Delhi Excise Policy Case: मेगा रैली से ‘नेशनल रोल’ तक: अदालत के फैसले के बाद AAP की अगली रणनीति क्या?

दिल्ली शराब नीति मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले को आम आदमी पार्टी अपने लिए बड़ा राजनीतिक मोड़ बता रही है. पार्टी 1 मार्च को जंतर-मंतर पर मेगा रैली कर इसे ‘संघर्ष और सच्चाई की जीत’ के रूप में पेश करने की तैयारी में है. सवाल अब यह है कि क्या यह फैसला AAP को राष्ट्रीय राजनीति में नई ताकत देगा?

( Image Source:  X-@AamAadmiParty )
Edited By :  समी सिद्दीकी
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Delhi Excise Policy Case: दिल्‍ली शराब घोटाला मामले में राउज एवेन्‍यू कोर्ट के फैसले को आम आदमी पार्टी (AAP) अपने लिए 'ऐतिहासिक मोड़' मान रही है. पार्टी के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने संकेत दिए हैं कि यह सिर्फ कानूनी राहत नहीं, बल्कि राजनीतिक पुनरुत्थान की शुरुआत है. इसी कड़ी में 1 मार्च को जंतर-मंतर पर एक मेगा रैली का ऐलान किया गया है, जिसमें पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल और वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया शामिल होंगे. पार्टी इसे 'जन आशीर्वाद सभा' के रूप में पेश कर रही है.

इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, AAP ने कहा है कि 1 मार्च की रैली सिर्फ समर्थन जुटाने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि “संघर्ष और सच्चाई” का प्रतीक होगी. पार्टी का दावा है कि मोहल्ला क्लीनिक से हटाए गए डॉक्टर-नर्स और करीब 10,000 बस मार्शल भी अपनी वर्दी में रैली में शामिल होंगे.

पार्टी नेतृत्व इन वर्गों से जुड़े मुद्दों को मंच से उठाएगा. AAP का कहना है कि केजरीवाल ने पहले भी इन कर्मचारियों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई है और अब अदालत के फैसले के बाद वह और मुखर होंगे.

क्या केजरीवाल अब राष्ट्रीय राजनीति में ज्यादा सक्रिय होंगे?

सौरभ भारद्वाज के अनुसार, दिल्ली विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, इसलिए पार्टी प्रमुख की सक्रियता का दायरा राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ सकता है. AAP का मानना है कि हालिया फैसला केजरीवाल की छवि को “बड़े कद के नेता” के रूप में स्थापित करेगा. दिल्ली की सत्ता फिलहाल किसी और के हाथ में है, लेकिन AAP का कहना है कि जनता के मुद्दों पर वह सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष जारी रखेगी. पार्टी के भीतर यह चर्चा तेज है कि केजरीवाल आने वाले महीनों में चुनावी राज्यों में भी सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं, हालांकि इस पर अंतिम निर्णय रणनीतिक बैठकों के बाद होगा.

क्या अदालत का फैसला पार्टी कैडर को नई ऊर्जा देगा?

AAP नेतृत्व का मानना है कि इस फैसले ने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया है. पार्टी के अनुसार, विपक्ष ने केजरीवाल की 'ईमानदार छवि' को निशाना बनाया था, जो उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है. AAP का तर्क है कि केजरीवाल एक पूर्व IRS अधिकारी और IITian रहे हैं, और उनके खिलाफ लंबे समय तक जांच के बावजूद कुछ साबित नहीं हुआ. पार्टी इसे 'साजिश के खिलाफ सत्य की जीत' के रूप में प्रचारित कर रही है. नेतृत्व का दावा है कि इस फैसले के बाद केजरीवाल की छवि और मजबूत हुई है - एक ऐसे नेता के रूप में जो कठिन परीक्षा से गुजरकर बाहर आए हैं.

क्या अब डोर-टू-डोर अभियान तेज होगा?

AAP पहले से ही मंडल स्तर पर सभाएं और बैठकें कर रही है. 21 फरवरी से शहर में 50–60 सभाएं आयोजित की जा चुकी हैं, और यह सिलसिला एक महीने तक जारी रखने की योजना है. अब पार्टी इन सभाओं में शहर के स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ अदालत के फैसले का भी जिक्र करेगी. मकसद यह है कि जनता तक यह संदेश पहुंचे कि पार्टी नेतृत्व कानूनी कसौटी पर खरा उतरा है.

क्या AAP ‘नेशनल रोल’ की तरफ बढ़ रही है?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर केजरीवाल राष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा सक्रिय होते हैं, तो AAP खुद को सिर्फ दिल्ली-केंद्रित पार्टी के बजाय राष्ट्रीय विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश करेगी. पार्टी पहले ही पंजाब में सत्ता में है और अन्य राज्यों में संगठन विस्तार की कोशिश कर रही है. ऐसे में अदालत का फैसला AAP के लिए नैरेटिव बदलने का अवसर बन सकता है.

आगे की राह क्या होगी?

1 मार्च की मेगा रैली AAP की रणनीति का पहला बड़ा कदम होगी. इसके बाद संगठनात्मक बैठकों, जनसभाओं और संभावित राज्य दौरों का खाका तैयार किया जाएगा. पार्टी का दावा है कि यह फैसला उसके राजनीतिक अभियान को नई दिशा देगा. हालांकि, यह देखना बाकी है कि जनता और विपक्ष इस नैरेटिव को किस तरह लेते हैं.

फिलहाल इतना तय है कि अदालत के फैसले के बाद AAP रक्षात्मक मुद्रा से निकलकर आक्रामक राजनीतिक मोड में आ गई है. जंतर-मंतर की रैली से लेकर संभावित राष्ट्रीय सक्रियता तक- आने वाले हफ्ते यह तय करेंगे कि यह “ऐतिहासिक मोड़” कितनी दूर तक असर डालता है.

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