Ground Zero: विकास के नाम पर नर्क बना दिल्ली का मोहन गार्डन, आखिर क्यों बदहाली झेल रहे उत्तम नगर के लाखों लोग?
मोहन गार्डन में सीवर का गंदा पानी, जलभराव, खुले मेनहोल और टूटी सड़कें लोगों के लिए मुसीबत बनी हैं. करोड़ों के प्रोजेक्ट के बावजूद राहत का इंतजार है.
दिल्ली के उत्तम नगर का मोहन गार्डन इन दिनों विकास नहीं, बदहाली की ऐसी तस्वीर बन गया है जिसे देखकर लगता है मानो शहर के बीचों-बीच कोई नर्क बस गया हो. रमा पार्क रोड से लेकर गुरुद्वारा रोड, डीके रोड और सोम बाजार रोड तक कई जगह सड़क पर सीवर का गंदा और बदबूदार पानी जमा है. कहीं खुले मेनहोल मौत को न्योता दे रहे हैं तो कहीं महीनों से खुदी सड़कें लोगों की मुश्किल बढ़ा रही हैं. पैदल चलना हो या ई-रिक्शा से निकलना, हर कदम पर हादसे का डर बना रहता है. स्कूल जाने वाले बच्चे, बुजुर्ग, दुकानदार और रोज कमाने-खाने वाले लोग इस बदहाली की कीमत चुका रहे हैं. करोड़ों के प्रोजेक्ट और बार-बार के आश्वासन के बावजूद सवाल यही है- आखिर मोहन गार्डन को इस नर्क से कब मुक्ति मिलेगी?
आखिर करोड़ों के काम के बावजूद सड़कें क्यों बेहाल हैं?
उत्तम नगर AC-32 के मोहन गार्डन इलाके में सड़क और ड्रेनेज से जुड़े कई विकास कार्यों के लिए सरकारी टेंडर जारी किए गए हैं. उदाहरण के तौर पर गुरुद्वारा रोड पर हैप्पी चौक से मोहन मेडिकोज, K-1 एक्सटेंशन तक CC रोड और RCC ड्रेन बनाने के लिए ₹2.80 करोड़ का टेंडर जारी किया गया है. चार महीने से ज्यादा समय से काम चल रहा है.
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यानी कागज पर तस्वीर बदलने की तैयारी है- सीवर और सड़क से जुड़ी समस्या को दूर करने के साथ सड़क को CC रोड में बदलने और जल निकासी के लिए RCC ड्रेन बनाने की योजना है. लेकिन स्थानीय लोगों की शिकायत यह है कि जब तक ये काम पूरे नहीं होते, तब तक उन्हें बदहाल सड़कों, गंदे पानी और निर्माण के कारण पैदा हुई परेशानियों के बीच ही रहना पड़ रहा है.
मोहन गार्डन के दूसरे हिस्सों के लिए भी बड़े बजट के सड़क और ड्रेन प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं. उदाहरण के लिए K-1, K-2 और K-4 ब्लॉक के लिए अलग विकास कार्यों का टेंडर और DK रोड के N, N-1, N-2, N-3 तथा N-Extension ब्लॉक के लिए ₹4.36 करोड़ से अधिक का CC रोड और RCC ड्रेन प्रोजेक्ट सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है.
नजफगढ़ रोड पर सीवर काम इतना लंबा क्यों खिंचा?
नवादा मेट्रो स्टेशन के आसपास नजफगढ़-उत्तम नगर रोड पर सीवर से जुड़ा काम भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बना है. इस हिस्से में धंसी हुई ट्रंक सीवर लाइन की मरम्मत के लिए ट्रेंचलेस तकनीक का इस्तेमाल किया गया, ताकि सड़क को पूरी तरह खोदने से बचाया जा सके. जून में यह काम पूरा होना था. आज 6 अगस्त है, और काम पूरा होने की आगामी कुछ दिनों कोई संभावना नहीं है. काम के दौरान ट्रैफिक डायवर्जन और सड़क पर यातायात प्रभावित होने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ी.
