द्वापर के बाद यमुना नदी में दिखा कालिया नाग, क्या यह कलयुग के बढ़ते प्रभाव का संकेत है? Video

सोशल मीडिया पर यमुना नदी में कालिया नाग के दिखाई देने का दावा तेजी से वायरल हो रहा है. वृंदावन से जुड़े वीडियो में पानी के भीतर एक काली विशाल आकृति नजर आ रही है, जिसे लोग पौराणिक कालिया नाग से जोड़ रहे हैं. आस्था, भय और जिज्ञासा के बीच यह मामला चर्चा का विषय बन गया है. हालांकि वन विभाग या प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.;

( Image Source:  Instagram/radhogadbook )
Edited By :  नवनीत कुमार
Updated On : 17 Jan 2026 10:30 AM IST

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक रहस्यमयी दावा तेजी से फैल रहा है, जिसने आस्था और जिज्ञासा दोनों को एक साथ छेड़ दिया है. वायरल रील्स और वीडियो में कहा जा रहा है कि यमुना नदी में कालिया नाग जैसा कोई विशाल जीव दिखाई दिया है. जैसे ही इस दावे के साथ वृंदावन का नाम जुड़ा, मामला और ज्यादा संवेदनशील हो गया. लोग हैरानी, डर और भक्ति के भाव के साथ इन वीडियो को शेयर करने लगे.

वायरल दावों के मुताबिक, वृंदावन क्षेत्र में यमुना के भीतर काले रंग की एक बड़ी आकृति देखी गई. स्थानीय लोगों ने इसे दूर से कैमरे में कैद किया और वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिए. इसके बाद इलाके में हलचल मच गई और लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं. हालांकि अब तक किसी भी सरकारी एजेंसी की ओर से इस दावे की पुष्टि नहीं की गई है.

वीडियो में क्या दिख रहा है?

वीडियो में यमुना के पानी के अंदर एक गहरी काली आकृति नजर आती है, जो कुछ लोगों को सांप जैसी लग रही है. इसी आधार पर इसे पौराणिक कालिया नाग से जोड़ा जा रहा है. पोस्ट्स में दावा किया जा रहा है कि वन विभाग को सूचना दी गई है और नदी क्षेत्र की निगरानी बढ़ा दी गई है. लेकिन प्रशासन या वन विभाग की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.

पौराणिक कथा से जुड़ी आस्था की परछाईं

हिंदू पुराणों में कालिया नाग का उल्लेख द्वापर युग से जुड़ा है, जब भगवान श्रीकृष्ण ने यमुना को उसके विष से मुक्त कराया था. ऐसे में आज के समय में इस तरह के दावे लोगों को आध्यात्मिक संकेत के रूप में सोचने पर मजबूर कर रहे हैं. कुछ भक्त इसे कलयुग में बढ़ते अधर्म या प्रकृति की नाराजगी का संकेत मान रहे हैं. यमुना का प्रदूषण भी इन चर्चाओं को और गहराई देता है.

आस्था बनाम तर्क, दो धाराओं में बंटी राय

जहां कुछ संत और श्रद्धालु इस घटना को चेतावनी या संकेत के रूप में देख रहे हैं, वहीं कई लोग इसे सामान्य जीव या अफवाह बता रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि बिना पुष्टि किसी वीडियो को पौराणिक घटना से जोड़ना सही नहीं है. सोशल मीडिया पर वायरल कंटेंट अक्सर भ्रम भी फैला सकता है, इसलिए तथ्यों की जांच जरूरी है.

सच जो भी हो, संदेश सोचने पर मजबूर करता है

कालिया नाग का दावा सच हो या न हो, लेकिन यह घटना लोगों को रुककर सोचने पर जरूर मजबूर कर रही है. आस्था के नजरिए से यह भक्ति और आत्मचिंतन की ओर ले जाती है, वहीं व्यावहारिक रूप से यह प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण की चिंता का संदेश देती है. जब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं होती, इसे एक वायरल दावा मानकर ही देखना समझदारी होगी लेकिन इसके पीछे छिपा संदेश अनदेखा नहीं किया जा सकता.

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