हरियाणा के 2 वीर सपूत मंजीत और निशांत को मिला वीरता पुरस्कार, जानें दिल्ली की ‘सुपर कॉप’ जोड़ी के मशहूर किस्से
Republic Day 2026: गणतंत्र दिवस 2026 पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की ‘सुपर कॉप’ जोड़ी मंजीत जागलान और निशांत दहिया को पुलिस वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया.;
Manjeet Jaglan-Nishant Dahiya Gallantry
(Image Source: X/ @vishalr25690560 )Republic Day 2026: गणतंत्र दिवस 2026 पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की ‘सुपर कॉप’ जोड़ी मंजीत जागलान और निशांत दहिया को पुलिस वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया. यह जोड़ी पिछले कई सालों से आतंकियों और गैंगस्टरों के नेटवर्क को नष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. इन दोनों अधिकारियों की बहादुरी और सूझबूझ ने उन्हें न केवल पुलिस महकमे में बल्कि आम जनता के बीच भी एक मिसाल बना दिया है.
सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड, सलमान खान के घर फायरिंग, मोहाली में RPG अटैक और दिशा पाटनी के घर गोलीबारी जैसी हाई‑प्रोफाइल घटनाओं में इस जोड़ी का योगदान अहम रहा. दोनों अधिकारी दिल्ली पुलिस की एंटी‑टेरर यूनिट, स्पेशल सेल की काउंटर इंटेलिजेंस यूनिट से जुड़े हैं और फ्रंटलाइन ऑपरेशनों में खुद नेतृत्व करते हैं.
बहादुरी और सूझबूझ का प्रतीक
केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा दिए गए पुलिस वीरता पुरस्कार में इन्हें असाधारण बहादुरी और साहसिक कार्रवाइयों के लिए सम्मानित किया गया. दोनों अधिकारी न केवल रणनीति बनाते हैं, बल्कि खुद मैदान में उतरकर ऑपरेशन को अंजाम देते हैं. विरोधियों की गोलीबारी या अंतरराष्ट्रीय गिरोहों के पीछा में ये हमेशा फ्रंटलाइन पर रहते हैं.
हाई‑प्रोफाइल मामलों में निर्णायक भूमिका
मंजीत और निशांत ने सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड, सलमान खान और दिशा पाटनी के घर फायरिंग, मोहाली RPG अटैक, सिंगर बादशाह के कैफे पर गोलीबारी और खालिस्तानी समर्थक अमृतपाल की तलाश जैसे मामलों में निर्णायक भूमिका निभाई. संसद भवन और अन्य संवेदनशील सुरक्षा मामलों में भी इनकी रणनीति और नेतृत्व की सराहना हुई है.
प्रोफाइल और करियर
हरियाणा के रहने वाले 2014 बैच के अधिकारी मंजीत जागलान और निशांत दहिया ने शुरुआत से ही फील्ड में मजबूत पकड़ बनाई. लगातार ऑपरेशनल सफलता, सटीक इंटेलिजेंस इनपुट और साहसिक कार्रवाइयों के चलते उन्हें समय से पहले प्रमोशन मिला. यह जोड़ी उत्तर भारत में सक्रिय कुख्यात गैंगस्टर नेटवर्क के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी है.
इनकी सबसे बड़ी खासियत यह रही कि ऑपरेशन की रणनीति तैयार करने के साथ-साथ खुद मैदान में उतरकर टीम का नेतृत्व करते हैं. चाहे खतरे की स्थिति कितनी भी गंभीर हो, दोनों अधिकारियों ने हमेशा फ्रंटलाइन पर रहकर मिशन को सफल बनाया.