10 हजार की घूस से 90 करोड़ के टेंडर घोटाले का हुआ खुलासा, मंत्री से लेकर अफसर तक सब कटघरे में; एक गिरफ्तारी से कैसे हिला सिस्टम?
10 हजार की घूस से शुरू हुआ मामला अब 90 करोड़ से ज्यादा के घोटाले तक पहुंच गया है. जांच में मंत्री से लेकर बड़े अधिकारियों तक कमीशन का खेल सामने आया है. ED की कार्रवाई में करोड़ों की संपत्ति और कैश भी बरामद हुआ है.
झारखण्ड में 90 करोड़ के टेंडर घोटाले का खुलासा
(Image Source: Sora_ AI )Jharkhand Corruption Scam, ₹10000 Bribe Exposes ₹90 Crore Corruption Network: झारखंड में एक मामूली घूसखोरी का मामला अब बड़े भ्रष्टाचार घोटाले में बदल गया है. महज 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़े गए एक इंजीनियर से शुरू हुई जांच ने पूरे सिस्टम में फैले कमीशन नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया. जांच एजेंसी Enforcement Directorate (ED) ने इस मामले में 5वीं सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल करते हुए 14 नए आरोपियों को शामिल किया है.
जांच में सामने आया है कि ग्रामीण कार्य विभाग में ठेकों के आवंटन के बदले एक तय प्रतिशत पर कमीशन लिया जाता था. यह कमीशन करीब 3% तक होता था और इसे ऊपर से नीचे तक अधिकारियों और नेताओं में बांटा जाता था. बताया जा रहा है कि करीब 3048 करोड़ रुपये के ठेकों में 90 करोड़ रुपये से ज्यादा की अवैध वसूली की गई.
कैसे चलता था पूरा खेल?
ED की जांच के अनुसार, ठेकेदारों से पहले ही कमीशन तय कर लिया जाता था. भुगतान के बाद ही उन्हें काम दिया जाता था. इस सिस्टम में हर स्तर के लिए हिस्सा तय था;
- करीब 1.35% हिस्सा तत्कालीन मंत्री Alamgir Alam तक पहुंचता था.
- सचिव स्तर पर 0.65% से 1% तक जाता था.
- बाकी रकम चीफ इंजीनियर और अन्य अधिकारियों में बांटी जाती थी.
- इस तरह पूरा नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा था, जिसमें रिटायर्ड और कार्यरत दोनों तरह के इंजीनियर शामिल थे.
बड़े नाम आए सामने, कई गिरफ्तार
इस मामले में पूर्व मंत्री आलमगीर आलम समेत कई अधिकारी पहले ही न्यायिक हिरासत में हैं. नई चार्जशीट में चीफ इंजीनियर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर और अन्य अधिकारियों के नाम भी जोड़े गए हैं.
छापेमारी में करोड़ों की बरामदगी
- ED ने झारखंड, बिहार और दिल्ली समेत कई जगहों पर 50 से ज्यादा छापेमारी की है.
- करीब 44 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की गई.
- लगभग 38 करोड़ रुपये कैश बरामद हुआ.
- कई लग्जरी गाड़ियां जब्त की गईं.
- यह सब अवैध कमाई से जुड़ा बताया जा रहा है.
छोटी घूस, बड़ा खुलासा
पूरे घोटाले की शुरुआत सिर्फ 10 हजार रुपये की रिश्वत से हुई थी, लेकिन जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, एक बड़ा संगठित भ्रष्टाचार तंत्र सामने आया, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए. फिलहाल जांच जारी है और आने वाले समय में और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है.