क्या नोएडा के सेक्टर 56 में हम पी रहे गटर का पानी? लोग बोले- नहा लिया जाए तो झड़ने लगते हैं बाल

नोएडा अथॉरिटी का पानी इतना गंदा है कि लंबे समय तक पीने से लोगों को पेट की बीमारियां हो सकती हैं. स्टेट मिरर ने जब खोज बीन की तो पता लगा ये पानी लगभग गटर के पानी के समान है.

By :  मोहम्मद रज़ा
Updated On : 30 March 2026 3:28 PM IST

Noida Authority Water: नोएडा के अलग-अलग सेक्टरो में अथॉरिटी के माध्यम से गंगा वॉटर सप्लाई होता है. वैसे तो दावा है कि इन सभी सेक्टरों में सप्लाई किए जाने वाला गंगा का पानी पिया जा सकता है. लेकिन इसकी सच्चाई क्या है इसको जानने के लिए स्टेट मिरर की टीम ने आज नोएडा के सेक्टर 56 में ऑन कैमरा पड़ताल की है. स्टेट मिरर की जांच में नोएडा अथॉरिटी द्वारा सप्लाई किए जाने वाला पानी की गुणवत्ता बेहद खराब नजर आई है.

हमनें दो अलग-अलग गिलास में अलग-अलग पानी लिए, एक गिलास में नोएडा अथॉरिटी द्वारा सप्लाई किए जाने वाला गंगा वॉटर रखा तो दूसरे गिलास में आरो का पानी रखा. जब हमने टीडीएस मीटर जिससे पानी की गुणवत्ता मापी जाती है उस से नोएडा अथॉरिटी द्वारा सप्लाई किए जाने वाले पानी का टीडीएस चेक किया तो नतीजे काफी हैरान कर देने वाले थे.

कितना मिला टीडीएस?

जांच के बाद नोएडा अथॉरिटी के पानी का टीडीएस 2200 PPM के आसपास मिला. वही जब हमने आरो के पानी का टीडीएस चेक किया तो आरो के पानी का टीडीएस 60 PPM के आसपास मिला. बता दें, गटर के पानी का भी टीडीएस 2000 PPM से ऊपर होता है.

कितना टीडीएस का पानी पीना सही?

अब आपको समझाते हैं कि कितने टीडीएस का पानी पिया जा सकता है या पीने के अनुकूल माना जाता है. 50 PPM से 100 PPM के बीच अगर पानी का टीडीएस हो तो उसे बहुत अच्छा माना जाता है यानी कि उसे पिया जा सकता है. वहीं टीडीएस 500 PPM तक है तो वो पानी पीने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.

कितने टीडीएस से ऊपर का पानी खतरनाक?

500 PPM से ऊपर टीडीएस वाले वाटर का इस्तेमाल पीने के लिए नहीं किया जा सकता. जबकि नोएडा ऑथोरिटी द्वारा सप्लाई किये जाने वाले पानी का टीडीएस 2000 PPM के ऊपर आ रहा है ऐसे में ये पानी पीने लायक नहीं है.

क्या बोले स्थानीय लोग?

खराब गुणवत्ता वाले पानी की सप्लाई को लेकर सेक्टर 56 के निवासियों से स्टेट मिरर की टीम ने बातचीत की. रुची अग्रवाल नाम की निवासी ने बताया कि इतना हार्ड वॉटर है कि अगर नहां लिया जाए तो बाल तक झड़ने लगते हैं. उन्होंने कहा कि हमनें इसको लेकर शिकायत भी की थी और अधिकारी यहां आए भी थे, लेकिन अभी तक हालात को सुधारा नहीं गया है.

हरीष नाम के एक निवासी का कहना है कि नोएडा अथॉरिटी के जरिए दिए जाने वाले पानी में 90 परसेंस ग्राउंड वॉटर होता है, बाकि इसमें लगभग 10 फीसद गंगा का पानी मिलाया जाता है, जिसकी वजह से इसका टीडीएस 2 हजार के पार पहुंच जाता है. जिसकी वजह से लोग इस पानी को पीते नहीं है, हर परिवार पानी को बाहर से खरीदकर पीता है. उधर, जब इस बाबत अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई तो फ़ोन नहीं पिक हुआ.  

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