Vande Bharat Sleeper Train में सिर्फ वेज खाना? नॉवेज के लिए TMC-BJP के बीच छिड़ी बड़ी बहस
देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन, जो असम के कामाख्या से पश्चिम बंगाल के हावड़ा के बीच चल रही है, अपने आधुनिक फीचर्स के साथ-साथ खाने को लेकर विवाद में आ गई है. रिपोर्ट्स के अनुसार, इस ट्रेन में फिलहाल केवल शाकाहारी भोजन ही परोसा जा रहा है. नॉन-वेज विकल्प न होने पर तृणमूल कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर ‘शाकाहार थोपने’ का आरोप लगाया है, जबकि बीजेपी ने इसे बेवजह की राजनीति बताया. IRCTC बुकिंग में भी भोजन चयन का विकल्प नहीं है. रेलवे की ओर से अभी कोई आधिकारिक बदलाव घोषित नहीं किया गया है.;
देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन असम के कामाख्या से पश्चिम बंगाल के हावड़ा के बीच चल रही है. लोगों ने इसे 'मिनी बुलेट ट्रेन' भी कहना शुरू कर दिया है, क्योंकि यह काफी तेज और आधुनिक है. यह ट्रेन अधिकतम 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है। अभी के समय में भारतीय रेलवे की यह सबसे तेज चलने वाली ट्रेन मानी जा रही है. ट्रेन में बहुत सारी नई सुविधाएं और अच्छी तकनीक है, जिसकी वजह से यह काफी चर्चा में है. लेकिन अभी सबसे ज्यादा बात हो रही है इसके भोजन को लेकर सवाल यह है कि क्या इस ट्रेन में सिर्फ शाकाहारी (वेज) खाना ही मिलता है? क्या नॉन-वेज (मांसाहारी) भोजन बिल्कुल नहीं दिया जाता?
दरअसल, इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच खूब बहस छिड़ गई है. टीएमसी का आरोप है कि केंद्र सरकार और रेलवे ने जानबूझकर इस ट्रेन में केवल शाकाहारी भोजन रखा है. उन्होंने इसे 'शाकाहार थोपना' बताया है. टीएमसी के नेता कुणाल घोष ने कहा कि बंगाल और असम की संस्कृति में मछली, मांस और अंडा बहुत महत्वपूर्ण हैं. ये चीजें वहां की खान-पान की परंपरा का बड़ा हिस्सा हैं. जब यात्री पूरा किराया दे रहे हैं, तो उन्हें भोजन का ऑप्शन क्यों नहीं दिया जा रहा? उन्होंने कहा कि यह केंद्र सरकार की कोशिश है कि देश की विविधता को कम करके एक खास तरह के खान-पान को बढ़ावा दिया जाए.
इसपर राजनीति करना बेकार
दूसरी तरफ, बीजेपी ने इन आरोपों को बिल्कुल बेबुनियाद बताया. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि इस बात पर राजनीति करना बेकार है. अगर यात्रियों को नॉन-वेज चाहिए, तो वे रेलवे से मांग करें. इसमें बीजेपी को क्यों घसीटा जा रहा है? उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि टीएमसी की सरकार ने खुद राज्य में मिड-डे मील स्कीम से अंडा हटाया था, तब उन्हें खान-पान की विविधता की याद क्यों नहीं आई?.
अब असली बात क्या है?
IRCTC की वेबसाइट पर जब कामाख्या-हावड़ा वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का टिकट बुक करने की कोशिश की गई, तो वहां भोजन चुनने का कोई ऑप्शन ही नहीं दिख रहा था यानी दूसरी ट्रेनों की तरह यहां वेज या नॉन-वेज चुनने की सुविधा नहीं है. बुकिंग के दौरान एक मैसेज आता है कि 'कैटरिंग सर्विस टाइमिंग के अनुसार उपलब्ध होगी'. रिपोर्ट्स और समाचारों के अनुसार, इस ट्रेन में केवल शाकाहारी भोजन ही परोसा जा रहा है. मेन्यू में बासंती पुलाव, छने की दालना, वेज पुलाव, लाबड़ा, ग्रीन पी कचौड़ी, नारियल बर्फी जैसी चीजें शामिल हैं. मछली, मांस या अंडा जैसा कोई नॉन-वेज आइटम नहीं है.
तीर्थस्थल स्थल से जुड़ी है ट्रेन
कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि ट्रेन कामाख्या मंदिर (जो एक बड़ा तीर्थस्थल है) और हावड़ा जैसे जगहों को जोड़ती है, इसलिए शुद्ध शाकाहारी मेन्यू रखा गया. लेकिन यात्रियों की शिकायतें भी आ रही हैं कि खाने की क्वालिटी अच्छी नहीं है, पोर्शन कम हैं, और कई चीजें जैसे दाल आदि उपलब्ध नहीं हो पातीं. तो कुल मिलाकर, अभी कामाख्या-हावड़ा वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में सिर्फ शाकाहारी भोजन ही दिया जा रहा है. नॉन-वेज की सुविधा नहीं है. इस वजह से राजनीतिक पार्टियों के बीच बहस तेज हो गई है, और यह मुद्दा काफी चर्चा में बना हुआ है. रेलवे की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बदलाव या नॉन-वेज जोड़ने की घोषणा नहीं हुई है.