'हाथ पैर कांपने लगे थे, शिवम को दौरा पड़ गया था'; कानपुर लैंबॉर्गिनी के ड्राइवर मोहन ने क्या-क्या बताया? VIDEO

कानपुर में करोड़ों की लेंबोर्गिनी से हुए हादसे में ड्राइवर मोहन ने कोर्ट में सरेंडर कर खुद को चालक बताया है. पुलिस और परिवार के दावों के बीच अब जांच तय करेगी कि हादसे के वक्त गाड़ी कौन चला रहा था.;

By :  सागर द्विवेदी
Updated On : 11 Feb 2026 4:27 PM IST

उत्तर प्रदेश के कानपुर की VIP रोड पर हुई करोड़ों की लेंबोर्गिनी से जुड़ी टक्कर अब सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं रह गई है, बल्कि यह मामला सियासत, रसूख और कानून व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है. तंबाकू कारोबारी के बेटे शिवम मिश्रा की लग्जरी कार से हुए इस हादसे में अब नया मोड़ तब आया जब ड्राइवर मोहन ने कोर्ट में सरेंडर कर दावा किया कि गाड़ी वही चला रहा था.

इस दावे ने पूरे केस की दिशा बदल दी है. एक तरफ परिवार मिर्गी के दौरे की थ्योरी पेश कर रहा है, तो दूसरी ओर पुलिस सीसीटीवी और चश्मदीदों के हवाले से शिवम मिश्रा को ही ड्राइवर बता रही है. ऐसे में सच क्या है, यह जांच का सबसे बड़ा सवाल बन गया है.

कानपुर के चर्चित लैंबॉर्गिनी कांड में सुनवाई के दौरान बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. कोर्ट ने मोहन को ड्राइवर मानने से इनकार कर दिया है और उसकी सरेंडर अर्जी खारिज कर दी है. वहीं पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि हादसे के वक्त गाड़ी शिवम मिश्रा चला रहे थे. इस फैसले के बाद मामले ने नया कानूनी मोड़ ले लिया है और अब जांच की दिशा पूरी तरह शिवम मिश्रा की भूमिका पर केंद्रित होती नजर आ रही है.

मोहन ने क्या-क्या किया दावा?

दावा किया कि उस वक्त वो गाड़ी चला रहा था और मालिक शिवम मिश्रा बगल में बैठे थे. आगे दावा किया था कि शिवम कौ दौरा पड़ गया था. हाथ पैर कांपने लगे थे और मेरी तरफ वो गिर गए थे. आगे जब उनसे पूछा गया कि अब तुम्हारे मालिक कहां है तो बताया कि मुझे नहीं पता. आगे पूछा गया कि जब एक्सीडेट हुआ तो कहां चले गए थे तो बताया कि मैं वहीं था जब आगे पूछा गया कि अभी तक तुम सामने क्यों नहीं आए तो आगे बताया कि मैं लगातार सामने आया हूं, गाड़ी का सीसा तोड़े तो किसने निकलवाया था तो आगे बताया कि बाउंसर ने निकाला था आगे कहा कि राइट साइड का सीसा टूटा है.

क्या मोहन ही चला रहा था गाड़ी?

ड्राइवर मोहन ने मीडिया से बातचीत में साफ कहा, जब हादसा हुआ तब गाड़ी मैं चला रहा था. अचानक उन्हें दौरा पड़ गया.” उसने हादसे का पूरा घटनाक्रम बताते हुए कहा कि 'गाड़ी धीरे-धीरे चल रही थी और वह मुझ पर गिर पड़े. मैं बहुत घबरा गया था. मैं एक हाथ से उन्हें संभाले हुए था. तभी गाड़ी ने एक थ्री-व्हीलर को टक्कर मारी, डिवाइडर पर चढ़ गई और फिर रुक गई.'

मोहन के मुताबिक, वह एक साथ गाड़ी भी संभाल रहा था और शिवम को भी थामे हुए था. उसने आगे बताया, 'मैं गाड़ी से उतरा और उन्हें ड्राइवर की सीट पर खींचकर बैठाया, फिर बाहर आया. जब पुलिस पहुंची, तब मैं बाहर खड़ा था. जब शीशा तोड़ा गया, तब मैं नीचे की तरफ से बाहर निकला.' कोर्ट में सरेंडर के दौरान भी उसने यही कहानी दोहराई. उसका कहना था कि हादसे के वक्त शिवम को दौरा पड़ा, हाथ-पैर कांपने लगे और वह उसकी ओर गिर पड़े.

क्या शिवम मिश्रा को मिर्गी का दौरा पड़ा था?

शिवम मिश्रा के पिता के.के. मिश्रा और उनके वकील का दावा है कि शिवम गाड़ी नहीं चला रहे थे. परिवार के अनुसार उन्हें एपिलेप्सी (मिर्गी) की बीमारी है और वह इस समय दिल्ली के अस्पताल में भर्ती हैं. परिवार ने ओवरस्पीडिंग और नशे की हालत में गाड़ी चलाने के आरोपों को भी सिरे से खारिज किया है. उनका कहना है कि यह एक मेडिकल इमरजेंसी थी, न कि लापरवाही.

पुलिस क्यों कह रही है कि शिवम ही चला रहे थे कार?

कानपुर पुलिस ने मोहन और परिवार के दावों को स्वीकार नहीं किया है. पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के अनुसार सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और मौके के वीडियो से यह स्पष्ट होता है कि हादसे के समय ड्राइविंग सीट पर शिवम मिश्रा ही थे. सीन से सामने आए वीडियो में भीड़ एक व्यक्ति को ड्राइवर सीट से बाहर निकालती दिख रही है, जिसे पुलिस शिवम बता रही है. गौरतलब है कि शुरुआती एफआईआर में चालक को “अज्ञात” बताया गया था. बाद में जांच और मीडिया रिपोर्ट्स के बाद शिवम मिश्रा का नाम आरोपी के तौर पर जोड़ा गया.

क्या लेंबोर्गिनी को मिला वीआईपी ट्रीटमेंट?

मामले ने तब और तूल पकड़ा जब यह आरोप सामने आए कि दुर्घटनाग्रस्त लेंबोर्गिनी को विशेष प्रोटोकॉल दिया गया. बताया गया कि बाउंसर खुद कार को चलाकर थाने तक लाए. गाड़ी पर ब्लैक कवर डाला गया ताकि उस पर खरोंच न आए. थाने के भीतर भी बाउंसर निगरानी करते देखे गए. इन आरोपों के बीच संबंधित थानेदार संतोष गौड़ को हटा दिया गया है. इससे पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं.

अब आगे क्या होगा?

लेंबोर्गिनी कार को जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है. पुलिस का कहना है कि बचाव पक्ष की दलीलों से जांच प्रभावित नहीं होगी. मामले ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर गहन बहस छेड़ दी है. आने वाले दिनों में कोर्ट की कार्यवाही और जांच रिपोर्ट इस हाई-प्रोफाइल केस की दिशा तय करेगी.

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