरीश पढ़ाई के लिए Chandigarh में थे, तब एक हादसे में वह हॉस्टल की इमारत से गिर गए. इस दुर्घटना में उनके सिर में गंभीर चोट लगी और वह कोमा जैसी हालत में चले गए. उस दिन के बाद से उनकी जिंदगी जैसे रुक गई. मशीनों के सहारे चलती सांसें और बिस्तर पर बीतते दिन-महीने-साल… परिवार ने उम्मीद नहीं छोड़ी और पूरे समर्पण के साथ उनकी देखभाल की, लेकिन समय के साथ डॉक्टरों ने साफ कहा कि अब उनके ठीक होने की संभावना लगभग खत्म हो चुकी है. आखिरकार परिवार ने भारी मन से अदालत का दरवाजा खटखटाया और इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी.

क्या होती है पैसिव यूथेनेशिया?

इच्छामृत्यु यानी पैसिव यूथेनेशिया उस स्थिति को कहा जाता है, जब किसी गंभीर और असाध्य बीमारी से जूझ रहे मरीज को असहनीय पीड़ा से राहत देने के लिए जीवनरक्षक उपचार वापस ले लिया जाता है. इसमें पैसिव यूथेनेशिया का मतलब होता है कि मरीज के लाइफ सपोर्ट सिस्टम को धीरे-धीरे हटाया जाए और उसे प्राकृतिक रूप से जीवन के अंतिम पड़ाव तक जाने दिया जाए.

22 सेकेंड का वीडियो जिसने सबको रुला दिया

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ लगभग 22 सेकेंड का एक वीडियो लोगों की आंखें नम कर रहा है. इस वीडियो में हरीश राणा बिस्तर पर लेटे नजर आते हैं. उनकी नजरें ऊपर की ओर टिकी हैं- मानो बहुत दूर कहीं देख रही हों. आंखों में गहरा दर्द भी है और एक अजीब-सी शांति भी. 

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वीडियो में एक महिला उनके माथे पर चंदन का तिलक लगाती है. वह उनके सिर पर हाथ फेरते हुए धीमी आवाज में कहती हैं- “सबको माफ करते हुए… सबसे माफी मांगते हुए अब जाओ…” यह शब्द सुनकर ऐसा लगता है जैसे 13 साल का दर्द, इंतजार और बेबसी एक पल में सामने आ जाती हो. इस नजारे ने सोशल मीडिया पर लाखों लोगों को भावुक कर दिया है.

परिवार ने निभाया हर फर्ज

इन 13 सालों में हरीश का परिवार उनके साथ चट्टान की तरह खड़ा रहा. हर दिन, हर रात… उम्मीद की एक छोटी-सी किरण के साथ... लेकिन जब डॉक्टरों ने साफ कहा कि अब कोई उम्मीद नहीं बची, तब परिवार ने बेहद कठिन फैसला लिया- ऐसा फैसला जिसे लेना किसी भी अपने के लिए आसान नहीं होता. अब अदालत की अनुमति के बाद हरीश को उस दर्द से मुक्ति मिलने वाली है, जिसे उन्होंने 13 साल तक सहा. उनकी कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं है- यह दर्द, उम्मीद, परिवार के प्यार और जीवन की कठोर सच्चाई की कहानी है.

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