दिल्ली, ग्रुरुग्राम और नोएडा में एयर टैक्सी का सपना जल्‍द बनेगा हकीकत! जानें क्या है फेज वाइज़ पूरा प्लान

नोएडा, गुरुग्राम और दिल्ली में एयर टैक्सी चलाने का प्लान किया जा रहा है. ये प्लान ट्रैफिक के मद्देनजर बनाया जा रहा है. फिलहाल इसका इस्तेमाल ऑर्गन ट्रांसफर के लिए किया जाएगा.;

( Image Source:  AI GENERATED IMAGE )
Edited By :  समी सिद्दीकी
Updated On :

Air Taxi between Delhi NCR: देश में ट्रैफिक जाम और लंबा सफर समय कम करने के लिए जल्द ही एयर टैक्सी जैसी नई सुविधा की शुरुआत हो सकती है. भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि गुरुग्राम, कनॉट प्लेस और नोएडा के जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को जोड़ने वाला एक पायलट कॉरिडोर तैयार कर एयर टैक्सी सिस्टम शुरू किया जा सकता है.

अगर ऐसा होता है तो शहरों के बीच यात्रा का समय घंटों से घटकर कुछ ही मिनटों में सिमट सकता है और बुनियादी ढांचे पर पड़ने वाला दबाव भी कम होगा.

क्या नोएडा, दिल्ली और ग्रुरुग्राम के बीच चलेगी टैक्सी?

रिपोर्ट के मुताबिक, एयर टैक्सी सेवाएं अस्पतालों और व्यावसायिक इमारतों की छतों से संचालित की जा सकती हैं. शुरुआती फेस में इनका इस्तेमाल अंग प्रत्यारोपण के लिए अंगों के परिवहन और दूसरी मेडिकल इमरजेंसी जैसे मिशनों में किया जा सकता है.

कैसे होगा एयर टैक्सी का प्लान कामयाब?

  • CII की रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा सतही परिवहन के हालात को देखते हुए भारत के लिए अगला कदम एडवांस्ड एयर मोबिलिटी समाधान अपनाना है. इसमें इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग विमान, यानी एयर टैक्सी, भारतीय हवाई क्षेत्र में उड़ान भर सकेंगे. इसके लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के अंदर या उसके तहत एक नया नियामक ढांचा तैयार किया जा सकता है.
  • ‘एडवांस्ड एयर मोबिलिटी’ पर यह रिपोर्ट नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू किंजरापु के जरिए जारी की गई. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह पहल शहरी ट्रैफिक जाम की दिक्कत का असरदार समाधान बन सकती है. इसमें फेज़वाइज़ तरीके से नई पीढ़ी की एयर मोबिलिटी सेवाओं को सुरक्षित रूप से विमानन प्रणाली में शामिल करने की योजना भी बताई गई है.
  • रिपोर्ट में खास तौर पर रूफटॉप वर्टीपोर्ट्स यानी छतों पर बने टेक-ऑफ और लैंडिंग पॉइंट्स पर जोर दिया गया है. इसमें कहा गया है कि दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में यह तरीका ज्यादा किफायती, व्यावहारिक और तेजी से लागू किया जा सकता है.
  • जमीन पर वर्टीपोर्ट बनाने के लिए जमीन अधिग्रहण महंगा और नियमों के कारण समय लेने वाला होता है, जबकि व्यावसायिक इमारतों, अस्पतालों, टेक पार्क और रिहायशी टावरों की छतें पहले से मौजूद और कम इस्तेमाल में हैं.
  • रिपोर्ट में टेस्ट के लिए एक फेज़वाइज़ प्लान भी बताया गया है. इसके तहत पहले ड्रोन डिलीवरी, फिर मेडिकल लॉजिस्टिक्स और अंग परिवहन, और बाद में एयर एंबुलेंस सेवाएं शुरू की जा सकती हैं.