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है. नवादा मेट्रो के पास का काम पूरे इलाके की नई सीवर व्यवस्था नहीं है, बल्कि एक विशेष हिस्से की सीवर लाइन की मरम्मत/बहाली से जुड़ा काम है. स्थानीय लोगों का सवाल इससे भी बड़ा है- अगर छोटे हिस्से की मरम्मत के बाद भी लंबे समय तक यातायात और जलनिकासी प्रभावित रहती है, तो बड़े प्रोजेक्ट पूरे होने में कितना समय लगेगा?
लोगों को कहना है कि मोहन गार्डन निजी कॉलोनी है. विधायक को पता है. उन्हें एक साथ सभी सड़कों को तालाब बनाने वाला काम नहीं करना चाहिए था. एक बाइक चालक ने तो विधायक को भद्दी गाली देने तक से बाज नहीं आया. लोगों का कहना है कि विधायक को रोड का काम बारी बारी से कराना चाहिए था. पूरा इलाका ठप पड़ गया है. जहां नजर जाता है गड्ढे ही गड्ढे और गंदे पानी न जर आते हैं.
क्या रमा पार्क रोड की समस्या का समाधान हुआ?
रमा पार्क रोड इस इलाके की सबसे बड़ी सार्वजनिक समस्याओं में से एक बन चुकी है. स्थानीय लोगों के मुताबिक सड़क पर सीवर और बारिश के पानी का जमाव लंबे समय से परेशानी पैदा कर रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क से गुजरना मुश्किल हो जाता है और दोपहिया वाहन, ई-रिक्शा तथा पैदल चलने वाले लोग विशेष रूप से जोखिम में रहते हैं.
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दो साल पहले मंत्री रहीं आतिशी ने क्या कहा था?
यही समस्या तब भी सामने आई थी, जब अगस्त 2024 में तत्कालीन दिल्ली जल मंत्री आतिशी ने मोहन गार्डन D-ब्लॉक, A-Extension और DK रोड का दौरा किया था. उन्होंने सीवर ओवरफ्लो की स्थिति का जायजा लिया था और अधिकारियों को समस्या के समाधान के निर्देश दिए थे. इसके बाद उन्होंने तत्कालीन मुख्य सचिव को पत्र लिखकर राजधानी में सीवर ओवरफ्लो की समस्या पर कार्रवाई की मांग भी की थी. लेकिन स्थानीय लोगों की शिकायत है कि समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई. यही वजह है कि अब सवाल सिर्फ सीवर का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का भी है.
विधायक के आश्वासन के बाद भी राहत क्यों नहीं?
स्थानीय लोगों के मुताबिक, 14 अगस्त 2025 को क्षेत्रीय विधायक पवन शर्मा ने रमा पार्क रोड पर जलभराव की स्थिति का निरीक्षण किया था. उनके सार्वजनिक संदेश में लगातार बारिश के कारण मोहन गार्डन और उत्तम नगर में जलभराव की समस्या का उल्लेख करते हुए लोगों को जल्द राहत दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कही गई थी. पिछले डेढ़ साल से वो लोगों को फेसबुक पर सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं.
इसके बावजूद स्थानीय निवासियों का दावा है कि एक साल के भीतर हालात सुधरने के बजाय कई जगह और खराब हुए हैं. हालांकि, विधायक की ओर से इस रिपोर्ट के लिए कोई ताजा प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी है. ऐसे में प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि दोनों से यह सवाल पूछा जाना स्वाभाविक है कि निरीक्षण और आश्वासन के बाद समस्या के स्थायी समाधान की स्थिति क्या है?
सड़क पर गंदा पानी, खुले सीवर और स्कूल जाने वाले बच्चे कैसे निकलें?
मोहन गार्डन की समस्या सिर्फ सड़क पर पानी भरने तक सीमित नहीं है. स्थानीय लोगों का कहना है कि कई जगह सीवर का पानी सड़क पर जमा रहता है और खुले मेनहोल तथा खुदी सड़कें दुर्घटना का खतरा बढ़ा रही हैं. रमा पार्क रोड और आसपास के रास्तों पर दुकानदारों और ई-रिक्शा चालकों का कहना है कि खराब सड़क और गंदे पानी के कारण लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है.
