बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इस समय अपने विवादित बयानों की वजह से चर्चा में हैं. भगवान कृष्ण पर विवादित बयान देने के बाद अब उन्होंने भगवान राम पर भी आपत्तिजनक बात कही है, जिसे लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए बीजेपी पर हमला बोला है.

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि ये सनातन विऱोधी किसके कहने पर सक्रिय हैं. पहले भगवान कृष्ण के बारे में विवादित वीडियो आया, अब भगवान राम के पिता के बारे में अभद्रता की बात प्रसारित हो रही है.

सपा प्रमुख ने कहा कि इसके राजनीतिक आकाओं को ये सब मंजूर होगा, हमें अंश मात्र भी स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने कहा कि सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के अपराध में इसके सभी कार्यक्रम रद्द किए जाएं. अब सच्चे सनातनी इनकी पर्ची लिखेंगे.

आखिर ऐसा क्या बोल गए धीरेंद्र शास्त्री?

धीरेंद्र शास्त्री ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा, "राम जी के पांच बाप थे.. उनके 5 पिता जी थे, विचित्र बात है. स्वीकार करना बड़ा मुश्किल हैं, पर सत्य बात है. यह आपको कहीं लेख में नहीं मिलेगा. अब यह मत पूछ लेना कि कहां मिलेगा. मति तो है नहीं, कुमति है. इसको प्रमाणित हम यूं कर रहे हैं कि दशऱथ जी के प्राण गए, लेकिन भगवान राम ने अंत्येष्टि नहीं की. "

कृष्ण पर क्या बोले थे धीरेंद्र शास्त्री?

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र शास्त्री ने 29 अक्टूबर को मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में श्रीराम कथा के दौरान भगवान राम और भगवान कृष्ण की तुलना करते हुए एक बयान दिया था. उन्होंने अपने बयान में कहा था, "हमारे राम सीधे हैं, तुम्हारे कृष्ण टेढ़े हैं." 

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था कि भगवान कृष्ण की खोपड़ी, उनका नाम, उनका चलना और खड़े होने का ढंग भी टेढ़ा है (वे तीन जगह से टेढ़े होकर खड़े होते हैं- पांव के ऊपर पांव, कमर लचकाए और गर्दन टेढ़ी करके बंसी बजाते हैं). उन्होंने तुलना करते हुए यह भी कहा था कि बंसी बजाना खेल है पर धनुष उठाना खेल नहीं है, और गाय चराना खेल है पर बंदरों को नचाना खेल नहीं है. उनका यह भी कहना था कि अयोध्या सीधी है और वृंदावन टेढ़ा है.

विवाद के बाद मांगी माफी

इस बयान के बाद मथुरा के संतों और ब्रजवासियों में भारी नाराजगी फैल गई और उन्हें कृष्ण विरोधी बताया जाने लगा. बढ़ते विवाद को देखते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने हाथ जोड़कर माफी मांगी और सफाई दी कि उनका मकसद भगवान राम और श्रीकृष्ण के बीच कोई भेद या बंटवारा पैदा करना नहीं था. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी संत के प्रचलित भाव और पद की व्याख्या कर रहे थे और उनकी बात को गलत तरीके से पेश किया.