राहुल के मनाने पर क्यों नहीं माने भूपेन बोरा, 32 साल कांग्रेस में बिताने के बाद क्यों ज्वाइन की BJP? बताई इस्तीफे की वजह

भूपेन बोरा ने 32 साल कांग्रेस में सेवा के बाद अपने इस्तीफे की घोषणा की. असम में कांग्रेस की स्थिति और व्यक्तिगत अनुभवों ने उन्हें BJP में शामिल होने पर मजबूर किया.

( Image Source:  ANI )
By :  सागर द्विवेदी
Updated On : 22 Feb 2026 4:32 PM IST

असम की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है. पूर्व असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) अध्यक्ष भूपेन बोरा ने रविवार को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया. गुवाहाटी स्थित भाजपा मुख्यालय ‘वाजपेयी भवन’ में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ग्रहण की.

उनके साथ कांग्रेस के कई अन्य नेता- संजू बोरा, राजेश कुमार जोशी, कंगन दास, गगन चंद्र बोरा सहित एक दर्जन से अधिक कार्यकर्ता भी भाजपा में शामिल हुए. इस अवसर पर असम भाजपा अध्यक्ष दिलीप शौकिया और मुख्यमंत्री हिमंत कुमार बिस्व भी मौजूद रहे.

क्या इस्तीफे के बाद कांग्रेस ने मनाने की कोशिश की?

भूपेन कुमार बोरा ने 16 फरवरी को कांग्रेस से इस्तीफा दिया था. हालांकि, पार्टी हाईकमान ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया. वरिष्ठ नेता उनके आवास पर पहुंचे और राहुल गांधी ने भी उनसे फोन पर बातचीत की लेकिन राहुल गांधी के मनाने पर भी वह नहीं मानें. बोरा ने अपने फैसले पर पुनर्विचार के लिए समय मांगा था. लेकिन अगले ही दिन मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा उनके घर पहुंचे और घोषणा की कि बोरा 22 फरवरी को भाजपा में शामिल होंगे.

भाजपा में शामिल होने के बाद भूपेन बोरा ने क्या कहा?

भाजपा में शामिल होने के बाद बोरा ने कहा कि 'मैंने कांग्रेस से यह सोचकर इस्तीफा नहीं दिया था कि मैं भाजपा में शामिल हो जाऊंगा. मैंने इस्तीफा इसलिए दिया था कि पार्टी अपनी गलतियों पर आत्ममंथन करेगी और उन्हें सुधारने का ठोस वादा करेगी.' उन्होंने आगे कहा कि 'सोमवार को जो कांग्रेस नेतृत्व उनके घर आया, उसने उनकी भावनाओं को आहत किया.

बोरा ने कांग्रेस पर असमिया समुदाय की भावनाएं आहत करने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि 'कांग्रेस ने असमिया समुदाय की भावनाओं को भी ठेस पहुंचाई है. मैंने 32 वर्षों तक विचारधारा, अंतरात्मा और देशभक्ति के साथ कांग्रेस की सेवा की, लेकिन अब मैं आहत हूं.'

भाजपा नेतृत्व ने क्या प्रतिक्रिया दी?

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने बोरा का स्वागत करते हुए कहा कि कांग्रेस छोड़ते समय उनके मन में कुछ अप्रसन्नता हो सकती है, लेकिन भाजपा में उनके लिए नया अध्याय शुरू हो रहा है. उन्होंने कहा कि 'आज से भाजपा में उनका नया जीवन शुरू हो रहा है. वह अब पार्टी के गर्वित सदस्य हैं. भाजपा परिवार उनका पूरा ध्यान रखेगा और उन्हें प्रेम व सम्मान देगा.'

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने कहा कि नए नेताओं के आने से पार्टी की ताकत बढ़ी है. 'आज से भाजपा कार्यकर्ताओं की ताकत और बढ़ गई है. नए सदस्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के कार्यों से प्रेरित होकर आगे आए हैं.'

गौरव गोगोई के ‘पाकिस्तान लिंक’ और अदालत की कार्रवाई पर बोरा ने क्या कहा?

गुवाहाटी में मीडिया से बातचीत के दौरान बोरा ने कहा कि 'पंचायत चुनाव से पहले असम के मुख्यमंत्री हर बैठक में उनके पाकिस्तान कनेक्शन को लेकर खुलकर बात कर रहे थे. मैंने कांग्रेस पार्टी के व्यापक हित में एआईसीसी को पत्र लिखकर मानहानि का मुकदमा दायर करने का सुझाव दिया था, लेकिन हम पंचायत चुनाव हार गए... अदालत क्या फैसला करेगी यह मेरा विषय नहीं है, मेरे लिए महत्वपूर्ण यह है कि असम की जनता क्या फैसला करती है..."

कांग्रेस छोड़ने की असली वजह क्या बताई?

भाजपा में शामिल होने पर बोरा ने कहा कि 'मैंने 32 साल दिए और कांग्रेस के साथ मेरा गहरा पारिवारिक जुड़ाव रहा है. लेकिन आज असम में कांग्रेस की स्थिति बेहद चिंताजनक है. जो लोग राज्य के हित को लेकर गंभीर हैं, वे अब कांग्रेस के साथ नहीं रह सकते."

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 'मैं अपने इस्तीफा पत्र में लिखे एक उदाहरण का जिक्र करूंगा. कांग्रेस के एक विधायक शेरमैन अली ने असम आंदोलन के सभी शहीदों को डकैत कहा था; मैंने तुरंत उन्हें निष्कासित कर दिया. असम के एक अन्य कांग्रेस विधायक ने कहा कि सभी पुजारी बलात्कारी हैं, और अब उनका नाम जलेश्वर से विधानसभा चुनाव के लिए प्रस्तावित किया गया है. एक अन्य कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा था कि जब गौरव गोगोई के नेतृत्व में कांग्रेस सत्ता में आएगी तो 45 विधानसभा सीटें मुसलमानों के लिए आरक्षित की जाएंगी.'

पार्टी नेतृत्व और नियुक्तियों पर क्या आरोप लगाए?

बोरा ने आगे कहा कि जब मुझे असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया, तब गौरव गोगोई ने अमान वादूद को सोशल मीडिया हेड नियुक्त किया. वादूद ने एक किताब लिखी थी जिसमें उन्होंने दावा किया कि असमिया लोग देशज (indigenous) नहीं हैं. मैं ऐसी टीम के साथ कैसे काम कर सकता हूँ.'

क्या चुनाव से पहले बदलेगा असम का राजनीतिक समीकरण?

126 सदस्यीय असम विधानसभा के लिए मार्च-अप्रैल में चुनाव संभावित हैं. ऐसे में भूपेन कुमार बोरा जैसे वरिष्ठ नेता का कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जाना विपक्ष के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम चुनावी रणनीति और समीकरणों पर सीधा असर डाल सकता है.

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