अकेलापन नहीं, आज़ादी है सिंगल लाइफ, नई जनरेशन की सबसे बड़ी चॉइस क्यों?

आज की पीढ़ी शादी और रिलेशनशिप से ज्यादा सिंगल रहने को प्राथमिकता क्यों दे रही है? पर्सनल फ्रीडम, करियर फोकस, पैसों की आज़ादी, मेंटल हेल्थ और सेल्फ-लव जैसे कारणों से सिंगल रहना अब मजबूरी नहीं बल्कि एक पावरफुल चॉइस बन चुका है. जानिए क्यों अकेलापन अब आज़ादी और शांति का प्रतीक बन गया है.;

( Image Source:  Sora AI )
Edited By :  नवनीत कुमार
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आज की भागदौड़ भरी दुनिया में रिश्तों को देखने का नजरिया पूरी तरह बदल चुका है. एक वक्त था जब 25 की उम्र पार करते ही “शादी कब करोगे?” जैसे सवाल आम हो जाते थे. लेकिन अब तस्वीर उलटी है. आज की पीढ़ी ‘मिंगल’ होने से ज्यादा ‘सिंगल’ रहने को एक मजबूत और समझदारी भरा फैसला मान रही है.

अब सिंगल रहना मजबूरी नहीं, बल्कि एक तरह की लग्जरी और आज़ादी की पहचान बन चुका है. लोग इसे अकेलापन नहीं, बल्कि खुद के साथ खुश रहने की कला मान रहे हैं. सवाल ये है कि आखिर ऐसा क्या बदला कि जो चीज़ कभी डर लगती थी, वही आज सुकून देने लगी? इसी बदले हुए एंगल से समझते हैं आज की सोच.

क्या सिंगल रहना ही आज़ादी है?

हां, और यही इसकी सबसे बड़ी वजह भी है. सिंगल रहने का मतलब है कि अपनी शर्तों पर जिंदगी. कब सोना है, क्या खाना है, वीकेंड कैसे बिताना है. इन छोटे फैसलों के लिए किसी को जवाब नहीं देना पड़ता. यही पर्सनल फ्रीडम लोगों को मानसिक सुकून देती है और वे खुद को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं.

करियर ने रिश्तों को पीछे क्यों छोड़ दिया?

आज की दुनिया में मुकाबला बहुत तेज है. ऐसे में युवा अपनी पूरी ऊर्जा करियर बनाने में लगाना चाहते हैं. उन्हें लगता है कि रिश्तों के इमोशनल उतार-चढ़ाव से बेहतर है प्रोफेशनल ग्रोथ पर फोकस करना. पहले खुद को मजबूत बनाओ, पहचान बनाओ रिश्ता बाद में भी हो सकता है.

पैसों की आज़ादी ने सोच कैसे बदली?

आर्थिक स्वतंत्रता ने खासकर महिलाओं की सोच में बड़ा बदलाव किया है. अब शादी को सुरक्षा कवच नहीं माना जाता. लोग अपनी कमाई को अपनी मर्जी से खर्च करना चाहते हैं. चाहे ट्रैवल हो, निवेश हो या मनपसंद शौक. किसी और की पसंद या सहमति की चिंता नहीं, यही आज की नई आज़ादी है.

रिश्तों से ज्यादा ‘शांति’ क्यों जरूरी हो गई है?

टॉक्सिक रिश्ते और दर्दनाक ब्रेकअप लोगों को अंदर तक तोड़ देते हैं. ऐसे अनुभवों के बाद लोग दोबारा उसी तनाव में नहीं पड़ना चाहते. अब सोच ये है कि अगर रिश्ता शांति नहीं दे सकता, तो अकेले रहना बेहतर है. आज के युवाओं के लिए मानसिक सुकून किसी भी रोमांस से ऊपर है.

सेल्फ-लव और मेंटल हेल्थ का रोल कितना बड़ा है?

लोग अब समझ चुके हैं कि खुशी किसी दूसरे इंसान से नहीं, खुद से आती है. सेल्फ-केयर, मेडिटेशन और खुद के साथ समय बिताना अब ट्रेंड नहीं, जरूरत बन चुका है. मेंटल हेल्थ को बचाए रखने के लिए कई लोग सिंगल रहना ही सही विकल्प मानते हैं.

सिंगल लाइफ को ‘लाइट’ लाइफस्टाइल क्यों कहा जा रहा है?

रिश्ता सिर्फ दो लोगों का नहीं होता, उसके साथ परिवार, जिम्मेदारियां और अपेक्षाएं भी जुड़ जाती हैं. आज की पीढ़ी भारी बंधनों की बजाय हल्की, तनावमुक्त जिंदगी चाहती है. सोलो ट्रैवल, एडवेंचर और अपनी मर्जी की लाइफ यही वजह है कि सिंगल रहना अब खुद को प्राथमिकता देने का तरीका बन गया है.

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