Central Vista Delhi: जिस केंद्रीय सचिवालय भवन का अब होने वाला है अंत, उसका ब्रिटिश किंग जॉर्ज पंचम से क्या है कनेक्शन?
Central Vista Delhi में पुराने केंद्रीय सचिवालय की कहानी, 1911 में राजधानी दिल्ली लाने का फैसला और ब्रिटिश राजा जॉर्ज पंचम से इसका खास कनेक्शन जानिए.
दिल्ली के दिल में स्थित और रायसीना हिल्स का अभिन्न हिस्सा केंद्रीय सचिवालय की इमारतें सिर्फ सरकारी दफ्तर नहीं हैं, बल्कि भारत के औपनिवेशिक इतिहास की जीवित निशानियां हैं. कभी इन्हीं इमारतों से ब्रिटिश राज का प्रशासन चलता था और आजादी के बाद यही भवन भारत सरकार के मंत्रालयों के केंद्र बन गए. लेकिन अब Central Vista Redevelopment Project के तहत इन पुराने कार्यालय भवनों की जगह आधुनिक Common Central Secretariat तैयार किया जा रहा है, जो अंग्रेजी राज का स्थान लेगा. आइए, समझते हैं, दिल्ली में स्थित केंद्रीय सचिवालय कैसे बना देश की सत्ता का पावर सेंटर. अब उसी को सीसीएस के में क्यों विकसित किया जा रहा है.
यहां पर यह समझना जरूरी है कि रायसीना हिल्स के North Block और South Block को गिराया नहीं जा रहा है. ये heritage buildings हैं और इन्हें संरक्षित करते हुए उनका refurbishment और retrofitting किया जाएगा. दूसरी ओर Udyog Bhawan, Shastri Bhawan, Krishi Bhawan, Nirman Bhawan जैसे बाद में बने कार्यालय भवनों को नए Common Central Secretariat के जरिए बदला जाना है.
राजधानी कोलकाता से दिल्ली क्यों लाई गई?
दरअसल, ब्रिटिश भारत की राजधानी लंबे समय तक कलकत्ता यानी आज का कोलकाता थी. लेकिन 12 दिसंबर 1911 को दिल्ली दरबार में ब्रिटिश राजा जॉर्ज पंचम ने भारत की राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा की.
इसके पीछे कई कारण थे. बंगाल विभाजन के बाद पैदा हुआ राजनीतिक संकट ब्रिटिश सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन चुका था. इसके अलावा, दिल्ली का ऐतिहासिक और राजनीतिक महत्व बहुत बड़ा था. मुगल साम्राज्य की राजधानी रहने के कारण दिल्ली को भारत पर शासन की पुरानी सत्ता से जोड़कर देखा जाता था. ब्रिटिशों को उम्मीद थी कि दिल्ली को राजधानी बनाकर वे अपने शासन को भारतीय इतिहास की इसी राजनीतिक परंपरा से जोड़ सकेंगे. फिर दिल्ली शिमला के भी करीब थी, जो गर्मियों में ब्रिटिश प्रशासन की राजधानी के रूप में इस्तेमाल होता था. इसी तरह मसूरी को पहले आईसीएस अधिकारियों के प्रशिक्षण का केंद्र और बाद में आईएएस का प्रशिक्षण केंद्र अंग्रेजों ने मौसम की अनुकूलता की वजह से ही विकसित किया था.
1857 के गदर से क्या था संबंध?
दिल्ली का राजधानी बनना 1857 के विद्रोह की स्मृति से भी जुड़ा था. 1857 के विद्रोह में दिल्ली विद्रोहियों का प्रमुख केंद्र बनी और मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर को प्रतीकात्मक नेतृत्व के रूप में सामने लाया गया. विद्रोह कुचलने के बाद 1858 में ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त हुआ और भारत सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन आ गया. करीब आधी सदी बाद ब्रिटिशों ने दिल्ली को फिर से अपनी सत्ता के केंद्र के रूप में चुना. इसलिए 1911 में राजधानी का दिल्ली आना केवल प्रशासनिक फैसला नहीं था, बल्कि दिल्ली के ऐतिहासिक और राजनीतिक प्रतीकवाद का इस्तेमाल करने की रणनीति भी थी.
कौन थे ब्रिटिश King जॉर्ज पंचम?
जॉर्ज पंचम (George V) ब्रिटेन के राजा और ब्रिटिश साम्राज्य के सम्राट थे. उन्होंने 1910 से 1936 तक शासन किया. 1911 में वे भारत आए और दिल्ली दरबार में स्वयं शामिल हुए. इसी दरबार में राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा हुई.
नई दिल्ली को राजधानी के रूप में विकसित करने की योजना तैयार करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर जैसे वास्तुकारों को जिम्मेदारी दी. रायसीना हिल को प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया.
फिर पुराने सचिवालय का अंत क्यों?
आजादी के बाद इन कार्यालयों में लगातार मंत्रालय बढ़ते गए. कई इमारतें जरूरत के मुताबिक बदली गईं और अतिरिक्त कार्यालय अलग-अलग जगहों पर बनाए गए. परिणाम यह हुआ कि केंद्र सरकार के मंत्रालय कई भवनों में बंट गए.
अब Central Vista के आधिकारिक मास्टर प्लान के अनुसार अभी 51 केंद्रीय मंत्रालयों में से केवल 39 मंत्रालय Central Vista में हैं, जबकि कई कार्यालय परिसर से बाहर हैं. सरकार का कहना है कि इससे प्रशासनिक समन्वय, जगह, सुरक्षा, पार्किंग और रखरखाव की समस्याएं बढ़ी हैं.
इनकी जगह कौन लेगा?
इन बिखरे हुए कार्यालयों की जगह Common Central Secretariat (CCS) विकसित किया जा रहा है. योजना में 10 आधुनिक कार्यालय भवन और एक Central Conference Centre प्रस्तावित हैं. इनमें केंद्र सरकार के सभी 51 मंत्रालयों को एक साथ लाने की योजना है. इन भवनों में करीब 54 हजार सरकारी कर्मचारियों के लिए कार्यालय क्षमता प्रस्तावित है. इन भवनों को आपस में underground Automated People Mover, shuttle और walkways से जोड़ने की योजना है, ताकि अधिकारियों और दस्तावेजों की आवाजाही आसान हो और दिल्ली के यातायात पर दबाव घटे.
किस योजना के तहत हो रहा बदलाव?
यह पूरा काम Central Vista Development/Redevelopment Master Plan के तहत हो रहा है. इसका मकसद केवल पुरानी इमारतों को बदलना नहीं, बल्कि नई दिल्ली के प्रशासनिक केंद्र को फिर से व्यवस्थित करना है.
योजना के तहत नया संसद भवन बन चुका है, Central Vista Avenue का फिॅर से विकसित किया जा रहा है. इस योजना के तहत ही केंद्रीय सचिवालय की जगह Common Central Secretariat तैयार किया जा रहा है. सरकार के मुताबिक इसका लक्ष्य आधुनिक कार्यालय सुविधाओं के साथ Central Vista की मूल architectural character और heritage buildings को संरक्षित करना है.
यानी जिस जगह से कभी ब्रिटिश साम्राज्य भारत पर शासन चलाता था, वही Central Vista अब स्वतंत्र भारत के प्रशासन को नए रूप में संगठित करने जा रहा है. जॉर्ज पंचम के दौर में शुरू हुई इस प्रशासनिक कहानी का अगला अध्याय अब Common Central Secretariat के जरिए लिखा जा रहा है.