HIV के डर से परिजन देखते रहे तमाशा! पोस्टमार्टम कराने पहुंचा 8 साल का मासूम, AIDS ने पहले बाप और अब मां की ले ली जान

उत्तर प्रदेश के एटा जिले से इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है. यहां एक 8 साल का मासूम बच्चा अपनी मां के शव को अकेले पोस्टमार्टम कराने पहुंचा. बच्चा पहले ही अपने पिता को AIDS की वजह से खो चुका था और अब मां की भी इलाज के दौरान मौत हो गई. रिश्तेदारों और पड़ोसियों ने HIV/AIDS की वजह से परिवार से दूरी बना ली थी, जिसके चलते अंतिम समय में भी कोई साथ नहीं आया. पुलिस ने मामले में हस्तक्षेप कर पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार की व्यवस्था कराई.;

( Image Source:  Social Media )
Edited By :  सागर द्विवेदी
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उत्तर प्रदेश के एटा जिले से एक दिल दहला देने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने समाज की संवेदनहीनता और HIV से जुड़ी सामाजिक सोच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. यहां एक 10 साल का मासूम बच्चा अपनी मां के शव के पास घंटों अकेला बैठा रहा, क्योंकि HIV बीमारी के कारण न तो कोई रिश्तेदार आगे आया और न ही कोई पड़ोसी मदद के लिए तैयार हुआ.

इस त्रासदी को और भयावह बनाता है यह तथ्य कि बच्चे के पिता की भी एक साल पहले HIV से मौत हो चुकी थी. मां टीबी और HIV से पीड़ित थीं और इलाज के दौरान अस्पताल में दम तोड़ दिया. मां की मौत के बाद बच्चे को न केवल भावनात्मक सदमा झेलना पड़ा, बल्कि समाज से मिली बेरुखी ने उसकी पीड़ा को और बढ़ा दिया.

इलाज के दौरान मां ने तोड़ा दम

जानकारी के मुताबिक, 52 वर्षीय महिला को एटा के वीरांगना अवंतीबाई मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था. टीबी और HIV से जूझ रही महिला की बुधवार को इलाज के दौरान मौत हो गई. गुरुवार को पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया के लिए शव ले जाया गया, लेकिन तब तक कोई भी रिश्तेदार या परिचित अस्पताल नहीं पहुंचा.

शव के पास बिलखता रहा मासूम

मां की मौत के बाद 10 साल का बेटा अस्पताल में ही शव के पास बैठा रहा. तस्वीरों में बच्चा फर्श पर बैठकर अपनी मां के पार्थिव शरीर को निहारता नजर आया, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं. अस्पताल स्टाफ के अलावा वहां कोई नहीं था.

पिता की भी HIV से हो चुकी है मौत

बच्चे ने बताया कि उसके पिता की पिछले साल HIV के कारण मौत हो गई थी. इसके बाद से ही समाज और रिश्तेदारों ने उनसे दूरी बना ली. पिता की मौत के बाद मां बीमार पड़ीं और इलाज के दौरान बच्चे को स्कूल भी छोड़ना पड़ा.

रिश्तेदारों ने मोड़ा मुंह

बच्चे ने बताया कि 'मैं मम्मी की देखभाल करता था. उनका इलाज एटा में चल रहा था और उन्हें कानपुर और फर्रुखाबाद के लोहिया अस्पताल भी ले जाया गया था. मेरे चाचा को तो ये भी नहीं पता था कि मम्मी की मौत हो गई है.' बच्चे का आरोप है कि इलाज के दौरान किसी रिश्तेदार ने एक रुपये की मदद तक नहीं की.

पुलिस ने निभाई इंसानियत

घटना की सूचना मिलने पर पुलिस अस्पताल पहुंची. जैथरा थाना प्रभारी रितेश कुमार ने बताया कि 'हमें सूचना मिली कि एक बच्चा शव के साथ अकेला बैठा है. हमने तुरंत सब-इंस्पेक्टर और कॉन्स्टेबल को भेजा. बच्चे का कोई सहारा नहीं था, इसलिए पुलिस ने ही अंतिम संस्कार की व्यवस्था कराई.” भास्कर इंग्लिश की रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चे ने आरोप लगाया है कि उसके कुछ रिश्तेदार उसकी जमीन हड़पने की कोशिश कर रहे हैं. उसने यह भी कहा कि रिश्तेदार उसकी मां की बीमारी से वाकिफ थे, लेकिन इसके बावजूद किसी ने मदद नहीं की.

बाद में पहुंचे दूर के रिश्तेदार

करीब 60 किलोमीटर दूर कासगंज से कुछ दूर के रिश्तेदार बाद में मोर्चरी पहुंचे, जिसके बाद पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी हो सकी. जिला स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि महिला को 2017 में टीबी का इलाज मिला था और प्रशासन मामले की समीक्षा कर रहा है.

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