एयर टैक्सी प्लान इन्फोग्राफिक /* ===== यूनिक क्लास नेम्स ===== */ body.aam-infobody { background-color: #e9f6ff; font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; color: #0c2d44; padding: 20px; } .aam-card { max-width: 950px; margin: auto; background: #ffffff; border-radius: 16px; padding: 26px; box-shadow: 0 6px 18px rgba(0,0,0,0.12); } .aam-title { text-align: center; font-size: 30px; font-weight: bold; color: #005fa3; margin-bottom: 24px; } .aam-section { margin-bottom: 26px; } .aam-section h3 { font-size: 20px; color: #007acc; border-left: 5px solid #7fc8ff; padding-left: 12px; margin-bottom: 10px; } .aam-list { padding-left: 22px; } .aam-list li { margin-bottom: 8px; line-height: 1.6; } .aam-highlight { font-weight: bold; color: #004f8c; } .aam-grid { display: grid; grid-template-columns: repeat(auto-fit, minmax(220px, 1fr)); gap: 14px; } .aam-box { background: #f2f9ff; border: 1px solid #cfe9ff; border-radius: 12px; padding: 14px; } .aam-box span { display: block; font-size: 17px; font-weight: bold; color: #005fa3; margin-bottom: 6px; }
कैसे होगा एयर टैक्सी का प्लान कामयाब?

CII रिपोर्ट क्या कहती है?

  • भारत को अगला कदम एडवांस्ड एयर मोबिलिटी अपनाने का
  • इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग विमान (एयर टैक्सी) की जरूरत
  • मौजूदा सतही परिवहन और बढ़ते ट्रैफिक जाम को देखते हुए सुझाव

नियामक ढांचा (Regulatory Framework)

  • DGCA के अंदर या उसके तहत नया रेगुलेटरी फ्रेमवर्क
  • एयर टैक्सी को भारतीय हवाई क्षेत्र में उड़ान की अनुमति
  • सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए नियम तैयार करने का सुझाव

रिपोर्ट किसने जारी की?

  • ‘एडवांस्ड एयर मोबिलिटी’ रिपोर्ट जारी
  • नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू किंजरापु के जरिए
  • नई पीढ़ी की एयर मोबिलिटी सेवाओं को चरणबद्ध तरीके से जोड़ने की योजना

रूफटॉप वर्टीपोर्ट्स पर जोर क्यों?

  • छतों पर बने टेक-ऑफ और लैंडिंग पॉइंट्स ज्यादा व्यावहारिक
  • दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों के लिए उपयुक्त
  • जमीन पर वर्टीपोर्ट बनाना महंगा और समय लेने वाला
  • अस्पताल, टेक पार्क और रिहायशी टावरों की छतें पहले से मौजूद

फेज़वाइज़ टेस्ट प्लान

पहला चरण ड्रोन डिलीवरी सेवाएं
दूसरा चरण मेडिकल लॉजिस्टिक्स और अंग परिवहन
तीसरा चरण एयर एंबुलेंस सेवाएं

क्यों अहम है यह पहल?

  • शहरी ट्रैफिक जाम की समस्या का असरदार समाधान
  • तेज, सुरक्षित और आधुनिक परिवहन व्यवस्था की ओर कदम
  • भविष्य की विमानन प्रणाली में नई तकनीक का समावेश


क्या छतों से टेकऑफ की मिलेगी परमिशन?

हालांकि रिपोर्ट यह भी साफ करती है कि मौजूदा DGCA नियमों के तहत छतों से नियमित व्यावसायिक वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग की इजाजत नहीं है. भविष्य में ऐसी परमिशन तभी दी जाएगी जब नियमों में बदलाव होगा और सुरक्षा से जुड़ी सभी जांच पूरी होंगी.

फंडिंग को लेकर रिपोर्ट में कहा गया है कि सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों जैसे SIDBI, बैंक और सरकारी अनुदान एजेंसियों को एडवांस्ड एयर मोबिलिटी के लिए विशेष वित्तीय साधन तैयार करने चाहिए. इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर फंड, वेंचर लीजिंग मॉडल और निवेश जोखिम कम करने वाली क्रेडिट सुविधाएं शामिल हो सकती हैं, ताकि इस क्षेत्र में लंबे समय तक पूंजी निवेश संभव हो सके.

Similar News