सबसे गंभीर चिंता उन बच्चों को लेकर है जो रोजाना आसपास के निजी स्कूलों में पढ़ने जाते हैं. संकरी और बदहाल सड़कों पर सीवर का पानी जमा होने से पैदल चलने वाले बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए जोखिम बढ़ जाता है.
स्थानीय ई-रिक्शा चालक नीरज गुप्ता का कहना है कि इलाके में लोगों की शिकायतें सुनने वाला कोई नहीं है. उनके मुताबिक, सड़क की हालत के कारण रोजमर्रा की आवाजाही मुश्किल हो गई है. रमा पार्क रोड पर ढाबा चलाने वाले शिव कुमार का दावा है कि सड़क की खराब स्थिति का असर कारोबार पर भी पड़ा है. उनके मुताबिक, ग्राहकों की आवाजाही कम होने से दुकान का काम लगभग आधा रह गया है. डीके रोड के दुकानदार राजीव गोयल भी सड़क और सीवर की स्थिति से परेशान हैं. उनका कहना है कि लंबे समय से खुदाई और खुले सीवर के कारण ग्राहकों के लिए दुकान तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है.
क्या करोड़ों की योजनाएं जमीन पर भी दिखेंगी?
सरकारी रिकॉर्ड यह बताता है कि मोहन गार्डन और उत्तम नगर में सिर्फ एक-दो नहीं, बल्कि कई बड़े सड़क और ड्रेनेज प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं. गुरुद्वारा रोड के एक हिस्से के लिए ₹2.80 करोड़ का काम है, जबकि दूसरे हिस्से के लिए करीब ₹3.46 करोड़ का CC रोड और RCC ड्रेन प्रोजेक्ट दर्ज है. वहीं मोहन गार्डन के A-1, Q-1, Q, J, K और भगवती गार्डन एक्सटेंशन क्षेत्र के लिए करीब ₹4.43 करोड़ का अलग प्रोजेक्ट भी सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है.
इससे साफ है कि सरकार ने इलाके की सड़क और जलनिकासी समस्या के लिए बड़े स्तर पर बजट की योजना बनाई है. लेकिन असली कसौटी टेंडर जारी होना नहीं, बल्कि काम का समय पर पूरा होना और लोगों को वास्तविक राहत मिलना है.
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आखिर जवाबदेही किसकी है?
मोहन गार्डन की तस्वीर एक ऐसे इलाके की कहानी कहती है जहां विकास के नाम पर योजनाएं और टेंडर तो लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का धैर्य जवाब देता दिख रहा है. जनता का सवाल सीधा है. अगर समस्या वर्षों से मौजूद है, अगर मंत्री और जनप्रतिनिधि मौके का निरीक्षण कर चुके हैं, अगर करोड़ों रुपये के काम प्रस्तावित हैं, तो फिर सड़क पर वही गंदा पानी, वही खुले सीवर और वही जलभराव क्यों दिखाई देता है?
सरकार के लिए यह सिर्फ एक सड़क या एक मोहल्ले की समस्या नहीं होनी चाहिए. यह उन हजारों परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी का सवाल है जो इन्हीं रास्तों से स्कूल, दुकान, दफ्तर और घर तक पहुंचते हैं. विकास का मतलब केवल टेंडर और बजट नहीं, बल्कि काम पूरा होने के बाद नागरिक को सुरक्षित सड़क, साफ रास्ता और सम्मानजनक जीवन मिलना है.
मोहन गार्डन के लोगों को अब एक और निरीक्षण या आश्वासन नहीं, काम पूरा होने की तारीख और जमीन पर दिखाई देने वाली राहत चाहिए. वरना करोड़ों की योजनाएं भी उन लोगों के लिए सिर्फ कागज पर विकास की कहानी बनकर रह जाएंगी, जिनके घरों के बाहर आज भी सीवर का पानी बह रहा है.