अब डॉक्टर नहीं, AI करेगा इलाज के बिल का फैसला! आयुष्मान भारत में होने वाला है बड़ा टेक बदलाव
आयुष्मान भारत योजना में अब एक बड़ा तकनीकी बदलाव होने जा रहा है. सरकार इस योजना के तहत इलाज के क्लेम की जांच और मंजूरी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का इस्तेमाल शुरू करने जा रही है.
Ayushman Bharat AI: आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत जल्द ही इलाज के दावों की जांच और मंजूरी डॉक्टरों की जगह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की मदद से की जा सकती है. नेशनल हेल्थ अथॉरिटी ने इसके लिए एक पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है. इस नई व्यवस्था की शुरुआत पहले उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में परीक्षण के तौर पर की जाएगी.
रिपोर्ट के अनुसार इस एआई आधारित क्लेम सिस्टम का ट्रायल सबसे पहले इन दो राज्यों में किया जाएगा. अगर यह प्रयोग सफल रहता है तो बाद में इसे देश के अन्य राज्यों में भी लागू किया जा सकता है.
कैसे होगा ये काम पूरा?
न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज यानी सैचिस जल्द ही एक ऑटोमेटेड एडजुडिकेशन सिस्टम स्थापित करेगी. इस सिस्टम का मकसद क्लेम की जांच और मंजूरी की प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और ज्यादा प्रभावी बनाना है. यह ऑटोमेटेड सिस्टम योजना के नियमों के अनुसार क्लेम का विश्लेषण करेगा, संदिग्ध या फर्जी क्लेम की पहचान करेगा और सही क्लेम को जल्दी मंजूरी देगा.
अब तक योजना के तहत क्लेम की जांच मैन्युअल तरीके से होती थी. डॉक्टर और अधिकारी मेडिकल दस्तावेजों और अन्य जानकारी की जांच करते थे, जिसके कारण कई बार प्रक्रिया पूरी होने में कई दिन लग जाते थे. लेकिन एआई सिस्टम आने के बाद सामान्य क्लेम कुछ ही घंटों में मंजूर किए जा सकते हैं.
क्या होगा एआई से फायदा?
अधिकारियों का कहना है कि इस नई व्यवस्था से अस्पतालों को भुगतान मिलने में होने वाली देरी भी काफी कम हो जाएगी. क्लेम जल्दी मंजूर होने से अस्पतालों को समय पर पैसा मिलेगा और इलाज की प्रक्रिया में वित्तीय रुकावट कम होगी.
नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के अनुसार एआई के इस्तेमाल से क्लेम की निगरानी मजबूत होगी, फर्जी दावों का पता लगाने में मदद मिलेगी और योजना के बेहतर क्रियान्वयन में भी सहायता मिलेगी. इससे मरीजों को मिलने वाली सेवाओं में भी सुधार होने की उम्मीद है.
यूपी में कैसे शुरू होगी इस प्रोजेक्ट की शुरुआत?
उत्तर प्रदेश में इस पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत कुछ चुनिंदा इलाज से की जा सकती है. खास तौर पर किडनी से जुड़ी बीमारियों और डायलिसिस से जुड़े क्लेम को पहले चरण में शामिल किया जा सकता है. इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि एआई सिस्टम मेडिकल क्लेम को कितनी प्रभावी तरीके से संभाल सकता है.
यह पहल आयुष्मान भारत कार्यक्रम को और मजबूत बनाने की दिशा में एक कदम मानी जा रही है।. इस योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को हर साल पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाता है. सरकार का मानना है कि एआई तकनीक के इस्तेमाल से स्वास्थ्य बीमा प्रणाली ज्यादा प्रभावी बन सकेगी और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा. इससे प्रशासनिक कामकाज आसान होगा और क्लेम प्रक्रिया में लगने वाला समय भी कम होगा.
यदि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है तो आने वाले समय में इस प्रणाली को देश के अन्य राज्यों में भी लागू किया जा सकता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि एआई का इस्तेमाल स्वास्थ्य प्रबंधन में बड़ा बदलाव ला सकता है.