शिक्षा सुधार या सरकारी मजाक! टीचर्स को मिला नया टास्क, कुत्तों की संख्या बताओ मास्टर साहब? फैसले पर सवाल

हरियाणा में एग्जाम के समय शिक्षकों को आवारा कुत्तों की संख्या गिनने का टास्क सौंपा गया है. अब सर्दी के मौसम में स्कूलों की पढ़ाई, बच्चों के टेस्ट और टीचर्स की कमी के बीच इस फैसले पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.;

( Image Source:  ani )
Curated By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 23 Jan 2026 6:35 PM IST

हरियाणा शिक्षा व्यवस्था में पहले ही टीचर्स की कमी है. सिलेबस पूरे नहीं हुह हैं. बढ़ते सिलेबस और ठंड के मौसम की चुनौतियों से जूझ रही है. इस बीच सरकार का एक आदेश सामने आया है, जिसने शिक्षा सुधार पर नहीं बल्कि प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं. नायब सिंह सैनी सरकार की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, स्कूलों में पढ़ाने वाले टीचर्स को अब अपने इलाके में आवारा कुत्तों की संख्या गिनने का जिम्मा सौंपा गया है. सवाल सीधा है, क्या मास्टर साहब अब बच्चों को पढ़ाएंगे या कुत्ते गिनेंगे?

पढ़ाई होगी या डॉग काउंटिंग?

इन दिनों हरियाणा समेत पूरे उत्तर भारत में सर्दियों का मौसम चल रहा है. स्कूलों का समय पहले ही प्रभावित है. कई जगह बच्चों की उपस्थिति बहुत कम है. शिक्षकों पर बोर्ड और यूनिट टेस्ट की तैयारी का दबाव है. ऐसे वक्त में टीचर्स को फील्ड में भेजना यह सवाल खड़ा करता है कि पढ़ाई का नुकसान कौन भरेगा?

टीचर्स की संख्या पहले ही कम, नया टास्क क्यों?

हरियाणा के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के पद भारी संख्या में खाली हैं. एक शिक्षक पर कई क्लास को बोझ है. मल्टी-ग्रेड टीचिंग भी आज की मजबूरी है. ऐसे में शिक्षकों से गैर-शैक्षणिक काम कराना शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधा असर डालता है.

क्या बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी?

जब टीचर कुत्तों की संख्या का सर्वे करेंगे, डाटा इकट्ठा करेंगे और रिपोर्ट बनाएंगे, तो सवाल उठता है कि क्लास कौन लेगा सिलेबस कौन पूरा कराएगा? कमजोर बच्चों पर ध्यान कौन देगा?? शिक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि इसका सीधा नुकसान छात्रों को होगा. फिर, यह समय स्कूलों में यूनिट टेस्ट, प्री-बोर्ड और रिवीजन क्लास चल रहे हैं. ऐसे में टीचर्स का ध्यान पढ़ाई से हटाकर प्रशासनिक काम में लगाना शिक्षा सुधार नहीं, शिक्षा से समझौता माना जा रहा है.

फैसले पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

क्या इस काम के लिए अलग स्टाफ नहीं हो सकता? शिक्षा विभाग से बाहर के काम क्यों? क्या टीचर्स ही हर सर्वे के लिए उपलब्ध हैं? सोशल मीडिया पर भी लोग पूछ रहे हैं कि “कल को क्या टीचर्स से बिजली मीटर भी पढ़वाए जाएंगे?”

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