मिलिए बिहार में BJP के पहले गृह मंत्री से... विवादों, दलबदल और सत्ता संतुलन के बीच कैसे उभरे सम्राट चौधरी?

बिहार में NDA की सरकार बनने के बाद पहली बार गृह मंत्रालय बीजेपी के हाथ आया है, जिसे डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को सौंपकर पार्टी ने बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है. RJD से शुरुआत, विवादों, दलबदल और तेज़ी से बढ़ती संगठनात्मक पकड़ ने उन्हें BJP का केंद्रीय चेहरा बना दिया है. OBC समीकरण साधने में सम्राट की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है. गृह विभाग मिलने के बाद वे अब कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन के सबसे प्रभावशाली पद पर काबिज हो गए हैं.;

( Image Source:  ANI )
Edited By :  अच्‍युत कुमार द्विवेदी
Updated On : 22 Nov 2025 11:11 PM IST

Samrat Choudhary Bihar Home Minister Political Journey : बिहार में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नई सरकार का गठन किया, तो सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश गृह विभाग की जिम्मेदारी बदलने से आया. लगभग दो दशक तक इस अहम मंत्रालय को अपने पास रखने वाले नीतीश कुमार ने इसे बीजेपी को सौंप दिया... और पार्टी ने इसे अपने डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को देकर सत्ता समीकरणों में बड़ा उलटफेर कर दिया.

57 वर्षीय सम्राट चौधरी पहली बार बिहार में BJP की ओर से गृह मंत्री बने हैं. पुलिस प्रशासन, कानून-व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर अब सीधे उनकी पकड़ होगी. बीजेपी के लिए यह सिर्फ एक मंत्रालय नहीं, बल्कि राज्य में अपना राजनीतिक वर्चस्व स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम है.

RJD से शुरुआत, विवाद और पहली एंट्री

मूंजर के लखनपुर गांव से आने वाले सम्राट चौधरी की राजनीति की शुरुआत 1990 में लालू प्रसाद की पार्टी RJD से हुई. उनके पिता शकुनी चौधरी भी तारापुर से कई बार विधायक रहे और क्षेत्रीय राजनीति में एक चेहरे के रूप में स्थापित थे. 1999 में सम्राट अपने राजनीतिक करियर की पहली बड़ी सीढ़ी चढ़ते हुए राबड़ी देवी सरकार में कृषि मंत्री बने, वह भी तब जब वे न तो विधायक थे और न ही एमएलसी, लेकिन मंत्री बनने के साथ ही उन पर आयु संबंधी विवाद खड़ा हो गया और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा.

1995 तारापुर केस- पुराना मामला जो आज भी पीछा करता है

1995 के तारापुर विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी सच्चिदानंद सिंह और उनके साथियों की ग्रेनेड हमले में मौत एक बड़ा विवाद बना. सम्राट चौधरी और उनके पिता पर आरोप लगे, लेकिन सबूत न मिलने पर मामला बंद हो गया. यह विवाद 2025 के चुनाव में फिर उठा, जब प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि सम्राट ने अपने नाबालिग होने का दावा कर बेल कराने के लिए उम्र गलत बताई थी.

चौधरी ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि न तो उन्हें कभी चार्जशीट किया गया और न अदालत ने नाबालिग होने का दावा माना. उन्होंने शैक्षणिक योग्यता पर उठाए गए सवालों को भी बेबुनियाद बताया और कहा कि उन्होंने कामराज यूनिवर्सिटी से ‘प्री-फाउंडेशन कोर्स’ किया है और 2019 में उन्हें डॉक्टरेट की मानद डिग्री मिली.

RJD से JD(U), फिर BJP- तेजी से बदलते राजनीतिक ठिकाने

1999 के इस्तीफे के बाद 2000 में वे परबत्ता सीट से RJD के टिकट पर विधायक बने. पार्टी में उनकी पकड़ बढ़ी और 2010 में वे पार्टी के चीफ व्हिप बने... लेकिन 2014 में उन्होंने अचानक RJD छोड़ दिया और नीतीश कुमार की JD(U) में शामिल हो गए. यही नहीं, उन्होंने 13 RJD विधायकों को भी JD(U) में ले जाने का दावा किया, जिससे उन्हें बिहार की राजनीति में मास्टर स्ट्रैटेजिस्ट माना जाने लगा... जीतन राम मांझी की सीएम अवधि में वे शहरी विकास मंत्री बने. 2017 में वे BJP में शामिल हुए और यहां उनकी तेजी से पदोन्नति शुरू हुई. वे राज्य उपाध्यक्ष बने, फिर 2022 में बिहार विधान परिषद में विपक्ष के नेता, और 2023 में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष...

OBC समीकरण और BJP की रणनीति में केंद्रीय भूमिका

कोईरी समुदाय से आने वाले सम्राट चौधरी को BJP ने अपने OBC विस्तार का प्रमुख चेहरा बनाया. बिहार में इस समुदाय की निर्णायक भूमिका रही है और यह लंबे समय से नीतीश कुमार का कोर सपोर्ट बेस माना जाता था. BJP ने इस आधार को तोड़ने के लिए सम्राट पर बड़ा दांव लगाया. 2024 में जब नीतीश एक बार फिर महागठबंधन छोड़कर NDA में लौटे, सम्राट को डिप्टी सीएम बनाया गया. वित्त जैसे अहम मंत्रालय भी उन्हें सौंपे गए, जो स्पष्ट संकेत था कि BJP उन्हें भविष्य के बड़े चेहरे के रूप में तैयार कर रही है. 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने तारापुर से 45,000 से अधिक वोटों से जीत दर्ज की. यह उनकी बढ़ती लोकप्रियता का प्रमाण माना गया.

गृह मंत्रालय मिलना BJP के लिए क्या मायने रखता है?

बिहार की कानून-व्यवस्था का नियंत्रण BJP के हाथ आने के बाद पार्टी अब प्रशासनिक ताकत का भी सीधा हिस्सा बन गई है. यह बदलाव नीतीश-नेतृत्व वाले गठबंधन में BJP की बढ़ती केंद्रीयता को दर्शाता है. सम्राट चौधरी की नियुक्ति से पार्टी को OBC वोट बैंक मजबूत करने, अपने प्रशासनिक भरोसे को साबित करने और भविष्य के बड़े नेतृत्व की तैयारी करने का मौका मिला है.

बिहार BJP का नया केंद्रीय चेहरा

लगातार दल-बदल, विवादों और राजनीतिक मोड़ के बावजूद सम्राट चौधरी का राजनीतिक ग्राफ लगातार ऊपर गया है. उनकी संगठन क्षमता, आक्रामक राजनीतिक शैली और सामाजिक समीकरणों पर पकड़ ने उन्हें BJP का अनिवार्य चेहरा बना दिया है. गृह मंत्रालय का कार्यभार लेकर वे न केवल राज्य की कानून-व्यवस्था की कमान संभालेंगे, बल्कि बिहार की सत्ता राजनीति में BJP की नई भूमिका के केंद्र में भी रहेंगे.

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