क्या सच में असम का मयोंग गांव है 'काला जादू की राजधानी'? टोना-टोटका करवाने आते हैं नेता

असम के मयोंग गांव की भी खूब चर्चा हो रही है. दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक असम के मयोंग गांव को देश में काला जादू की राजधानी के रूप में जाना जाता है.

असम का मयोंग गांव

(Image Source:  X/ @yajnshri )
Edited By :  विशाल पुंडीर
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असम में 9 अप्रैल 2026 को विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. जिसको लेकर सभी पार्टियों अपनी-अपनी कमर कस ली है. बड़े शहरों से लेकर छोटे-छोटे गांव तक को सभी पार्टी साधने में लगी है. इस बीच असम के मयोंग गांव की भी खूब चर्चा हो रही है. दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक असम के मयोंग गांव को देश में काला जादू की राजधानी के रूप में जाना जाता है. ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे स्थित यह छोटा सा गांव सदियों से तंत्र विद्या और जादू-टोना के लिए मशहूर रहा है. लगभग तीन हजार की आबादी वाले इस गांव में लोग मानते हैं कि उनके मंत्र इतने शक्तिशाली हैं कि वे किसी को हवा में गायब कर सकते हैं या उसे जानवर में बदल सकते हैं.

हाल ही में, विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र मयोंग की साख और भी चर्चा में आई है. बताया जाता है कि कई राजनेता जीत सुनिश्चित करने के लिए इस गांव में आकर तांत्रिक अनुष्ठान करवाने लगे हैं. हालांकि गांव में राजनीतिक बैनर या पोस्टर नहीं हैं, लेकिन कुछ घरों पर भाजपा के झंडे लगे दिखाई देते हैं.

क्या है गांव की ऐतिहासिक पहचान?

मयोंग गांव गुवाहाटी से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित है और इसके पास पोबितोरा वन्यजीव अभ्यारण्य है, जो एक सींग वाले गैंडे के लिए प्रसिद्ध है. गांव के तांत्रिकों का दावा है कि दिल्ली के सुल्तान तुगलक की सेना के एक लाख सैनिक मयोंग के जंगलों में गायब हो गए थे. गांव का इतिहास भी रहस्यमय घटनाओं से भरा है. माना जाता है कि मुगल सम्राट औरंगजेब के कहने पर जयपुर के राजा राम सिंह को भी मयोंग के जादू के बारे में पता चला तो उन्होंने यहां आक्रमण किया लेकिन उनको हार के बाद संधि करके वापस लौटना पड़ा था.

क्या बोले गांव के तांत्रिक?

रिपोर्ट के मुताबिक गांव में लगभग हर घर में एक तांत्रिक रहता है. विपुल मेधी, जो गांव के सबसे बड़े तांत्रिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं, बताते हैं कि उनका परिवार पीढ़ियों से तंत्र साधना करता आया है. विपुल कहते हैं, “लोग बीमारी, मानसिक समस्याओं और कभी-कभी शत्रुओं को हराने के लिए भी आते हैं लेकिन हम गलत काम नहीं करते. पहले उनकी मंशा पूछते हैं मैं डायरी में नाम लिखता हूं ताकि भविष्य में गलत मंशा वाले लोगों का पता लगाया जा सके.”

राजनीति का मयोंग से कनेक्शन

मयोंग गांव विधानसभा क्षेत्र जागीरोड में आता है. भाजपा के पीयूष हजारिका यहां से विधायक हैं और लगातार तीसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं. गांव के तांत्रिकों का कहना है कि नेता वोट मांगने नहीं बल्कि जादू-टोना करवाने आते हैं. इसको लेकर विपुल मेधी ने कहा “राजनेता, महत्वपूर्ण व्यक्ति, सब आते हैं. सबकी अपनी-अपनी समस्याएं होती हैं. अगर कोई दूसरों को हराने आता है, तो हम उसे भगा देते हैं.” गांव में खुदाई के दौरान पुरानी तलवारें और तांबे की प्लेटें मिलीं, जिन पर मंत्र खुदे हुए थे. ये वस्तुएं अब मयोंग के संग्रहालय में रखी गई हैं.

काले-जादू का महाभारत से क्या कनेक्शन?

मयोंग कभी यह एक छोटा राज्य हुआ करता था. सांस्कृतिक परंपरा के अनुसार गांव में एक व्यक्ति को राजा की उपाधि दी जाती है जो फिलहाल मयूरभंज नारायण के पास है. इतिहास के अनुसार मयोंग के तांत्रिक शक्तियों का संबंध घटोत्कच और उनके वंशजों से है. मयोंग संग्रहालय के संस्थापक डॉ. उप्पल नाथ के मुताबिक "लोककथाओं के अनुसार, मयोंग का संबंध भीम और हिडिम्बा के पुत्र घटोत्कच से है. घटोत्कच और उनके वंशज तांत्रिक शक्तियों में निपुण थे और यहीं रहते थे."

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