'मेरे वोट से बने CM, उन्हें कोई हटा नहीं सकता!' नीतीश के राज्यसभा जाने की खबरों पर रो पड़े JDU नेता
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच JDU नेता राजीव रंजन पटेल भावुक हो गए. बोले- “मेरे वोट से बने CM को कोई हटा नहीं सकता”, निशांत कुमार को राज्यसभा भेजने की मांग.
बिहार की राजनीति में उस वक्त हलचल मच गई जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं. इस बीच जेडीयू नेता राजीव रंजन पटेल ने खुलकर अपनी नाराज़गी जाहिर की और कहा कि अगर किसी को राज्यसभा भेजना है तो मुख्यमंत्री के बेटे निशांत कुमार को भेजा जाए, लेकिन बिहार की कमान नीतीश कुमार के ही हाथों में रहनी चाहिए.
पटेल ने दावा किया कि इस खबर से जेडीयू के हजारों कार्यकर्ता दुखी हैं और कई लोग रो भी रहे हैं. उनका कहना है कि जनता ने वोट किसी और के लिए नहीं बल्कि नीतीश कुमार के नाम पर दिया था. ऐसे में यदि कोई बड़ा फैसला लिया जाता है तो पहले पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता की राय ली जानी चाहिए. उनके बयान ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है.
“बिहार की जनता रो रही है” - JDU नेता का बड़ा दावा
जेडीयू नेता राजीव रंजन पटेल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश के राज्यसभा जाने की चर्चा से पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भारी निराशा है. उन्होंने कहा कि होली जैसे बड़े त्योहार के बावजूद कई कार्यकर्ताओं ने जश्न नहीं मनाया. पटेल के मुताबिक, “बिहार की जनता रो रही है. हजारों कार्यकर्ताओं के फोन आ रहे हैं. महिलाओं और कार्यकर्ताओं ने बताया कि वे दुखी हैं.”
“अगर राज्यसभा भेजना है तो निशांत को भेजें”
पटेल ने साफ कहा कि यदि पार्टी नेतृत्व किसी को राज्यसभा भेजना चाहता है तो मुख्यमंत्री के बेटे निशांत कुमार को भेजा जा सकता है. उनका कहना था कि इससे संगठन और सरकार दोनों संतुलित रहेंगे, लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी नीतीश कुमार के पास ही रहनी चाहिए.
“नीतीश के नाम पर मांगे गए थे वोट”
जेडीयू नेता ने यह भी कहा कि चुनाव के दौरान कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर वोट मांगे थे और लोगों से कहा था कि नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाना है. उन्होंने कहा, “हमने किसी और के नाम पर वोट नहीं मांगे थे. जनता ने भी नीतीश कुमार के नाम पर ही समर्थन दिया था.”
“कार्यकर्ताओं से पूछे बिना फैसला क्यों?”
पटेल ने पार्टी नेतृत्व के संभावित फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि इतना बड़ा निर्णय लिया जा रहा है तो पहले कार्यकर्ताओं से राय लेनी चाहिए थी. उनके मुताबिक, पार्टी कार्यकर्ताओं को बुलाया जाना चाहिए था और उनसे सलाह-मशविरा किया जाना चाहिए था. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं की अनदेखी से संगठन में असंतोष बढ़ सकता है.
“नीतीश कुमार का स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक है?
राजनीतिक अटकलों के बीच पटेल ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सेहत को लेकर फैल रही चर्चाएं गलत हैं. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पूरी तरह स्वस्थ हैं और उनके साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ है जिससे उन्हें पद छोड़ना पड़े.