यूरोप की सबसे ऊँची चोटी पर 24 घंटे! कौन हैं रोहताश खिलारी जिन्होंने जान जोखिम में डाल बनाया विश्व रिकॉर्ड?

रोहताश खिलारी ने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस पर 24 घंटे बिना ऑक्सीजन रुक कर विश्व रिकॉर्ड बनाया. जान को खतरे में डाल ऐसा करने वाले वो दुनिया के पहले शख्स हैं. रोहताश हरियाणा के हिसार जिले के रहने वाले हैं. जानिए उनका संघर्ष, शिक्षा, परिवार और सफलता की पूरी कहानी.;

( Image Source:  rohtashkhileri )
Curated By :  स्टेट मिरर डेस्क
Updated On : 22 Jan 2026 3:35 PM IST

जहां आम इंसान कुछ मिनट भी खड़ा नहीं रह सकता, वहां 24 घंटे तक डटे रहना सिर्फ साहस नहीं, इतिहास रचना होता है. यही काम रोहताश खिलारी ने किया है. यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस पर भारतीय पर्वतारोही रोहताश खिलारी उनकी ये सफलता  एक मिसाल है. अब हर कोई जानना चाहता है, कौन हैं रोहताश खिलारी?

रोहताश खिलारी कौन हैं?

रोहताश खिलारी एक भारतीय पर्वतारोही और विश्व रिकॉर्डधारी हैं. उन्होंने, हाल ही में माउंट एल्ब्रुस (यूरोप की सबसे ऊँची चोटी) पर 24 घंटे बिना ऑक्सीजन के रुकने का विश्व रिकॉर्ड बनाया है. उसके बाद से वह लगातार सुर्खियों में हैं. उन्होंने अपनी फिटनेस, मानसिक दृढ़ता और साहस के दम पर कठिन दौर को पार किया. उनका यह सफर जानलेवा भी साबित हो सकता थ्ज्ञा. इस, सफर में उनकी दो अंगुलियां ठंड से गल गईं. रोहताश खिलारी हरियाणा के हिसार जिले के रहने वाले है।. एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर उन्होंने वैश्विक स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है.

रोहताश की शुरुआती पढ़ाई सरकारी स्कूलों से हुई. पढ़ाई के साथ-साथ वे शारीरिक फिटनेस और खेलों में रुचि रखते थे. पर्वतारोहण जैसे जोखिम भरे क्षेत्र में आने के लिए उन्होंने कठोर प्रशिक्षण, अनुशासन और आत्म-अध्ययन पर ज्यादा जोर दिया.

ग्राउंड जीरो से ग्लोरी

रोहताश के पिता साधारण किसान परिवार से आते हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने उनके सपनों का साथ दिया. यही कारण है कि उनकी सफलता को 'ग्राउंड जीरो से ग्लोरी' तक की कहानी माना जा रहा है.

एल्ब्रुस पर 24 घंटे बिना ऑक्सीजन

रोहताश ने माउंट एल्ब्रुस (5,642 मीटर) के शीर्ष पर कोई ऑक्सीजन सपोर्ट लिए बिना 24 घंटे तक रुक कर एक खास रिकॉर्ड बनाया. यह मानव सहनशक्ति और ऊँचाई पर टिकने की क्षमता का एक मिसाल है. वैज्ञानिकों के अनुसार इस सफलता के साथ ही रोहताश शारीरिक मजबूती और एक्सट्रीम एंड्यूरेंस पर शोध के लिए अहम सब्जेक्ट बन गए है.

 चोटियों पर चढ़ने की लंबी सूची

इससे पहले भी रोहताश ने भारत और विश्व की कई प्रतिष्ठित चोटियों को फतह किया है. इनमें विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को 16 मई 2018 को फतह किया था. माउंट किलिमंजारो (अफ्रीका) की चोटी भी वह फतह कर चुके हैं. वहां पर भी रोहताश 24 घंटे रुकने का रिकॉर्ड भी बनाया था. इसके अलावा माउंट फ्रेंडशिप, माउंट मून आदि पर चढ़ने का रिकॉर्ड भी उनके नाम है.

