आस्था या बर्बादी? नर्मदा में 11,000 लीटर दूध बहाने का VIDEO वायरल; सोशल मीडिया पर छिड़ी बड़ी बहस
मध्य प्रदेश के सीहोर में नर्मदा नदी में 11,000 लीटर दूध चढ़ाने का वीडियो वायरल हो गया है. जहां कुछ लोग इसे आस्था बता रहे हैं, वहीं कई लोग इसे संसाधनों की बर्बादी और प्रदूषण कह रहे हैं.
मध्य प्रदेश की पावन नर्मदा नदी के किनारे एक अनोखा और भव्य धार्मिक अनुष्ठान हुआ है, जिसका वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. ड्रोन कैमरे से ली गई इस क्लिप में साफ दिख रहा है कि नदी के तट पर एक बड़ा टैंकर खड़ा किया गया है. दादा जी बाबा जिन्हें शिवानंद दादाजी या धूनीवाले दादाजी के नाम से भी जाना जाता है, के निर्देशन में भक्तों ने लगभग 11,000 लीटर दूध मां नर्मदा को अर्पित किया.
यह दुग्धाभिषेक का एक बड़ा रूप था, जिसमें टैंकर से दूध को नदी के जल में प्रवाहित कर दिया गया. यह पूरा दृश्य पातालेश्वर महादेव मंदिर के पास, नर्मदा नदी के उत्तर तट पर स्थित सातदेव क्षेत्र (सीहोर जिले) का बताया जा रहा है. दादा जी बाबा पहले भी रोजाना 151 लीटर दूध से नर्मदा मां का अभिषेक करते आए हैं, लेकिन यह 11 हजार लीटर वाला विशेष अनुष्ठान काफी बड़ा और चर्चित हो गया है.
क्या ऐसे प्रसन्न होगी मां नर्मदा?
वीडियो देखने वाले कई लोग इसे मां नर्मदा के प्रति गहरी श्रद्धा और भक्ति का सुंदर उदाहरण मान रहे हैं. वे कहते हैं कि यह धार्मिक परंपरा का हिस्सा है और मां नदी को प्रसन्न करने का एक तरीका है. लेकिन वहीं दूसरी ओर, सोशल मीडिया पर बहुत से यूजर्स ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई है. कई लोगों ने पर्यावरणीय चिंता व्यक्त की और सवाल उठाया कि इतनी बड़ी मात्रा में दूध नदी में बहाने की बजाय उसे गरीबों, जरूरतमंद बच्चों या अनाथ आश्रमों में बाँट दिया जाना चाहिए था.
भड़के यूजर्स का रिएक्शन
एक यूजर ने लिखा, 'यह कैसा धर्म है? एक तरफ बच्चे दूध के लिए तरसते हैं और दूसरी तरफ हजारों लीटर दूध नदी में बहा दिया जा रहा है, जो बच्चों को पिलाया जा सकता था.' दूसरे ने कहा, 'नदी की सुंदरता देखो, कितना अच्छा लगता है. फिर ये लोग आते हैं और पूरी नदी को प्रदूषित कर देते हैं. धर्म के नाम पर यह शर्मनाक है.' एक और यूजर की टिप्पणी थी, 'इस देश की विडंबना देखिए एक तरफ गरीबों को एक गिलास दूध नसीब नहीं होता और दूसरी तरफ आस्था के नाम पर हजारों लीटर दूध नदी में बहाया जा रहा है.'
लोगों का सवाल किस ग्रन्थ में लिखा है
कुछ लोगों ने यह भी पूछा कि किसी धार्मिक ग्रंथ में दूध को इस तरह नदी में बहाने का उल्लेख है या नहीं. वे कहते हैं कि बिना किसी प्रमाण के ऐसे काम करना और फिर समाज को उपदेश देना ठीक नहीं है. कुल मिलाकर, यह वीडियो धार्मिक आस्था और व्यावहारिकता-पर्यावरण संरक्षण के बीच एक बड़ी बहस छेड़ गया है. कुछ इसे सच्ची भक्ति बता रहे हैं तो कुछ इसे पाखंड और संसाधनों की बर्बादी मान रहे हैं.