ऐसा क्या किया कि फिर से देखने लगी अंधी महिला, क्या है Hypotony जिससे थीं पीड़ित

सोचिए क्या हो जब आपकी आंखों की रोशनी चली जाए, लेकिन फिर आपको सब कुछ दिखने लग जाए? ऐसा ही एक महिला के साथ हुआ है, जो Hypotony की बीमारी से पीड़ित थी. यह एक गंभीर आंखों की बीमारी है, जिसके कारण उन्हें दिखना बंद हो गया था.;

( Image Source:  AI SORA )
Edited By :  हेमा पंत
Updated On : 12 Jan 2026 11:27 AM IST

ये आंखें ही तो हैं, जो इस खूबसूरत दुनिया को देख पाती हैं. आंखें न हो, तो इंसान की जिंदगी में रंग नहीं रहते हैं. इसलिए कहा जाता है कि आंखों की देखभाल करनी चाहिए. जरा सोचिए कि कोई महिला अंधी हो जाए और फिर अचानक उन्हें दिखाई देने लगे? शायद दुनिया में इससे बड़ी कोई खुशी नहीं होगी. 

हाल ही में लंदन में एक महिला हाइपोटॉनी की बीमारी से पीड़ित थी, लेकिन अब वह इस गंभीर हालत से उबरकर फिर से देख पाने में सफल हुई हैं. चलिए ऐसे में जानते हैं आखिर क्या है हाइपोटॉनी और इसके लक्षण से लेकर इलाज तक.

हाइपोटॉनी क्या है?

हाइपोटॉनी वह कंडीशन है, जब आंखों के अंदर का प्रेशर नॉर्मल से बहुत कम हो जाता है, आमतौर पर 5-6.5 mmHg या उससे कम. जब दबाव कम होता है, तो आंख की संरचना ढल सकती है, जिससे देखने में धुंधलापन, स्ट्रेन और अन्य गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. अगर समय पर इलाज न किया जाए, तो यह विजन को हमेशा के लिए नुकसान भी पहुंचा सकता है.

बीमारी के कारण

  • सर्जरी के बाद होने वाली समस्या के कारण हाइपोटॉनी हो सकता है. जैसे ग्लॉकोमा जैसी आंख की सर्जरी के बाद आंख में लीकेज या अधिक फिल्टरिंग के कारण दबाव कम हो सकता है.
  • आंख में चोट चलते भी आंख में लीक या स्ट्रक्चरल नुकसान हो सकता है.
  • आंख के अंदर की सूजन, जैसे यूवीएइटिस, कांच की झिल्ली (aqueous humor) का प्रोडक्शन कम कर सकती है.
  • रेटिना के अलग होने से भी दबाव कम हो सकता है, जिसके कारण यह बीमारी हो सकती है.
  • कुछ खास आंख की ड्रॉप्स के कारण भी आंख का दबाव कम होने लगता है. 

हाइपोटॉनी के लक्षण

हाइपोटॉनी में आंखों की कई समस्याएं दिखाई दे सकती हैं:

  • धुंधली या खराब विजन, कभी-कभी हल्के-हल्के हॅलोज़ दिखाई देना.
  • आंख के सामने वाले हिस्से में गहराई कम होना.
  • कॉर्निया में सूजन या अस्थायी धुंधलापन. 
  • आंख के पीछे झुर्रियां या फोल्ड्स का बनना. 
  • ऑप्टिक नर्व में सूजन.

क्या है इलाज?

हाइपोटॉनी का इलाज इसके कारण पर निर्भर करता है. हाल ही में निक्की गाई के मामले में डॉक्टरों ने clear and colorless hydroxypropyl methylcellulose नाम की जेल को हर दो हफ्ते में आंख में इंजेक्ट किया. इस प्रोसेस से आंख की संरचना "पंप अप" हुई और रोशनी वापस आ गई. अन्य इलाजों में सर्जिकल रिपेयर, दवाइयां और आंख के दबाव को सामान्य करने वाली तकनीकें शामिल हैं. जल्दी और सही समय पर इलाज से आंख की रोशनी को स्थायी नुकसान से बचाया जा सकता है.

निक्की गाई का एक्सपीरियंस

निक्की गाई ने बताया कि हाइपोटॉनी के दौरान उनकी आंखें “कागज के थैले जैसी” महसूस होती थीं. आंख के अंदर रोशनी मौजूद थी, लेकिन संरचना की गिरावट के कारण देखने में कठिनाई हो रही थी. 

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