सरेआम फाड़ी गई महिला कॉन्स्टेबल की वर्दी, फिर दी गंदी गालियां और खेत में पीटा, विरोध प्रदर्शन कर रहे युवक की दरिंदगी का Video वायरल
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से एक मामला सामने आया है, जिसने कानून, सुरक्षा और महिलाओं की गरिमा पर कई सवाल खड़े कर दिए. खनन विरोधी आंदोलन के बीच ड्यूटी पर तैनात एक महिला कॉन्स्टेबल भीड़ के गुस्से की शिकार हो गई. जहां उनकी वर्दी फाड़ी गई, गालियां दी गईं और मदद की गुहार अनसुनी कर दी गई.;
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से सामने आई यह घटना इंसानियत और कानून, दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करती है. विरोध प्रदर्शन की आड़ में जिस तरह एक ड्यूटी पर तैनात महिला कॉन्स्टेबल के साथ सरेआम बर्बरता की गई, उसने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है.
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वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे महिला पुलिसकर्मी की वर्दी फाड़ी जाती है, उसे अश्लील गालियां दी जाती हैं और फिर खेत में घसीटकर बेरहमी से पीटा जाता है. यह सिर्फ एक महिला पर हमला नहीं, बल्कि वर्दी, कानून और सुरक्षा व्यवस्था पर सीधा वार है, जिसने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर भीड़ की हिंसा कब तक कानून से ऊपर रहेगी.
क्या है मामला?
दिसंबर की सर्द सुबह, रायगढ़ के लिब्रा चौक पर सैकड़ों ग्रामीण जुटे थे. मुद्दा धौराभाठा में हुई सार्वजनिक सुनवाई और उससे जुड़ा कोयला खनन था. 14 गांवों के लोग कई दिनों से धरने पर थे. 27 दिसंबर को सड़क जाम हुआ, यातायात रुका और पुलिस मौके पर पहुंची. यहीं से हालात बिगड़ते चले गए.
महिला कॉन्स्टेबल की फाड़ी वर्दी
भीड़ में फंसी महिला कॉन्स्टेबल जमीन पर गिर पड़ी. वीडियो में वह हाथ जोड़कर खुद को छोड़ देने की अपील करती दिखी“भाइयों” कहकर रहम की गुहार. वह बताती रही कि उसे दूसरे इलाके से ड्यूटी पर भेजा गया है, गलती हो गई है. मगर दो लोग उसके करीब आकर वर्दी खींचते रहे. धमकियां दी गईं, अपशब्द कहे गए. सवाल उठता है कि क्या किसी महिला की सुरक्षा, वह भी ड्यूटी पर, इतनी सस्ती है?
वायरल हो रहा वीडियो
यह वीडियो खुद प्रदर्शनकारियों ने रिकॉर्ड किया था. बाद में सोशल मीडिया पर यह तेजी से फैल गया. इससे पहले इसी घटना का एक और क्लिप सामने आया था, जिसमें एक महिला टाउन इंस्पेक्टर के साथ मारपीट का दावा किया गया. भीड़ का उन्माद, कैमरे की बेपरवाही और कानून का डर तीनों कहीं खोते नजर आए.
आरोपी हुए गिरफ्तार
वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आई. रायगढ़ पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया. कार्रवाई हुई, पर क्या इससे भरोसा लौटेगा? क्या भीड़ के बीच कानून की ढाल कमजोर पड़ गई थी? और अगर कैमरा न होता, तो क्या सच सामने आता?
विरोध का अधिकार, पर सीमा कहां?
लोकतंत्र में असहमति और विरोध जरूरी हैं, लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि वर्दी की इज्जत तार-तार कर दी जाए? क्या महिलाओं की सुरक्षा तभी मायने रखती है, जब वे घर में हों-ड्यूटी पर नहीं? यह घटना सिर्फ एक महिला कॉन्स्टेबल की नहीं, बल्कि व्यवस्था की कसौटी है. अगर ड्यूटी पर तैनात महिला सुरक्षित नहीं, तो आम महिला की सुरक्षा का भरोसा कैसे किया जाए? रायगढ़ की यह सुबह हमें आईना दिखाती है किविरोध की आवाज़ जरूरी है, मगर इंसानियत से ऊपर कुछ नहीं.