डॉग के काटने के 4 महीने बाद कुत्ते की तरह भौंकने लगा नाबालिग, 49 सेकेंड के इस वीडियो को देखकर उड़ जाएंगे आपके होश
कुत्ते के काटने के चार महीने बाद एक नाबालिग की हालत अचानक ऐसी हो गई कि परिवार के होश उड़ गए. बताया जा रहा है कि बच्चा अजीब हरकत करने लगा और कुत्ते की तरह भौंकने लगा. इस घटना का 49 सेकेंड का वीडियो सामने आने के बाद लोग भी हैरान रह गए.
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के एक छोटे से गांव में एक हैरान करने वाली घटना घटी, जहां कुत्ते के काटने के करीब चार महीने बाद एक नाबालिग बच्चे का बर्ताव अचानक बदलने लगा. बताया जा रहा है कि बच्चा अजीब हरकतें करने लगा और कुत्ते की तरह भौंकने लगा. परिवार के लिए यह सब इतना डरावना था कि शुरुआत में किसी को समझ ही नहीं आया कि आखिर बच्चे के साथ क्या हो रहा है.
बच्चे के पिता ने जब उसे इस हालत में देखा तो वह घबरा गए. उन्हें लगा कि शायद उनके बेटे पर किसी भूत-प्रेत का साया हो गया है. सोशल मीडिया पर बच्चे का एक वीडियो वायरल भी हो रहा है, जिसमें वह कुत्ते की तरह भौंकता हुआ दिख रहा है. अब इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं और लोग जानना चाहते हैं कि आखिर इसके पीछे की असली वजह क्या है.
कब हुई थी घटना?
यह मामला मिर्जापुर के जोगीपुरवा गांव का है, जहां रहने वाला 17 साल का करन करीब चार महीने पहले अपनी नानी के घर गया था. एक दिन लड़के को कुत्ते ने काट लिया और वह सिर्फ दो ही इंजेक्शन लगवा पाया और बाकि के डोज पूरे नहीं हो पाए.
पिता ने क्या बताया?
घटना के चार महीने बाद लड़का अचानक से कुत्तों की तरह भौंकने लगा. उसकी आवाज पूरी तरह से बदल गई. फिर बच्चे को चक्कर आने लगे. इस पर उसके पिता को लगा कि कहीं उस पर भूत का साया तो नहीं है और वह डर गए और हनुमान मंदिर लेकर गए. वहां भी लड़का लगातार कुत्ते जैसी आवाजें निकाल रहा था. फिर मंदिर से अस्पताल ले जाया गया. जहां डॉक्टर ने बताया कि इंजेक्शन का पूरा डोज न लगाने के कारण यह समस्या हुई है.
क्या है रेबीज?
डॉक्टरों की जांच में सामने आया कि करण रेबीज इंफेक्शन हो गया है. समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण यह वायरस उसके नर्वस सिस्टम पर गंभीर असर डाल चुका था. रेबीज में मरीज की सांस की नली में सिकुड़न पैदा होने लगती है. इसके कारण आवाज असामान्य हो जाती है और कई बार भौंकने जैसी सुनाई देने लगती है.साथ ही मरीज को पानी देखकर भी घबराहट होने लगती है.
क्या रेबीज की बीमारी हो सकती है ठीक?
डॉक्टर का कहना है कि यदि बीमारी इस कंडीशन तक पहुंच जाए, तो इलाज की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है. यानी ठीक होने की चांसेस न के बराबर हो जाते हैं.