कौन हैं 'शेरनी जैसी आंखों' वाली पुष्कर की पप्पू देवी? किस्सा 25 साल पहले खींची गई तस्वीर का जो गई थी यूरोप तक
पुष्कर कैमल फेयर में 2000 के शुरुआती सालों में सामने आई पप्पू देवी अपनी 'शेरनी जैसी आंखों' के कारण दुनियाभर में मशहूर हो गई थी. फेम के बावजूद उन्होंने सादगी नहीं छोड़ी और आज भी पुष्कर में आम जिंदगी जी रही हैं.;
पुष्कर शहर में जहा हर साल ऊंट मेला दुनिया भर के सैलानियों को अपनी ओर खींचता है. वहां की सादगी और प्राकृतिक खूबसूरती की कई कहानियां हैं. लेकिन कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो एक पल में वायरल होकर अमर हो जाती हैं. ठीक वैसे ही जैसे महाकुंभ की वायरल गर्ल मोनालिसा ने अपनी कत्थई-नशीली आंखों, शर्मीली मुस्कान और सादगी भरी मुस्कान से सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया था. एक माला बेचने वाली लड़की रातों-रात चर्चा का केंद्र बन गई, बॉलीवुड तक पहुंच गई, और लाखों दिलों में बस गई.
उसी तरह, दशकों पहले पुष्कर कैमल फेयर में एक और 'वायरल गर्ल' की कहानी शुरू हुई थी, जिसे लोग आज भी 'शेरनी वाली आंखों' वाली महिला या 'Tigress Eyes Lady' कहकर रहे हैं. इस महिला का नाम है पप्पू देवी मोनालिसा की तरह पप्पू देवी की खूबसूरती भी उनकी आंखों में छिपी थी, लेकिन उनकी कहानी थोड़ी अलग है जहां मोनालिसा ने फेम को कैरियर में बदला, वहीं पप्पू देवी ने सादगी को कभी नहीं छोड़ा.
'Tigress Eyes Lady' कैसे बनीं पप्पू देवी?
पप्पू देवी की कहानी राजस्थान की उस अनोखी और दिलचस्प विरासत का एक जीता-जागता उदाहरण है, जहां प्राकृतिक सुंदरता और सादगी साथ-साथ चलती हैं. पुष्कर कैमल फेयर (Pushkar Camel Fair) जो दुनिया का सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है, में करीब 25 साल पहले यानी 2000 के शुरुआती दशकों में एक फोटोग्राफर ने उनकी एक तस्वीर खींची थी. उस फोटो में पप्पू देवी की तीखी, गहरी और सुनहरी-भूरी आंखें इतनी प्रभावशाली लगीं कि लोगों ने उन्हें तुरंत 'शेरनी जैसी आंखें' और 'टाइगर आईज लेडी' का नाम दे दिया.
यूरोप तक बिके पप्पू देवी के पोस्टकार्ड
रिपोर्ट के मुताबिक, यह तस्वीर इतनी खास थी कि वह न सिर्फ भारत में, बल्कि यूरोप तक पोस्टकार्ड्स पर छपकर बिकने लगी. सोशल मीडिया के जमाने से बहुत पहले ही यह इमेज वायरल हो गई थी लोग इसे देखकर हैरान रह जाते थे कि ऐसी आंखें वाकई किसी इंसान में हो सकती हैं. उनकी आंखों का रंग हल्का, इंटेंस और लगभग जादुई-सा था, जो आम भारतीय आंखों से बिल्कुल अलग था. यह एक रेयर जेनेटिक ट्रेट था, जो आंखों के रंग को प्रभावित करता है और उन्हें बाघिन या शेर जैसा गहरा, सम्मोहक लुक देता है.
नहीं बदली पप्पू देवी की जिंदगी
फेमस होने के बावजूद पप्पू देवी की जिंदगी में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया. वे आज भी पुष्कर में ही रहती हैं वहीं जहां से उनकी कहानी शुरू हुई थी. अब वे एक छोटा-सा फुटपाथ स्टॉल चलाती हैं, जहां वे हैंडमेड बैग्स, स्मृति-चिन्ह (souvenirs), मिरर-वर्क के सामान और अन्य लोकल क्राफ्ट्स बेचती हैं. अक्सर पर्यटक उनकी दुकान पर आते हैं, उन्हें पहचानते हैं और उत्सुकता से उनकी आंखों को देखते हैं या फोटो खींचने की इजाजत मांगते हैं. वे आमतौर पर बंजारा स्टाइल के रंग-बिरंगे कपड़े पहनती हैं, जिनमें मिरर वर्क और पारंपरिक राजस्थानी जरी-काम होता है, जो उनकी आंखों की खूबसूरती को और निखारता है. सबसे रोचक बात यह है कि यह अनोखी जेनेटिक खासियत उनकी बेटियों में भी आई है. उनकी बेटियां भी वैसी ही तीखी, हल्की रंग की आंखें रखती हैं, जिस वजह से पर्यटक अब मां-बेटी दोनों की तरफ अट्रैक्ट होते हैं. पुष्कर आने वाले सैलानी अक्सर उन्हें देखकर हैरान हो जाते हैं और उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं, जिससे यह कहानी बार-बार नई जनरेशन तक पहुंचती रहती है.