वह समर और विंटर दोनों में माउंट एल्ब्रुस फतह करने वाले पहले भारतीयों में से एक हैं. इन उपलब्धियों ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही समुदाय में खास पहचान दिलाई है.

समर्पण और प्रेरणा का प्रतीक

उनकी उपलब्धियां सिर्फ व्यक्तिगत सफलता नहीं हैं, बल्कि उन्होंने अपनी इस सफलता को देशभक्ति और प्रेरणा के रूप में समर्पित किया है. ऊँचाई पर सफलता के साथ-साथ रोहताश ने अपने अनुभव से युवाओं को प्रेरित करने और कठिनाइयों को पार करने का संदेश दिया है.

रोहताश खिलारी हेडलाइंस में क्यों?

यूरोप की सबसे ऊची चोटी माउंट एल्ब्रुस पर 24 घंटे बिना ऑक्सीजन के रुकने का विश्व रिकॉर्ड, माउंट एवरेस्ट और अन्य कठिन चोटियों का सफल आरोहण,  पर्वतारोहण में भारतीय नाम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और प्रेरणादायक साहस और स्टेमिना के उदाहरण बनने की वजह से वह एक बार फिर सुर्खियों में हैं. वह युवा पीढ़ी को प्रेरित करने के मामले में भी आइकन बन चुके हैं.

पोस्ट लिखना आसान नहीं 

माउंट एल्ब्रुस पर बिना ऑक्सीजन के 24 घंटे रुकने के बाद उन्होंने इंस्टा पर अपने पोस्ट में लिखा यह सफलता 8 साल का दर्द झेलने के बाद मिला. मेरे लिए यह इंतजार और एक पागलपन भरा सपना था. आज, मैं दुनिया का पहला इंसान बना, जिसने माउंट एल्ब्रस (18,510 फीट) की चोटी पर 24 घंटे बिना किसी ऑक्सीजन सपोर्ट के बिताया. मैं, अकेला ही चढ़ गया या अकेला रुका. हड्डी तोड़ने वाली ठंड में भी मेरे साथ रुकने को तैयार नहीं था. सबने कहा ये मौत को दावत देना है, पर मेरे लिए ये तिरंगे की शान का सवाल था.

हवा की रफ्तार 50-60 किलोमीटर प्रति घंटा, तापमान माइनस 40 डिग्री सेल्सियस और सर्द हवा माइनस 50 डिग्री सेल्सियस की पर रोहताश ने परवाह नहीं की. चारों तरफ सिर्फ बर्फ का व्हाईटआउट. क्या शिखर पर इतनी देर तक कोई इंसान कभी नहीं रुका था?

जान को जोखिम में डालने वाला सफर

रोहताश खिलारी का सफर 2018 से शुरू हुआ था. पहली कोशिश में समिट किया. साल 2020 में एल्ब्रस पर 24 घंटे तक रुकने का प्लान था, पर गाइड की जान बचाने के लिए नीचे आना पड़ा. साल 2023 मौसम इतना खतरनाक कि सिर्फ 4 घंटे ही टिक पाया. आज, 2026 में 8 साल बाद वो सपना पूरा हुआ.

उन्होंने कहा कि एल्ब्रुस पहाड़ ने सब कुछ छीनने की कोशिश की, शीत दंश में मेरी दो उंगलियां चली गईं, लेकिन मेरा सपना नहीं टूटा. ये सिर्फ ताकत की नहीं, बल्कि सब्र, जुनून और कुदरत के प्रति सम्मान की कहानी है. एल्ब्रस की चोटी पर 24 घंटे का स्टे पूरा हुआ. ये मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा इम्तिहान था. एवरेस्ट की ट्रेनिंग और आप सबकी दुआओं ने इसे मुमकिन बनाया. ये जीत मेरे देश के नाम और हर हमें हिंदुस्तानी के लिए जो बड़े सपने देखता है. हर हर महादेव!

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