पहली मुलाकात में ही अपर्णा पर दिल हार बैठे थे प्रतीक, एक-दूसरे को लिखते थे डिजिटल 'लव लेटर'; 11 साल बाद हुई शादी
प्रतीक यादव और अपर्णा यादव की प्रेम कहानी राजनीति और निजी जीवन के मेल की दिलचस्प मिसाल है. दोनों की पहली मुलाकात साल 2001 में लखनऊ के एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में हुई थी, जहां अपर्णा मंच पर गाना गा रही थीं और प्रतीक उनसे प्रभावित हुए. इसके बाद ईमेल के जरिए बातचीत शुरू हुई और यह दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई. करीब एक दशक तक चले इस रिश्ते के बाद 2011 में परिवारों की सहमति से शादी तय हुई. साल 2012 में सैफई में हुई भव्य शादी ने इस लव स्टोरी को सार्वजनिक पहचान दी. यह कहानी भरोसे, इंतज़ार और भावनाओं की है, जो लंबे समय तक निजी रही, लेकिन बाद में राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं का हिस्सा बन गई.;
प्रतीक यादव और अपर्णा यादव की लव स्टोरी कभी सैफई की गलियों में फुसफुसाती एक निजी कहानी थी, लेकिन अब वही कहानी सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में खुलकर गूंज रही है. यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सौतेले भाई प्रतीक यादव ने एक इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए तलाक का ऐलान कर इस रिश्ते की दरार को सार्वजनिक कर दिया. पोस्ट में लगाए गए आरोपों ने न सिर्फ परिवार को, बल्कि राजनीति को भी झकझोर दिया.
इस अचानक आए मोड़ ने कई सवाल खड़े कर दिए कि क्या यह टूटन रातों-रात आई? या फिर बरसों से भीतर ही भीतर चल रही खींचतान अब बाहर आ गई? रिश्ते, महत्वाकांक्षा और राजनीति तीनों की परतें इस कहानी में एक-दूसरे से उलझी दिखती हैं.
सोशल मीडिया पर किया पोस्ट
बताया जा रहा है कि प्रतीक इस वक्त देश से बाहर हैं और वहीं से उन्होंने यह पोस्ट शेयर की. आरोपों में उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य का हवाला दिया और कहा कि अपर्णा की प्राथमिकताएं अलग रहीं. हालांकि, इन दावों पर न तो अपर्णा की ओर से और न ही परिवार की तरफ से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया आई है. राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि पहले भी ऐसा पोस्ट आया था, जिसे दबाव के बाद हटवा दिया गया था. इस बार पोस्ट डिलीट न होना कई कयासों को जन्म दे रहा है. कुछ लोग अकाउंट हैक होने की बात कर रहे हैं, तो कुछ इसे लंबे समय से जमा तनाव का विस्फोट मानते हैं.
कैसे हुई दोनों की मुलाकात?
प्रतीक यादव और अपर्णा यादव की प्रेम कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं मानी जाती. इसकी शुरुआत साल 2001 में लखनऊ के एक सांस्कृतिक कार्यक्रम से हुई, जहां मंच पर गाना गा रहीं अपर्णा ने पहली बार प्रतीक का ध्यान खींचा. उस वक्त दोनों बेहद कम उम्र के थे, लेकिन पहली मुलाकात ने एक गहरी छाप छोड़ दी. भीड़, संगीत और तालियों के बीच शुरू हुआ यह आकर्षण धीरे-धीरे एक खामोश जुड़ाव में बदल गया, जिसे दोनों ने लंबे समय तक निजी रखा.
ईमेल से शुरू हुई बातचीत
कुछ समय बाद एक पारिवारिक वैवाहिक समारोह में दोनों की फिर मुलाकात हुई. यहीं से बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ा और ईमेल के जरिए संपर्क बना. उस दौर में मोबाइल और सोशल मीडिया आम नहीं थे, इसलिए ईमेल ही उनके रिश्ते का पुल बना. घंटों लिखे जाने वाले मेल, एक-दूसरे को समझने की कोशिश और भावनाओं का आदान-प्रदान. यहीं पर यह दोस्ती प्यार में बदल गई. करीबी लोगों के मुताबिक, प्रतीक ने अपने दिल की बात भी ईमेल के जरिए ही अपर्णा से कही थी.
10 साल बाद तय हुई शादी
करीब एक दशक तक चला यह रिश्ता धीरे-धीरे परिवारों तक पहुंचा. दोनों के रिश्ते में धैर्य और इंतज़ार की अहम भूमिका रही. आखिरकार 2011 में परिवारों की सहमति बनी और शादी तय हुई. राजनीतिक पृष्ठभूमि से जुड़े इस परिवार में यह रिश्ता सिर्फ दो लोगों का नहीं, बल्कि दो सोच और दो दुनिया का मिलन माना गया. अपर्णा की कला और महत्वाकांक्षा और प्रतीक का शांत, निजी स्वभाव दोनों एक-दूसरे के बिल्कुल उलट थे, लेकिन शायद यही आकर्षण की वजह भी थी.
सैफई में एक हुए दोनों
साल 2012 में सैफई में हुई भव्य शादी ने इस प्रेम कहानी को सार्वजनिक पहचान दी. यह शादी समाजवादी परिवार की एकजुटता और पारिवारिक खुशी का प्रतीक बनी. उस वक्त माना जाता था कि यह रिश्ता समय की कसौटी पर खरा उतरेगा. प्यार, भरोसा और लंबे इंतज़ार से शुरू हुई यह लव स्टोरी उम्मीदों से भरी थी. एक ऐसी कहानी, जो कभी बेहद निजी थी, लेकिन बाद में सार्वजनिक जीवन की जटिलताओं से जुड़ती चली गई.
राजनीति में अपर्णा की एंट्री
शादी के बाद अपर्णा की महत्वाकांक्षा राजनीति की ओर बढ़ी. 2017 में उन्होंने सपा के टिकट पर लखनऊ कैंट से चुनाव लड़ा, लेकिन हार का सामना करना पड़ा. 2022 में टिकट न मिलने के बाद उन्होंने भाजपा जॉइन कर ली. यही वह मोड़ था, जिसने रिश्तों और समीकरणों को बदलना शुरू किया.
पिता के निधन के बाद प्रतीक हुए खामोश
प्रतीक यादव हमेशा से लाइमलाइट से दूर रहने वाले व्यक्ति रहे हैं. राजनीति से दूरी, किसी पद की महत्वाकांक्षा नहीं उनकी पहचान बॉडी बिल्डिंग और फिटनेस तक सीमित रही. गोमतीनगर में जिम और सोशल मीडिया पर फिटनेस पोस्ट्स यही उनका सार्वजनिक चेहरा रहा. अक्टूबर 2022 में मुलायम सिंह के निधन के बाद प्रतीक और ज्यादा खामोश हो गए. अब सोशल मीडिया पर आया यह पोस्ट उनकी अब तक की चुप्पी को तोड़ता दिखा लेकिन इसके साथ ही निजी जीवन को सार्वजनिक बहस में भी ले आया.